स्कूलों में बच्चों के जोखिम भरे स्टंट पर बाल आयोग सख्त, कलेक्टर-डीईओ को पत्र

छग

Update: 2026-02-12 18:22 GMT
Raipur. रायपुर। प्रदेश के स्कूलों में बच्चों द्वारा किए जा रहे जोखिम भरे स्टंट और धारदार हथियारों के प्रदर्शन के वायरल वीडियो पर छत्तीसगढ़ राज्य बाल आयोग ने सख्त रुख अपनाया है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर हाल के दिनों में ऐसे कई वीडियो सामने आए हैं, जिनमें स्कूली छात्र विभिन्न आयोजनों के दौरान खतरनाक करतब करते या हथियार लहराते दिखाई दे रहे हैं। इन घटनाओं को गंभीरता से लेते हुए बाल आयोग ने स्वतः संज्ञान लिया है और लोक शिक्षण संचालक के साथ-साथ प्रदेश के सभी कलेक्टरों तथा जिला शिक्षा अधिकारियों (डीईओ) को पत्र जारी किया है।
बाल आयोग की अध्यक्ष डॉ. वर्णिका शर्मा ने मीडिया से बातचीत में स्पष्ट किया कि शालाओं में आयोजित होने वाले विदाई समारोह, सांस्कृतिक कार्यक्रमों या अन्य आयोजनों के दौरान बच्चों द्वारा किए जाने वाले जोखिम भरे स्टंट पर प्रतिबंध लगाने की अनुशंसा की गई है। उन्होंने कहा कि बच्चों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और किसी भी परिस्थिति में उनकी जान को खतरे में डालने वाली गतिविधियों की अनुमति नहीं दी जा सकती।
डॉ. शर्मा के अनुसार, आयोग को लगातार ऐसी सूचनाएं और वीडियो प्राप्त हो रहे थे, जिनमें छात्र खतरनाक करतब करते नजर आ रहे हैं। कई मामलों में धारदार वस्तुओं या हथियारों का उपयोग भी देखा गया है, जो न केवल बच्चों बल्कि अन्य विद्यार्थियों और शिक्षकों की सुरक्षा के लिए भी गंभीर खतरा उत्पन्न करता है। इसी के मद्देनज़र आयोग ने प्रशासनिक स्तर पर आवश्यक कदम उठाने के निर्देश दिए हैं।
आयोग ने अपने पत्र में स्पष्ट किया है कि स्कूल परिसर में होने वाले प्रत्येक आयोजन की जानकारी स्कूल प्रबंधन को पूर्व से होनी चाहिए। साथ ही ऐसे कार्यक्रमों के दौरान कम से कम एक शिक्षक या जिम्मेदार स्टाफ सदस्य की अनिवार्य उपस्थिति सुनिश्चित की जाए। आयोग ने यह भी रेखांकित किया है कि बच्चों की सुरक्षा की पूरी जिम्मेदारी शाला प्रबंधन की होगी और किसी भी प्रकार की लापरवाही पर जवाबदेही तय की जाएगी।
बाल आयोग अध्यक्ष ने कहा कि यदि भविष्य में इस प्रकार की कोई घटना सामने आती है, तो संबंधित स्कूल प्रबंधन से तत्काल कारण पूछा जाएगा और आवश्यकतानुसार कार्रवाई की अनुशंसा की जाएगी। उन्होंने अभिभावकों से भी अपील की कि वे अपने बच्चों को सोशल मीडिया पर लोकप्रियता पाने के लिए खतरनाक गतिविधियों में शामिल होने से रोकें और सुरक्षा के प्रति जागरूक करें। शिक्षा विभाग और जिला प्रशासन से अपेक्षा की गई है कि वे इस संबंध में स्कूलों को स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी करें तथा नियमित निगरानी रखें। आयोग का मानना है कि समय रहते कड़े कदम उठाकर ऐसी घटनाओं पर प्रभावी रोक लगाई जा सकती है और बच्चों के लिए सुरक्षित शैक्षणिक वातावरण सुनिश्चित किया जा सकता है।
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