Surajpur. सूरजपुर। छत्तीसगढ़ के सूरजपुर जिले में स्वास्थ्य व्यवस्था की कथित लापरवाही का गंभीर मामला सामने आया है। यहां प्रसव पीड़ा से परेशान एक गर्भवती महिला को रात में परिजन गणेशपुर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र लेकर पहुंचे, लेकिन अस्पताल के गेट पर ताला लगा मिला। परिजनों का आरोप है कि अस्पताल में कोई डॉक्टर या स्वास्थ्य कर्मचारी मौजूद नहीं था। समय पर चिकित्सा सहायता नहीं मिलने के कारण महिला का अस्पताल के गेट के सामने ही प्रसव हो गया। जन्म के कुछ देर बाद नवजात की मौत हो गई। घटना के बाद ग्रामीणों का गुस्सा फूट पड़ा और उन्होंने अस्पताल के बाहर प्रदर्शन कर जिम्मेदारों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। मामले में स्वास्थ्य विभाग ने प्रभारी चिकित्सक राजेश पटेल और एएनएम प्रमिला गिरी को निलंबित कर दिया है।
रात 11:30 बजे अस्पताल पहुंची थी गर्भवती महिला
जानकारी के मुताबिक, सूरजपुर जिले की ग्राम पंचायत पवनपुरी के तलवापारा निवासी अनिर कुमार सारथी 14 अक्टूबर की रात करीब 11:30 बजे अपनी गर्भवती पत्नी को प्रसव के लिए गणेशपुर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र लेकर पहुंचे थे। परिजनों के अनुसार, अस्पताल पहुंचने के कुछ देर बाद महिला की प्रसव पीड़ा तेज हो गई। लेकिन उस समय अस्पताल के मुख्य गेट पर ताला लगा हुआ था। परिजनों ने आरोप लगाया कि स्वास्थ्य केंद्र में कोई डॉक्टर या कर्मचारी उपलब्ध नहीं था। इसके कारण गर्भवती महिला को तत्काल चिकित्सा सहायता नहीं मिल सकी।
अस्पताल के गेट के सामने हुआ प्रसव
अस्पताल बंद होने के कारण परिजन परेशान हो गए। इसी दौरान महिला की प्रसव पीड़ा लगातार बढ़ती गई और उसने अस्पताल के गेट के सामने ही बच्चे को जन्म दिया। लेकिन जन्म के कुछ देर बाद नवजात की मौत हो गई। इस घटना से परिजन सदमे में आ गए। परिजनों का आरोप है कि यदि अस्पताल में समय पर स्वास्थ्य सुविधाएं और कर्मचारी उपलब्ध होते, तो महिला को तत्काल चिकित्सा सहायता मिल सकती थी। हालांकि, नवजात की मौत के वास्तविक कारणों का स्पष्ट होना जांच पर निर्भर करेगा।
महिला को रामानुजनगर अस्पताल ले जाया गया
प्रसव के बाद महिला की हालत को देखते हुए परिजन उसे रामानुजनगर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र लेकर पहुंचे, जहां उसका उपचार किया गया। वहीं नवजात की मौत की जानकारी सामने आने के बाद गांव में नाराजगी फैल गई। ग्रामीणों ने स्वास्थ्य केंद्र में रात के समय आपातकालीन सेवाओं की उपलब्धता पर सवाल उठाए।
ग्रामीणों ने अस्पताल में जड़ा ताला, किया प्रदर्शन
15 अक्टूबर को नाराज परिजन और ग्रामीण गणेशपुर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के बाहर एकत्रित हुए और विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया। प्रदर्शनकारियों ने अस्पताल के गेट पर ताला लगाकर स्वास्थ्य व्यवस्था के खिलाफ नाराजगी जाहिर की। ग्रामीणों ने जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों पर कार्रवाई की मांग की। लोगों का कहना था कि सरकारी अस्पतालों में यदि रात के समय प्रसव जैसी आपातकालीन स्थिति में भी उपचार उपलब्ध नहीं होगा, तो ग्रामीण क्षेत्रों के मरीज कहां जाएंगे।
कांग्रेस नेता ने सरकार की स्वास्थ्य व्यवस्था पर उठाए सवाल
घटना को लेकर कांग्रेस नेता सुनील अग्रवाल ने भी स्वास्थ्य सुविधाओं की स्थिति पर नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार स्वास्थ्य सुविधाओं को लेकर बड़े-बड़े दावे करती है, लेकिन ग्रामीण इलाकों में अब भी स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति चिंताजनक है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि प्रशासन ने समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए, तो कांग्रेस को आंदोलन करने के लिए मजबूर होना पड़ेगा।
प्रभारी चिकित्सक और ANM निलंबित
मामला सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग ने कार्रवाई करते हुए गणेशपुर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के प्रभारी चिकित्सक राजेश पटेल और एएनएम प्रमिला गिरी को निलंबित कर दिया। इस कार्रवाई के बाद स्वास्थ्य विभाग ने मामले की जांच और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए आवश्यक कदम उठाने की बात कही है। सीएमएचओ प्रशांत कुमार सिंह ने बताया कि विभाग का प्रयास रहेगा कि भविष्य में किसी भी स्वास्थ्य केंद्र में इस तरह की लापरवाही दोबारा सामने न आए। इसके लिए स्वास्थ्य कर्मचारियों को आवश्यक निर्देश दिए जाएंगे।
कार्रवाई के आश्वासन पर समाप्त हुआ प्रदर्शन
स्वास्थ्य विभाग की कार्रवाई और जांच के आश्वासन के बाद ग्रामीणों ने प्रदर्शन समाप्त कर दिया। हालांकि, अस्पताल के गेट पर प्रसव और नवजात की मौत की इस घटना ने ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुविधाओं, रात्रिकालीन चिकित्सा सेवाओं और सुरक्षित प्रसव व्यवस्था की उपलब्धता को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।