Sarangarh Bilaigarh. सारंगढ़ बिलाईगढ़। खरीफ वर्ष 2025-26 में सारंगढ़ बिलाईगढ़ जिले के ग्राम गंधराचुवा के किसान जगतराम चौहान ने अपने धान की उपज को धान खरीदी केंद्र कनकबीरा में राज्य सरकार को बेचकर उस राशि से अपने बेटे की शादी करने का सपना संजोया है। लगभग 3 एकड़ भूमि से उगाए गए धान को किसान ने बिक्री के लिए केंद्र पर पहुंचाया। किसान जगतराम चौहान ने बताया कि धान बेचने से जो राशि उन्हें मिलेगी, उसे उन्होंने पहले से जमा पूंजी के साथ मिलाकर अपने बेटे की शादी के लिए उपयोग करने का योजना बनाई है। उन्होंने यह भी कहा कि प्रति क्विंटल 3100 रुपये के समर्थन मूल्य से धान खरीदने पर वे काफी खुश हैं।
जगतराम ने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय को धन्यवाद देते हुए कहा कि प्रति एकड़ 21 क्विंटल धान खरीदने पर राज्य सरकार द्वारा दी गई सुविधा अत्यंत लाभकारी रही। उन्होंने धान खरीदी के लिए लागू टोकन प्रणाली की भी सराहना की। पहले किसानों को टोकन लेने के लिए लंबी लाइन में खड़ा होना पड़ता था, लेकिन अब ऑनलाइन सुविधा के माध्यम से मोबाइल ऐप से टोकन काटना संभव हो गया है। किसान ने यह भी बताया कि धान खरीदी केंद्र पर सभी सुविधाएं उपलब्ध हैं। केंद्र में बैठने की व्यवस्था, धान लाने-ले जाने के लिए हमाल, पानी की व्यवस्था, अच्छा बारदाना, और अन्य सुविधाओं से किसान संतुष्ट हैं। उन्होंने कहा कि अब किसानों को खरीदी में किसी भी प्रकार की परेशानी नहीं हो रही है और प्रक्रिया पहले की तुलना में बहुत सरल और सुचारू हो गई है। किसान जगतराम ने आगे कहा कि धान की बिक्री से प्राप्त राशि उनके परिवार के लिए बहुत मददगार साबित होगी।
इस राशि से वे अपने बेटे के विवाह समारोह को आराम और सुविधा के साथ संपन्न कर पाएंगे। उन्होंने कहा कि यह समर्थन मूल्य किसानों के लिए आर्थिक सुरक्षा और आत्मनिर्भरता का प्रतीक है। इस अवसर पर किसान ने राज्य सरकार की धान खरीदी नीतियों की भी सराहना की। उन्होंने बताया कि टोकन सिस्टम और ऑनलाइन सुविधा से किसानों का समय बचता है और वे आसानी से धान की बिक्री कर सकते हैं। इसके अलावा केंद्र पर उपलब्ध सुविधाओं और अच्छे माहौल के कारण किसानों को खरीद प्रक्रिया में कोई परेशानी नहीं होती। धान खरीदी केंद्र कनकबीरा में यह अनुभव दर्शाता है कि सरकार की योजनाओं और सुविधाओं के माध्यम से किसान न केवल अपनी उपज की उचित कीमत पा रहे हैं, बल्कि अपनी व्यक्तिगत और पारिवारिक जरूरतों को भी पूरा कर पा रहे हैं। जगतराम चौहान की कहानी यह भी दर्शाती है कि कैसे सरकारी नीतियों और उचित समर्थन मूल्य से किसान अपने जीवन की महत्वपूर्ण योजनाओं को पूरा कर सकते हैं और आर्थिक रूप से सशक्त बन सकते हैं।