DMF बेसलाइन सर्वे पर कलेक्टर की बैठक

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Update: 2026-03-06 18:02 GMT
Balrampur. बलरामपुर। बलरामपुर जिले में खनन प्रभावित क्षेत्रों के समग्र विकास के लिए जिला खनिज संस्थान न्यास (डीएमएफ) के अंतर्गत आयोजित बेसलाइन सर्वे को लेकर आज जिला पंचायत सभाकक्ष में विशेष कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस कार्यशाला की अध्यक्षता डीएमएफ के अध्यक्ष एवं जिले के कलेक्टर राजेंद्र कटारा ने की। बैठक में जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी (सीईओ) नयनतारा सिंह तोमर, अपर कलेक्टर आर.एन. पाण्डेय सहित जिले के विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

कलेक्टर राजेंद्र कटारा ने कार्यशाला में कहा कि खनन प्रभावित क्षेत्रों के विकास के लिए बेसलाइन सर्वे अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस सर्वे के आधार पर अगले पांच वर्षों के लिए प्रभावी कार्ययोजना तैयार की जाएगी, जिससे अधिक से अधिक लोगों को लाभ पहुंच सके। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि सर्वे में ग्रामीणों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की जाए और सभी हितग्राहियों की जानकारी संकलित कर योजना में शामिल की जाए, ताकि वास्तविक जरूरतमंदों तक योजनाओं का लाभ पहुंच सके। उन्होंने बताया कि जिले की 82 प्रत्यक्ष और 138 अप्रत्यक्ष ग्राम पंचायतों, कुल 220 ग्राम पंचायतों में यह सर्वे किया जाएगा। कलेक्टर ने सभी विभागों को आपसी समन्वय और कन्वर्जेंस के माध्यम से योजनाओं के बेहतर क्रियान्वयन का निर्देश भी दिया।

उन्होंने कहा कि प्रत्येक विभाग को अपनी गतिविधियों और योजनाओं के कार्यान्वयन में सुनिश्चित योगदान देना होगा, जिससे कार्ययोजना प्रभावी रूप से लागू हो सके। जिला पंचायत सीईओ नयनतारा सिंह तोमर ने बताया कि बेसलाइन सर्वे शासन के दिशा-निर्देशों के अनुरूप किया जाएगा। ग्राम पंचायतों में इस सर्वे के साथ पंचवर्षीय परिप्रेक्ष्य योजना और वार्षिक योजना भी तैयार की जाएगी। इन योजनाओं में स्वास्थ्य, शिक्षा, महिला एवं बाल कल्याण, पेयजल, पर्यावरण संरक्षण, कौशल विकास और आजीविका सृजन जैसे उच्च प्राथमिकता वाले क्षेत्रों के साथ अन्य क्षेत्रीय विकास कार्यक्रमों को भी शामिल किया जाएगा। उन्होंने यह भी बताया कि प्रभावित ग्रामों में 9 मार्च तक सभी सर्वेक्षण दलों का गठन कर लिया जाएगा, जिससे सर्वे समय पर प्रारंभ हो सके और निर्धारित समय-सीमा के भीतर पूर्ण किया जा सके।

अपर कलेक्टर आर.एन. पाण्डेय ने बताया कि बेसलाइन सर्वे के लिए जिला एवं विकासखंड स्तरीय समितियों का गठन किया गया है, और प्रत्येक दल को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं। कार्यशाला में जिला स्तरीय मास्टर ट्रेनर ने पीपीटी प्रस्तुति के माध्यम से सर्वे की प्रक्रिया की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने कहा कि सर्वे में क्षेत्र की पहचान कर डेटा संग्रहण किया जाएगा और उसके आधार पर गेप विश्लेषण कर पंचवर्षीय एवं वार्षिक योजनाओं का निर्माण किया जाएगा। डीएमएफ नियमों के अनुसार, न्यास निधि का न्यूनतम 70 प्रतिशत उच्च प्राथमिकता वाले क्षेत्रों में खर्च किया जाएगा। इनमें पेयजल, स्वास्थ्य, शिक्षा, महिला एवं बाल कल्याण, पर्यावरण संरक्षण, कौशल विकास और आजीविका सृजन शामिल हैं। शेष 30 प्रतिशत राशि अन्य प्राथमिकता वाले क्षेत्रों जैसे अधोसंरचना, सिंचाई, ऊर्जा और वाटरशेड विकास में उपयोग की जाएगी।

कलेक्टर राजेंद्र कटारा ने कहा कि यह सर्वे केवल आंकड़ों का संग्रह नहीं है, बल्कि यह खनन प्रभावित क्षेत्रों में विकास और सामाजिक न्याय सुनिश्चित करने का महत्वपूर्ण माध्यम है। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि सभी गतिविधियां पारदर्शी और समयबद्ध तरीके से पूरी हों और ग्रामीणों के लिए योजनाओं का अधिकतम लाभ सुनिश्चित किया जाए। इस बैठक में यह भी निर्णय लिया गया कि सर्वे के परिणामों के आधार पर प्रत्येक पंचायत और विभाग के लिए कार्ययोजना तैयार की जाएगी, जिससे जिला स्तर पर समग्र विकास सुनिश्चित हो सके और खनन प्रभावित क्षेत्रों में जीवन स्तर में सुधार हो। इस प्रकार बलरामपुर जिले में डीएमएफ बेसलाइन सर्वे के तहत सामुदायिक भागीदारी के साथ प्रभावी योजना तैयार करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है, जिससे खनन प्रभावित क्षेत्र के समग्र विकास की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाए जा रहे हैं।
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