Bilaspur. बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में मोहम्मद इमरान कादरी बनाम छत्तीसगढ़ राज्य के जमानत प्रकरण में आवेदक की ओर से पैरवी कर रहे अधिवक्ता ठाकुर निश्चय सिंह को अहम सफलता मिली है। हाईकोर्ट ने मामले की परिस्थितियों पर विचार करते हुए आरोपी को जमानत प्रदान की। अदालत के समक्ष राज्य की ओर से आरोपी के पूर्व आपराधिक मामलों का उल्लेख किया गया था। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि आपराधिक पृष्ठभूमि प्रासंगिक जरूर हो सकती है, लेकिन केवल पूर्व आपराधिक मामलों के आधार पर जमानत से इनकार नहीं किया जा सकता।

न्यायमूर्ति राकेश मोहन पांडेय की अदालत ने 21 सितंबर 2026 को मामले में आदेश पारित किया। प्रकरण में आवेदक की ओर से सर्वोच्च न्यायालय के अधिवक्ता ठाकुर निश्चय सिंह उपस्थित हुए। उन्होंने जमानत के पक्ष में मामले से जुड़ी परिस्थितियों, जांच की स्थिति, हिरासत की अवधि और आरोपपत्र दाखिल होने जैसे तथ्यों को अदालत के सामने रखा। अदालत के समक्ष राज्य की ओर से बताया गया कि आवेदक के खिलाफ पहले से तीन आपराधिक मामले दर्ज हैं और इनमें समान प्रकृति के मामले भी शामिल हैं। उपलब्ध विवरण के मुताबिक, इन तीन मामलों में एक का निराकरण हो चुका है, जबकि दो मामले लंबित हैं।

पूर्व मामलों के बावजूद जमानत पर विचार
अदालत ने पूर्व आपराधिक मामलों के साथ वर्तमान प्रकरण की परिस्थितियों पर भी विचार किया। आदेश में पूर्व आपराधिक मामलों को जमानत से इनकार का स्वतः और एकमात्र आधार नहीं मानने के न्यायिक सिद्धांत का उल्लेख किया गया। जमानत के मामलों में अदालतें आरोपों की प्रकृति, जांच की स्थिति, हिरासत की अवधि और अन्य प्रासंगिक परिस्थितियों को समग्र रूप से देखती हैं। अधिवक्ता ठाकुर निश्चय सिंह की ओर से की गई पैरवी में भी इन्हीं पहलुओं को प्रमुखता से न्यायालय के समक्ष रखा गया। उनकी ओर से प्रस्तुत तर्कों और मामले के तथ्यों पर विचार के बाद आवेदक को जमानत मिलने से बचाव पक्ष को महत्वपूर्ण राहत मिली।


नौकरी दिलाने के नाम पर रुपये लेने का आरोप
प्रकरण में आरोपी पर नौकरी दिलाने के नाम पर रुपये लेने का आरोप है। शिकायतकर्ता की ओर से स्वयं से चार लाख रुपये लिए जाने का आरोप लगाया गया था। वहीं प्राथमिकी में अन्य व्यक्तियों से कथित तौर पर ली गई रकम को जोड़ते हुए कुल राशि 25 लाख रुपये बताई गई। अदालत ने इस तथ्य को भी ध्यान में रखा कि मामले की जांच के बाद आरोपपत्र दाखिल किया जा चुका है। आवेदक 7 जुलाई 2026 से हिरासत में था। इन परिस्थितियों पर विचार करते हुए हाईकोर्ट ने मामले के गुण-दोष पर कोई अंतिम राय व्यक्त किए बिना आवेदक को जमानत देने का आदेश दिया। न्यायालय ने आवेदक को 50 हजार रुपये के निजी मुचलके और समान राशि की जमानत प्रस्तुत करने की शर्त पर रिहा करने का आदेश दिया।

अधिवक्ता ठाकुर निश्चय सिंह की प्रभावी पैरवी
इस प्रकरण में आवेदक की ओर से अधिवक्ता ठाकुर निश्चय सिंह की पैरवी महत्वपूर्ण रही। मामले के कानूनी और तथ्यात्मक पहलुओं को अदालत के समक्ष रखते हुए उन्होंने यह पक्ष प्रस्तुत किया कि केवल पूर्व आपराधिक मामलों की मौजूदगी को जमानत खारिज करने का निर्णायक आधार नहीं बनाया जाना चाहिए और वर्तमान प्रकरण की परिस्थितियों का स्वतंत्र रूप से परीक्षण जरूरी है। मामले में मिली राहत के बाद अधिवक्ता ठाकुर निश्चय सिंह ने बताया कि जमानत पर विचार करते समय आरोपी की आपराधिक पृष्ठभूमि प्रासंगिक हो सकती है, लेकिन अदालत वर्तमान मामले की सामग्री, जांच की स्थिति, हिरासत की अवधि और अन्य परिस्थितियों पर भी विचार करती है।

उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि जमानत मिलने का अर्थ आरोपी का आरोपों से बरी होना नहीं है। आरोपी दोषी है या निर्दोष, इसका अंतिम निर्णय विचारण के दौरान प्रस्तुत साक्ष्यों और कानून के आधार पर न्यायालय करेगा। जमानत का आदेश केवल विचारण लंबित रहने के दौरान आरोपी की स्वतंत्रता से संबंधित है। इस फैसले में जमानत से जुड़े उस महत्वपूर्ण पहलू पर फिर ध्यान गया है कि पूर्व आपराधिक पृष्ठभूमि को अन्य तथ्यों से अलग करके नहीं देखा जा सकता। विभिन्न मामलों में अदालतें परिस्थितियों के आधार पर आपराधिक पृष्ठभूमि को अलग-अलग महत्व देती रही हैं; उदाहरण के लिए, गंभीर आरोपों के साथ आपराधिक पृष्ठभूमि को जमानत के विरुद्ध भी ध्यान में रखा गया है। प्रकरण मोहम्मद इमरान कादरी बनाम छत्तीसगढ़ राज्य, MCRC क्रमांक 7404/2026 है, जिसमें 21 सितंबर 2026 को आदेश पारित किया गया।
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