Raipur. रायपुर। छत्तीसगढ़ में आपराधिक जांच और न्यायिक प्रक्रिया को अधिक आधुनिक, पारदर्शी और प्रभावी बनाने की दिशा में राज्य सरकार ने महत्वपूर्ण कदम उठाया है। गृह विभाग ने छत्तीसगढ़ श्रव्य-दृश्य रिकॉर्डिंग साधन नियम, 2026 अधिसूचित कर दिए हैं। नए नियम लागू होने के बाद पुलिस और न्यायिक प्रक्रिया से जुड़े कई महत्वपूर्ण कार्यों में इलेक्ट्रॉनिक माध्यमों का इस्तेमाल किया जा सकेगा। इसमें गिरफ्तारी की सूचना देने, अपराध से संबंधित जानकारी प्रसारित करने, मजिस्ट्रेट को रिपोर्ट भेजने और गवाहों के बयान दर्ज करने जैसी प्रक्रियाएं शामिल हैं। इन नियमों के तहत वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग, मोबाइल फोन, ई-मेल, CCTV और अन्य इलेक्ट्रॉनिक संचार माध्यमों के जरिए निर्धारित प्रक्रियाएं पूरी की जा सकेंगी। सरकार का उद्देश्य आपराधिक जांच में तकनीक का इस्तेमाल बढ़ाना और न्यायिक प्रक्रिया को अधिक सुविधाजनक बनाना है।
BNSS की धारा 2 के तहत बनाए गए नियम
गृह विभाग ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS), 2023 की धारा 2 की उपधारा (1) के खंड (क) के अंतर्गत प्राप्त अधिकारों का उपयोग करते हुए ये नियम जारी किए हैं। इनका आधिकारिक नाम छत्तीसगढ़ श्रव्य-दृश्य रिकॉर्डिंग साधन नियम, 2026 रखा गया है। राजपत्र में अधिसूचना जारी होने के साथ ही ये प्रभावी हो गए हैं। इन नियमों के जरिए राज्य सरकार ने स्पष्ट किया है कि आपराधिक जांच और संबंधित कानूनी प्रक्रियाओं में किन-किन इलेक्ट्रॉनिक माध्यमों का उपयोग किया जा सकता है। इससे पुलिस विभाग को तकनीक आधारित संचार और रिकॉर्डिंग की व्यवस्था अपनाने के लिए कानूनी आधार मिलेगा।
मोबाइल, ई-मेल और वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग भी दायरे में
नए नियमों में इलेक्ट्रॉनिक माध्यमों की परिभाषा व्यापक रखी गई है। इसमें वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग, CCTV, सुरक्षित डिजिटल इंटरफेस और इलेक्ट्रॉनिक संचार प्रणालियों को शामिल किया गया है। इसके अलावा मोबाइल फोन, कंप्यूटर, लैपटॉप, कैमरा, माइक्रोफोन, स्पीकर और प्रिंटर जैसे उपकरण भी इसके दायरे में आएंगे। ई-मेल, इंटरनेट, टेलीफोन और अन्य दूरसंचार माध्यमों के जरिए भी निर्धारित प्रक्रियाओं को पूरा किया जा सकेगा। खास बात यह है कि नियमों में केवल वर्तमान तकनीक तक व्यवस्था को सीमित नहीं रखा गया है। भविष्य में विकसित होने वाले इलेक्ट्रॉनिक और डिजिटल माध्यमों को भी इसमें शामिल करने का प्रावधान किया गया है। इससे नई तकनीकों के इस्तेमाल के लिए नियमों में बार-बार बदलाव करने की आवश्यकता कम हो सकती है।
गिरफ्तारी और गवाहों के बयान में मिलेगा डिजिटल विकल्प
नए नियमों का असर पुलिस की रोजमर्रा की जांच प्रक्रिया पर भी पड़ सकता है। गिरफ्तारी से संबंधित सूचना भेजने, अपराध की जानकारी प्रसारित करने और मजिस्ट्रेट को भेजी जाने वाली रिपोर्ट में इलेक्ट्रॉनिक माध्यमों का उपयोग किया जा सकेगा। इसी तरह जांच के दौरान गवाहों को बयान दर्ज कराने के लिए सूचना देने तथा उनके बयान रिकॉर्ड करने में भी इलेक्ट्रॉनिक साधनों का उपयोग किया जा सकेगा। इससे संबंधित प्रक्रियाओं को अधिक व्यवस्थित और रिकॉर्ड आधारित बनाने में मदद मिल सकती है। भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता में पहले से ही तलाशी और जब्ती की ऑडियो-वीडियो रिकॉर्डिंग सहित कई डिजिटल प्रक्रियाओं का प्रावधान है। नई राज्य स्तरीय व्यवस्था इन प्रक्रियाओं में इलेक्ट्रॉनिक माध्यमों के उपयोग को और व्यापक आधार देती है।
निष्पक्ष जांच और पारदर्शिता पर जोर
सरकार ने इन नियमों के पीछे आपराधिक जांच की निष्पक्षता और विश्वसनीयता बढ़ाने का उद्देश्य रखा है। वैज्ञानिक तरीके से साक्ष्य जुटाने, तकनीक के उपयोग को प्रोत्साहित करने और साक्ष्य आधारित न्याय व्यवस्था को मजबूत करने पर जोर दिया गया है। डिजिटल रिकॉर्डिंग और इलेक्ट्रॉनिक संचार के इस्तेमाल से जांच की प्रक्रियाओं का रिकॉर्ड सुरक्षित रखने में मदद मिल सकती है। इससे जरूरत पड़ने पर संबंधित जानकारी और रिकॉर्ड का परीक्षण करना भी आसान हो सकता है। इसके साथ ही निष्पक्ष और तेज सुनवाई, आपराधिक प्रक्रिया में पारदर्शिता तथा जवाबदेही बढ़ाना भी इन नियमों के प्रमुख उद्देश्यों में शामिल है। सरकार को समय-समय पर अन्य निर्धारित उद्देश्यों के लिए भी इलेक्ट्रॉनिक माध्यमों के इस्तेमाल की अनुमति देने का अधिकार रहेगा।
न्याय व्यवस्था के आधुनिकीकरण की दिशा में कदम
छत्तीसगढ़ में इन नए नियमों के लागू होने से पुलिस जांच और न्यायिक प्रक्रिया में तकनीक के इस्तेमाल को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। इससे नागरिकों को भी विभिन्न कानूनी प्रक्रियाओं में सुविधा मिल सकती है। हालांकि, नई व्यवस्था का वास्तविक प्रभाव इसके प्रभावी क्रियान्वयन, तकनीकी सुविधाओं और पुलिसकर्मियों के प्रशिक्षण पर निर्भर करेगा। आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि डिजिटल माध्यमों के इस्तेमाल से जांच की गुणवत्ता, पारदर्शिता और न्यायिक प्रक्रिया की गति में कितना सुधार आता है।
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