प्रेस क्लब चुनाव की मांग हुई तेज, पंजीयक तक पहुंचा मामला

Update: 2025-09-15 04:16 GMT

प्रेस क्लब चुनाव पर संशय, संविधान संशोधन बना पेच

पंजीयक ने फैसला सुरक्षित रखा

रायपुर। रायपुर प्रेस क्लब में इस समय चुनाव और संविधान संशोधन को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। 17 फरवरी 2024 को हुए चुनाव के बाद निर्वाचित कार्यकारिणी का एक साल का कार्यकाल फरवरी 2025 में ही पूरा हो गया था। नियमों के मुताबिक अप्रैल तक चुनाव संपन्न हो जाने चाहिए थे, लेकिन वर्तमान अध्यक्ष और पदाधिकारियों ने परिस्थितियों का हवाला देते हुए चुनाव टाल दिया। इसी के चलते जागरूक पत्रकारों ने पंजीयक, फर्म एवं सोसाइटी के पास चुनाव कराने की मांग रख दी है।

मिली जानकारी के मुताबिक संविधान संशोधन के सदस्यों की सहमति के नाम पर तीन तीन रजिस्टर तैयार किए गए है प्रेस क्लब में 1 दिसंबर को हुई सामान्य सभा में जब हंगामा हो गया और धक्का मुक्की की स्थिति में सामान्य सभा नहीं हो पाई तो अध्यक्ष ने संविधान संशोधन की सहमति के लिए सदस्यों से हस्ताक्षर का एक रजिस्टर बनाया जिसमें 145 लोग के साइन लिए , वही एजेंडे के खिलाफ भी हस्ताक्षर कराते हुए विरोधी गुट ने भी हस्ताक्षर कराया 125 लोगों के साइन कराए , जिसे पंजीयक के पास जमा कराया गया, लेकिन नियम अनुसार 3/5 यानी 60% सहमति आवश्यक होने के कारण प्रेस क्लब ने एक तीसरा रजिस्टर भी बनाया और सदस्यों को चुनाव कराए जाने के नाम पर हस्ताक्षर कराए गए जिसमें संख्या 342 है इसे प्रेस क्लब की ओर से जुलाई महीने में बाद में जमा करा कर संविधान संशोधन का अप्रूवल मंगा गया है , इस तरह तीन अलग अलग हस्ताक्षर अभियान कराए गए है जिसको लेकर संशय बना हुआ है

संविधान संशोधन में नए प्रावधान

इस बीच प्रेस क्लब ने संविधान संशोधन का प्रयास करते हुए कई बड़े बदलावों का कथित रूप से प्रस्ताव पास करा लिया है,, जिसमें सदस्यता शुल्क को दस गुना की वृद्धि । इसके साथ ही करीब 400 नए सदस्यों को सदस्यता देने की अनुमति दी गई। सबसे बड़ा बदलाव यह रहा कि अब तक क्लब से बाहर रखे गए न्यूज़ पोर्टल और डिजिटल प्लेटफॉर्म सोशल मीडिया में काम करने वाले पत्रकारों को भी सदस्यता देने का प्रावधान किया गया। इसे प्रेस क्लब के लिए क्रांतिकारी कदम बताया जा रहा था, लेकिन नियम प्रक्रिया में अनियमितताओं के आरोप लगने से संशोधन अधर में लटक गया।

याचिका और आरोप

संविधान संशोधन को चुनौती देते हुए पत्रकार संदीप पुराणिक और मोहन तिवारी, सनत तिवारी , शिव वर्मा, प्रदीप चंद्रवंशी ने पंजीयक के पास याचिका लगाई। इसमें कहा गया कि संशोधन की प्रक्रिया नियमों के विपरीत रही है। आरोप यह हैं कि—

1. विशेष आमसभा आयोजित नहीं की गई।

2. कुल सदस्यों के 25% उपस्थिति कोरम का पालन नहीं हुआ।

3. सभा की विधिवत सूचना जारी नहीं की गई।

4. प्रस्तावित संशोधन की प्रति सदस्यों को नहीं दी गई।

5. आमसभा में संशोधन पर चर्चा नहीं हुई।

6. हंगामे के बीच बिना सहमति के संशोधन मान लिया गया।

7. 60% सहमति की अनिवार्यता का पालन नहीं हुआ।

8. सभा के बाद नियम विरुद्ध तरीके से सहमति ली गई।

9. सभा के रजिस्टर का दुरुपयोग किया गया।

10. दुर्भावनापूर्वक विरोध खेमे सवा सौ सदस्यों के नाम काटे गए है

इन तमाम बिंदुओं को साक्ष्यों सहित पंजीयक के समक्ष रखा गया है।

सुनवाई पूरी, फैसला बाकी

इस मामले में दोनों पक्षों की दो-दो बार सुनवाई हो चुकी है। अब पंजीयक, फर्म एवं सोसाइटी ने संविधान संशोधन को लेकर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है। प्रेस क्लब से जुड़े पत्रकारों की निगाहें इसी फैसले पर टिकी हुई हैं।

चुनाव क्यों टल रहे?

वर्तमान कार्यकारिणी चुनाव इसलिए टाल रही है क्योंकि संविधान संशोधन की स्थिति स्पष्ट न होने पर नए सदस्य वोटिंग में शामिल नहीं हो पाएंगे और इसका फायदा वर्तमान पदाधिकारियों को नहीं मिल पाएगा। यही वजह है कि पदाधिकारी चुनाव से बचते दिख रहे हैं। जबकि पिछली बार निर्वाचित पदाधिकारियों ने यह वादा किया था कि तय समय सीमा में प्रेस क्लब के चुनाव नियमित रूप से कराए जाएंगे।

आगे क्या होगा ..?

फिलहाल रायपुर प्रेस क्लब का चुनाव और संविधान संशोधन दोनों ही नियमों की जटिलताओं में उलझे हुए हैं। पत्रकार बिरादरी में चर्चा है कि यदि पंजीयक संशोधन को खारिज करता है तो चुनाव पुराने नियमों के अनुसार होंगे, लेकिन यदि संशोधन को मान्यता मिलती है तो नए सदस्य भी क्लब की राजनीति में अहम भूमिका निभा सकते हैं।

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