कॉलेज में गड़बड़ी का मामला: प्रिंसिपल और चार असिस्टेंट प्रोफेसर निलंबित

छग

Update: 2025-12-29 15:10 GMT
Raipur. रायपुर। छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले के शासकीय महाविद्यालय लोहारकोट में जेम पोर्टल से सामग्री क्रय और पीएम उषा मद के उपयोग में गड़बड़ी मिलने पर राज्य सरकार ने सख्त कार्रवाई की है। कॉलेज के प्राचार्य डॉ. एस.एस. तिवारी को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। इसके अलावा चार असिस्टेंट प्रोफेसरों को भी आर्थिक अनियमितता और नियमों के उल्लंघन के आरोप में निलंबित किया गया है। सरकारी आदेश के अनुसार, प्राचार्य डॉ. एस.एस. तिवारी द्वारा पीएम उषा मद से आबंटित राशि का उपयोग और जेम पोर्टल के माध्यम से सामग्री खरीद में आर्थिक अनियमितता पाई गई है।

जांच में यह भी पाया गया कि प्राचार्य ने छत्तीसगढ़ भंडार क्रय नियम 2002 (संशोधित 2025) का पालन नहीं किया और यह कृत्य छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (आचरण) नियम 1965 के नियम 3 के विपरीत है। राज्य शासन ने डॉ. एस.एस. तिवारी को छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण तथा अपील) नियम, 1966 के नियम 9 (1) (क) के तहत तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। इसके साथ ही आदेश में यह भी स्पष्ट किया गया कि निलंबन अवधि के दौरान उनके मुख्यालय के रूप में क्षेत्रीय अपर संचालक, कार्यालय रायपुर निर्धारित किया गया है।

निलंबित चार असिस्टेंट प्रोफेसर का नाम और पद निम्नलिखित हैं:
डॉ. सीमा अग्रवाल, सहायक प्राध्यापक, शासकीय महाविद्यालय, पिथौरा
डॉ. बृहस्पतु सिंह विशाल, सहायक प्राध्यापक, शासकीय महाविद्यालय, पिथौरा
श्री पीठी सिंह ठाकुर, सहायक प्राध्यापक, शासकीय महाविद्यालय, पिथौरा
डॉ. एस.एस. दीवान, सहायक प्राध्यापक, शासकीय महाविद्यालय, पिथौरा

इन सभी असिस्टेंट प्रोफेसरों को भी निलंबन अवधि के दौरान मुख्यालय के रूप में क्षेत्रीय अपर संचालक, कार्यालय रायपुर, छत्तीसगढ़ में तैनात किया गया है। सरकारी आदेश में स्पष्ट किया गया है कि यह कार्रवाई जेम पोर्टल से की गई खरीद में वित्तीय अनियमितताओं और पीएम उषा मद का दुरुपयोग पाये जाने के बाद की गई है। यह कदम यह संदेश देने के लिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है कि सरकारी संसाधनों के प्रयोग में पारदर्शिता और नियमों का पालन अनिवार्य है। राज्य सरकार की यह कार्रवाई अन्य शासकीय महाविद्यालयों और शिक्षा संस्थानों में वित्तीय अनुशासन बनाए रखने और कर्मचारियों में जवाबदेही सुनिश्चित करने के दृष्टिकोण से अहम है। यह कदम प्रशासनिक और शैक्षणिक स्तर पर नियमों के पालन को सुनिश्चित करने में सहायक साबित होगा।

महासमुंद जिले में यह मामला चर्चा का विषय बना हुआ है। शिक्षा विभाग और जिला प्रशासन ने यह सुनिश्चित किया है कि निलंबन अवधि में कॉलेज के संचालन और शैक्षणिक गतिविधियों में कोई बाधा न आए। विभागीय अधिकारी इस बात पर भी निगरानी रखेंगे कि निलंबित अधिकारियों और कर्मचारियों की जिम्मेदारी के दौरान कॉलेज में किसी प्रकार का अनियमित कार्य न हो। सरकार की यह सख्त कार्रवाई यह संदेश देती है कि वित्तीय अनियमितताओं और सरकारी नियमों के उल्लंघन के मामलों में न तो उच्च पदों पर बैठे अधिकारियों को बख्शा जाएगा और न ही किसी अन्य कर्मी को। इस फैसले से शासन और प्रशासन में पारदर्शिता और जवाबदेही को मजबूत करने का उद्देश्य स्पष्ट होता है।
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