कांग्रेस ने किया मंच में वरिष्ठ आदिवासी नेता का अपमान
पूर्व कैबिनेट मंत्री अमरजीत भगत वरिष्ठ आदिवासी नेता के हाथ से विजय जांगिड़ ने छीना माइक
Bilaspur. बिलासपुर। बिलासपुर के मुंगेली मैदान में कांग्रेस द्वारा आयोजित ‘वोट चोर’ vote chor प्रदर्शन कार्यक्रम में आज अफरातफरी और विवाद की स्थिति बन गई। कार्यक्रम में वरिष्ठ आदिवासी नेता अमरजीत भगत का सार्वजनिक रूप से अपमान किए जाने का मामला सामने आया है। कांग्रेस के राष्ट्रीय सचिव विजय जांगिड़ द्वारा मंच पर भाषण के दौरान अमरजीत भगत का माइक छीन लिया गया, जिससे राजनीति गलियारों में हड़कंप मच गया है। बताया जा रहा है कि इस घटना के पीछे का कारण यह था कि सचिन पायलट भाषण देने के लिए मंच पर आने वाले थे और वे तेज़ी से माइक की ओर बढ़ रहे थे। इससे पहले प्रदेश कांग्रेस के महामंत्री सुबोध हरितवाल ने सम्मानजनक तरीके से अमरजीत भगत की ओर बढ़कर भाषण जल्द समाप्त करने का इशारा किया था, लेकिन मंच पर स्थिति नियंत्रण से बाहर हो गई। माइक छीनने की घटना के बाद कई छोटे कार्यकर्ताओं में तनाव बढ़ गया। कार्यक्रम समाप्त होने के तुरंत बाद छोटे नेताओं में आपसी झड़प और मारपीट वीडियो भी सामने आया है। ये पहली मर्तबा नहीं है कि कांर्गेस पार्टी में आदिवासी नेताओं का अपमान और तिरस्कार होता रहा है। झुमुक लाल भेड़िया, अरविन्द नेताम, छबिलाल नेताम, शिव नेताम, भवर सिंह पोर्ते जैसे वरिष्ठ आदिवासी नेताओं का भी घोर अपमान कर कांग्रेस पार्टी से बाहर का रास्ता दिखाया या घर बिठाया। जबकि प्रदेश में आदिवासी बहुल क्षेत्र में कांग्रेस पार्टी आदिवासियों का हितैषी बताने के लिए झूठा राग अलापते रहती है इसी गुटबाजी के चक्कर में मध्यप्रदेश से लेकर छत्तीसगढ़ निर्माण तक कांग्रेस दोगली नीति को अपने मतदाताओं के साथ खेलती रही। इस तरीके का आरोप कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता ने अपना नाम नहीं छापने के शर्त में बताया है। उक्त वरिष्ठ आदिवासी नेता बिलासपुर से संबंध रखते है। जनता से रिश्ता ने सच्चाई जानने के लिए लगातार विजय जांगिड़ राष्ट्रीय सचिव को फोन से संपर्क करने का प्रयास किया लेकिन उन्होंने फोन कॉल का जवाब नहीं दिया।
कांग्रेस के ‘वोट चोर’ vote chor प्रदर्शन कार्यक्रम के बाद हुई मारपीट
प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि मंच पर मौजूद वरिष्ठ नेताओं के बीच भी असहजता देखी गई। कार्यक्रम के बाद लौटते समय कई कार्यकर्ताओं के बीच बहस इतनी बढ़ गई कि हाथापाई की नौबत आ गई। पुलिस के अनुसार, यह विवाद मामूली कहासुनी से शुरू हुआ, लेकिन जल्द ही हिंसक रूप ले लिया। इसी बीच, सिविल लाइन थाना क्षेत्र के मुंगेली नाका स्थित ग्राउंड में भी मंगलवार को कांग्रेस कार्यक्रम के बाद अलग घटना सामने आई, जिसमें कुछ युवकों के बीच गाड़ी ओवरटेकिंग को लेकर विवाद हुआ और हाथापाई में बदल गया। पुलिस ने बताया कि घटना में कुछ युवकों ने नुकीली वस्तु से दूसरे पक्ष को घायल कर दिया। घायलों का इलाज कराया गया है। मौके पर पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए छह युवकों को हिरासत में लिया।
आरोपियों की पहचान शेख ताहिर, मोहम्मद हसन, राजीव राज बघेल, प्रतीक लाल बघेल, आकाश मिश्रा और प्रांजल मसीह के रूप में की गई है। पुलिस ने बताया कि आरोपियों के आपराधिक रिकॉर्ड की जांच कराई जा रही है। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक रजनेश सिंह ने निर्देश दिया है कि यदि आरोपियों का पूर्व आपराधिक इतिहास पाया जाता है तो उन पर संगठित अपराध की धाराओं में कार्रवाई की जाएगी और गुंडा फाइल खोली जाएगी। इस घटना ने सार्वजनिक कार्यक्रमों के दौरान सुरक्षा और अनुशासन की आवश्यकता को उजागर कर दिया है। प्रशासन ने लोगों से शांति बनाए रखने की अपील की है और विवाद से दूर रहने की सलाह दी है।
कुल मिलाकर बिलासपुर का यह कार्यक्रम राजनीति और अनुशासन के बीच संतुलन की चुनौती बन गया है। एक ओर मंच पर वरिष्ठ नेता अमरजीत भगत का अपमान और माइक छीनने की घटना ने कांग्रेस के भीतर असंतोष को जन्म दिया, वहीं दूसरी ओर कार्यक्रम समाप्ति के बाद छोटे नेताओं में हुई मारपीट ने कानून-व्यवस्था को चुनौती दी। प्रशासन ने दोनों मामलों की जांच शुरू कर दी है और सख्त कार्रवाई का आश्वासन दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि सार्वजनिक कार्यक्रमों में व्यवस्था बनाए रखने के लिए पहले से योजना बनानी जरूरी है, ताकि विवाद जैसी घटनाओं से बचा जा सके और राजनीतिक संगठन की छवि बनी रहे। कांग्रेस नेतृत्व के सामने अब यह चुनौती है कि वह अपने कार्यकर्ताओं में अनुशासन कायम रखते हुए समन्वय स्थापित करे।