Mahasamund. महासमुंद। राज्य कार्यालय के निर्देशानुसार राष्ट्रीय कुष्ठ उन्मूलन कार्यक्रम के अंतर्गत महासमुंद जिले में संचालित एलसीडीसी यानी लेप्रोसी केस डिटेक्शन कैंपेन और मलेरिया सर्वेक्षण की प्रगति एवं गुणवत्ता का जिला स्तरीय निरीक्षण किया गया। इस दौरान स्वास्थ्य विभाग की टीम ने गांवों में चल रहे सर्वेक्षण कार्यों का जायजा लिया और मैदानी स्तर पर किए जा रहे कार्यों की गुणवत्ता की जांच की। जिला कुष्ठ अधिकारी डॉ. वी. पी. सिंह ने विकासखंड बसना के ग्राम घानापाली और संतपाली में संचालित सर्वेक्षण कार्यों का निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान उन्होंने सर्वेक्षण दलों द्वारा घर-घर जाकर किए जा रहे कार्यों को देखा। साथ ही संदिग्ध कुष्ठ रोगियों की पहचान, एलसीडीसी की ऑनलाइन एंट्री, फील्ड गतिविधियों और सर्वेक्षण प्रक्रिया की गुणवत्ता का बारीकी से अवलोकन किया।
निरीक्षण के दौरान डॉ. सिंह ने सर्वेक्षण दलों को निर्देशित किया कि अभियान के दौरान जिले के प्रत्येक घर तक पहुंच सुनिश्चित की जाए। उन्होंने कहा कि निर्धारित प्रपत्रों के अनुसार सर्वेक्षण कार्य को पूरी गंभीरता और गुणवत्ता के साथ पूरा किया जाना चाहिए। किसी भी परिवार या संभावित मरीज को सर्वेक्षण से बाहर नहीं रखा जाए, ताकि कुष्ठ रोग के संदिग्ध मामलों की समय पर पहचान की जा सके। डॉ. सिंह ने विशेष रूप से संदिग्ध कुष्ठ रोगियों की पहचान के बाद उन्हें आवश्यक जांच और उपचार के लिए स्वास्थ्य संस्थाओं से जोड़ने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि बीमारी की समय पर पहचान होने से मरीज को आवश्यक उपचार उपलब्ध कराया जा सकता है और बीमारी के आगे बढ़ने की संभावना को कम किया जा सकता है। इसके लिए सर्वेक्षण दलों को मैदानी स्तर पर पूरी सजगता के साथ काम करने के निर्देश दिए गए।
एलसीडीसी पोर्टल पर ऑनलाइन प्रविष्टियों को लेकर भी अधिकारियों ने आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। सर्वेक्षण के दौरान एकत्र की गई जानकारी की ऑनलाइन एंट्री समयबद्ध और त्रुटिरहित तरीके से करने पर जोर दिया गया। अधिकारियों ने कहा कि मैदानी सर्वेक्षण और ऑनलाइन रिकॉर्ड में किसी प्रकार का अंतर नहीं होना चाहिए। सही और समय पर डेटा दर्ज होने से अभियान की प्रगति की निगरानी करने में मदद मिलती है। निरीक्षण के दौरान मलेरिया सर्वेक्षण की गतिविधियों की भी समीक्षा की गई। अधिकारियों ने सर्वेक्षण दलों को प्रत्येक परिवार तक पहुंचकर निर्धारित मानकों के अनुरूप कार्य करने के निर्देश दिए। मलेरिया से संबंधित सर्वेक्षण में फील्ड गतिविधियों की गुणवत्ता बनाए रखने और निर्धारित प्रक्रिया का पालन करने पर विशेष जोर दिया गया।
स्वास्थ्य विभाग की टीम ने सर्वेक्षण दलों को बताया कि घर-घर सर्वेक्षण के दौरान लोगों से आवश्यक जानकारी प्राप्त करने के साथ संदिग्ध मामलों की पहचान पर विशेष ध्यान दिया जाना चाहिए। ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य संबंधी जागरूकता बढ़ाने और लोगों को आवश्यक जांच एवं उपचार के लिए स्वास्थ्य संस्थाओं तक पहुंचाने में मैदानी कर्मचारियों की महत्वपूर्ण भूमिका है। जिला कुष्ठ अधिकारी ने सर्वेक्षण दलों के कार्यों की समीक्षा करते हुए उन्हें जिम्मेदारी और गंभीरता के साथ अभियान को आगे बढ़ाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय कुष्ठ उन्मूलन कार्यक्रम के लक्ष्यों को हासिल करने के लिए नियमित सर्वेक्षण और संदिग्ध मामलों की समय पर पहचान जरूरी है। इसी तरह मलेरिया सर्वेक्षण में भी प्रत्येक परिवार तक पहुंचकर निर्धारित मानकों के अनुसार कार्य किया जाना आवश्यक है।
निरीक्षण के दौरान जिला टीम से जिला मीडिया अधिकारी हरिशंकर साहू, जिला सलाहकार कुष्ठ एकेश्वर शुक्ला और एनएमए बी. एल. साहू उपस्थित रहे। टीम के सदस्यों ने भी सर्वेक्षण दलों को आवश्यक तकनीकी मार्गदर्शन दिया। उन्होंने मैदानी कार्य के दौरान आने वाली परिस्थितियों के अनुसार सर्वेक्षण प्रक्रिया को प्रभावी तरीके से पूरा करने के निर्देश दिए। अधिकारियों ने सर्वेक्षण दलों से कहा कि अभियान के दौरान फील्ड गतिविधियों के साथ-साथ रिकॉर्ड संधारण और ऑनलाइन एंट्री पर भी समान रूप से ध्यान दिया जाए। इससे सर्वेक्षण की वास्तविक प्रगति का आकलन किया जा सकेगा और जरूरत के अनुसार स्वास्थ्य विभाग द्वारा आगे की कार्रवाई की जा सकेगी। महासमुंद जिले में चल रहे इस अभियान के माध्यम से कुष्ठ रोग के संदिग्ध मरीजों की पहचान और मलेरिया से संबंधित मामलों की निगरानी को मजबूत करने का प्रयास किया जा रहा है। जिला स्तरीय निरीक्षण के दौरान स्वास्थ्य विभाग ने सर्वेक्षण कार्य की गुणवत्ता को प्राथमिकता देने और प्रत्येक पात्र परिवार तक पहुंच सुनिश्चित करने पर विशेष जोर दिया। अधिकारियों ने सर्वेक्षण दलों को अभियान को प्रभावी, व्यवस्थित और गुणवत्तापूर्ण तरीके से पूरा करने के निर्देश दिए।