धमतरी पॉलिटेक्निक के प्राचार्य और दो व्याख्याताओं पर गिरी गाज

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Update: 2025-09-03 16:06 GMT
Raipur. रायपुर। छत्तीसगढ़ शासन ने तकनीकी शिक्षा विभाग से जुड़े एक गंभीर मामले में कार्रवाई करते हुए धमतरी स्थित भोपाल राव पवार शासकीय पॉलीटेक्निक कॉलेज के प्राचार्य और दो व्याख्याताओं को तत्काल प्रभाव से नवा रायपुर मुख्यालय में संलग्न कर दिया है। यह कदम उनके विरुद्ध दर्ज शिकायतों और जांच प्रतिवेदन के आधार पर उठाया गया है। जारी आदेश (पंजी क्र.12410/2567/2025/तक.शि. 42, दिनांक 03.09.2025) के अनुसार प्राचार्य गेलुस राम साहू, व्याख्याता (अंग्रेजी) संदीप सिंह और व्याख्याता (इलेक्ट्रिकल) हर्षल मोहिते को तत्काल प्रभाव से संचालनालय तकनीकी शिक्षा, इन्द्रावती भवन, नवा रायपुर, अटल नगर में संलग्न किया गया है। यह आदेश आगामी आदेश तक प्रभावी रहेगा।

शिकायतों के बाद हुई जांच
सूत्रों के अनुसार धमतरी पॉलीटेक्निक के इन अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ कार्यप्रणाली को लेकर शिकायतें दर्ज की गई थीं। शिकायतों की जांच के बाद जो प्रतिवेदन शासन को प्राप्त हुआ, उसमें गंभीर अनियमितताओं और प्रशासनिक लापरवाही की ओर संकेत मिला। इसी आधार पर शासन ने यह सख्त कदम उठाया। तकनीकी शिक्षा विभाग लंबे समय से शैक्षणिक संस्थानों में पारदर्शिता और गुणवत्ता सुधार को लेकर प्रयासरत है। विभागीय सूत्र बताते हैं कि शिकायतों को गंभीरता से लेकर जांच कराना और दोषियों पर कार्रवाई करना इस बात का प्रमाण है कि शासन अब किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त करने के मूड में नहीं है।

प्राचार्य समेत व्याख्याताओं पर आरोप
हालांकि, शासन के आदेश में आरोपों का स्पष्ट उल्लेख नहीं किया गया है, लेकिन बताया जा रहा है कि शिकायतें शैक्षणिक गतिविधियों, अनुशासन, वित्तीय अनियमितताओं और प्रशासनिक गड़बड़ियों से संबंधित थीं। छात्रों और अभिभावकों ने भी कई बार कॉलेज की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए थे।

नवा रायपुर मुख्यालय में संलग्न
अब प्राचार्य गेलुस राम साहू, संदीप सिंह और हर्षल मोहिते को धमतरी पॉलीटेक्निक से हटाकर सीधे संचालनालय तकनीकी शिक्षा, नवा रायपुर में संलग्न किया गया है। यहां से वे विभागीय कार्यों में योगदान देंगे। इस कार्रवाई को प्रशासनिक फेरबदल के रूप में देखा जा रहा है, जिसका मकसद जांच पूरी होने तक कॉलेज की कार्यप्रणाली को बेहतर ढंग से संचालित करना है।

अगली कार्रवाई की तैयारी
शासन के आदेश में यह भी स्पष्ट किया गया है कि यह संलग्निकरण अस्थायी व्यवस्था है। आगे की कार्रवाई जांच प्रतिवेदन की अंतिम रिपोर्ट और संबंधित विभागीय अनुशासनात्मक कार्यवाही पर निर्भर करेगी। यदि आरोप गंभीर साबित होते हैं, तो बड़ी प्रशासनिक कार्रवाई भी संभव है। इस पूरे घटनाक्रम ने छात्रों और अभिभावकों में चर्चा का विषय बना दिया है। कई छात्र नेताओं ने इसे सकारात्मक कदम बताया है और कहा कि शासन की इस कार्रवाई से कॉलेजों में शैक्षणिक माहौल सुधारने की दिशा में ठोस संदेश जाएगा।
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