PM मोदी पर टिप्पणी के करने वाले कांग्रेस नेता बृजमोहन सिंह को मिली जमानत

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Update: 2025-09-05 17:37 GMT
Durg. दुर्ग। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ सोशल मीडिया पर अभद्र टिप्पणी करने के आरोप में जेल में बंद कांग्रेस नेता बृजमोहन सिंह को आखिरकार राहत मिल गई है। दुर्ग जिले की अदालत ने उनकी नियमित जमानत याचिका स्वीकार करते हुए उन्हें शर्तों के साथ रिहा करने का आदेश दिया है। यह मामला लंबे समय से राजनीतिक और कानूनी हलकों में चर्चा का विषय बना हुआ था।
मामला कैसे शुरू हुआ?
भिलाई के वैशाली नगर थाने में दर्ज एफआईआर क्रमांक 156/2025 के आधार पर बृजमोहन सिंह को गिरफ्तार किया गया था। उन पर आरोप था कि उन्होंने अपने फेसबुक अकाउंट से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ आपत्तिजनक और अभद्र पोस्ट साझा की थी। पुलिस ने इसे भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSC) 2023 की धारा 483 के तहत अपराध मानते हुए गिरफ्तार किया। अभियोजन पक्ष का कहना था कि यह पोस्ट न केवल प्रधानमंत्री जैसे संवैधानिक पद पर आसीन व्यक्ति के खिलाफ अभद्र टिप्पणी थी, बल्कि इससे सार्वजनिक शांति और सद्भाव भी प्रभावित हो सकता था।
कोर्ट में दलीलें
इस मामले में आरोपपत्र पहले ही दाखिल किया जा चुका है। सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष ने दलील दी कि –
मामला पूरी तरह राजनीतिक रूप से प्रेरित है।
बृजमोहन सिंह लंबे समय से जेल में बंद हैं।
ट्रायल की प्रक्रिया में समय लग सकता है।
आरोपी का कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है।
वहीं अभियोजन पक्ष ने जमानत का विरोध करते हुए कहा कि आरोपी की रिहाई से सामाजिक शांति भंग हो सकती है और वह पुनः विवादित बयानबाजी कर सकते हैं।
कोर्ट का फैसला
अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद कहा कि आरोपपत्र दाखिल किया जा चुका है और ट्रायल शुरू होने में समय लग सकता है। ऐसे में आरोपी को लंबे समय तक जेल में रखना उचित नहीं होगा। कोर्ट ने बृजमोहन सिंह को कुछ शर्तों के साथ जमानत पर रिहा करने का आदेश दिया।
जमानत की शर्तों में यह साफ कहा गया है कि –
बृजमोहन सिंह को हर सुनवाई में कोर्ट में उपस्थित होना होगा।
वह सोशल मीडिया पर किसी भी प्रकार की आपत्तिजनक टिप्पणी या पोस्ट साझा नहीं करेंगे।
वह गवाहों को प्रभावित करने की कोशिश नहीं करेंगे।
राजनीतिक हलकों में हलचल
बृजमोहन सिंह की गिरफ्तारी से लेकर जमानत तक का यह पूरा मामला राजनीतिक रूप से बेहद संवेदनशील रहा। कांग्रेस नेताओं का आरोप है कि यह कार्रवाई राजनीतिक दबाव में की गई थी और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर हमला है। वहीं, भाजपा नेताओं का कहना है कि प्रधानमंत्री के खिलाफ अभद्र और अशोभनीय भाषा का इस्तेमाल किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं है और कानून अपना काम कर रहा है।
सोशल मीडिया पर बहस
यह मामला सोशल मीडिया पर भी सुर्खियों में रहा। कांग्रेस समर्थक इसे राजनीतिक प्रतिशोध करार दे रहे हैं, वहीं भाजपा समर्थक कह रहे हैं कि लोकतंत्र में अभिव्यक्ति की आज़ादी का मतलब अभद्रता की छूट नहीं है। कांग्रेस नेता को मिली जमानत ने पार्टी कार्यकर्ताओं में राहत की सांस जरूर दी है, लेकिन राजनीतिक और कानूनी लड़ाई अभी खत्म नहीं हुई है। कोर्ट में मुकदमा जारी रहेगा और दोष सिद्ध होने पर बृजमोहन सिंह को कड़ी सजा भी हो सकती है।
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