मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने लगातार नौ घंटे तक ली कलेक्टरों की बैठक

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Update: 2025-10-13 17:43 GMT
Raipur. रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की अध्यक्षता में आज मंत्रालय (महानदी भवन) में आयोजित कलेक्टर–डीएफओ संयुक्त कॉन्फ्रेंस में प्रदेश के वन प्रबंधन, तेंदूपत्ता संग्राहकों के हित, लघु वनोपजों के मूल्य संवर्द्धन, ईको-टूरिज्म, औषधीय पौधों की खेती और वनों से जुड़ी आजीविका के विविध आयामों पर विस्तृत चर्चा हुई। मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि तेंदूपत्ता संग्राहक हितग्राहियों की संख्या अब 12 लाख से अधिक हो चुकी है, जो राज्य सरकार की सामूहिक प्रयासों की सफलता का प्रमाण है। उन्होंने अधिकारियों और जिला
कलेक्टरों
को बधाई दी और कहा कि अब प्राथमिकता वन उपज का अधिकतम वैल्यू एडिशन करना है। इसके लिए उन्होंने राज्य में वन धन केंद्रों की संख्या बढ़ाने पर बल दिया, ताकि ग्रामीणों को अधिक आय के अवसर मिलें और वे आत्मनिर्भरता की दिशा में बढ़ सकें।


कलेक्टर–डीएफओ कॉन्फ्रेंस में मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रदेश में अब वन आवरण 46 प्रतिशत तक पहुंच चुका है, जो पिछले साल की तुलना में लगभग दो प्रतिशत अधिक है। उन्होंने कहा कि इस उपलब्धि में कैम्पा योजना और “एक पेड़ मां के नाम” जैसी अभिनव पहल का योगदान महत्वपूर्ण रहा है। उन्होंने सभी जिला अधिकारियों को निर्देश दिए कि तेंदूपत्ता संग्राहकों का भुगतान सात से पंद्रह दिनों के भीतर सुनिश्चित किया जाए और इसके विवरण एसएमएस के माध्यम से सीधे संग्राहकों के मोबाइल पर भेजे जाएं। बैठक में यह भी
बताया
गया कि लगभग 15 लाख 60 हजार संग्राहकों की जानकारी ऑनलाइन दर्ज हो चुकी है और सभी भुगतान सीधे बैंक खातों में किए जा रहे हैं। मुख्यमंत्री ने तेंदूपत्ता संग्रहण प्रक्रिया के पूर्ण कंप्यूटरीकरण को और तेज करने के निर्देश दिए।
बैठक में औषधीय पौधों की खेती के विस्तार के लिए प्रचार-प्रसार गतिविधियों को बढ़ाने पर चर्चा हुई और कृषि एवं उद्यानिकी विभाग के मैदानी अमले की सहायता लेने का सुझाव दिया गया। धमतरी, मुंगेली और गौरेला-पेंड्रा-मरवाही (जीपीएम) जिलों में औषधीय पौधों की खेती के विषय में डीएफओ को विस्तृत जानकारी दी गई। औषधीय पौधों की खेती से न केवल लोगों की आजीविका बढ़ेगी, बल्कि पारंपरिक उपचार पद्धतियों का ज्ञान भी आगे बढ़ेगा। औषधीय पादप बोर्ड के सीईओ ने इस क्षेत्र में आय सृजन और संभावनाओं के बारे में जानकारी दी।
कॉन्फ्रेंस में बीजापुर, सुकमा और नारायणपुर जिलों में पिछले तेंदूपत्ता संग्रहण सीजन की समीक्षा की गई। आगामी सीजन के लिए पूर्व-कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए गए, ताकि संग्राहकों को समय पर लाभ मिले और किसी भी प्रकार की देरी न हो। मुख्यमंत्री ने लघु वनोपजों को वनांचल क्षेत्रों में आजीविका के प्रमुख साधन के रूप में विकसित करने पर जोर दिया। बैठक में लघु वनोपज आधारित स्टार्टअप्स को बढ़ावा देने और वन धन केंद्रों को सुदृढ़ करने पर सार्थक चर्चा हुई। इसके माध्यम से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई दिशा दी जा सकेगी। बैठक में छत्तीसगढ़ हर्बल और संजीवनी ब्रांड के उत्पादों के प्रचार-प्रसार पर विशेष बल दिया गया। अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि इन उत्पादों की बिक्री ग्रामीण और शहरी बाजारों में बढ़ाई जाए ताकि स्थानीय उत्पादों के लिए मजबूत मार्केट नेटवर्क विकसित हो। साथ ही उत्पादों के जैविक प्रमाणीकरण (Organic Certification) की प्रक्रिया को शीघ्र पूरा करने पर जोर दिया गया।
वन मंत्री श्री केदार कश्यप ने कहा कि यदि सभी कलेक्टर और वन अधिकारी समन्वय स्थापित कर संयुक्त रूप से कार्य करें तो अत्यंत अच्छे परिणाम सामने आएंगे। उन्होंने बस्तर और सरगुजा संभागों में ईको-टूरिज्म को बढ़ावा देने और इसे आजीविका से जोड़ने के लिए ठोस रणनीति बनाने की आवश्यकता बताई। वन मंत्री ने बताया कि राज्य सरकार अब 75 प्रकार की लघु वनोपजों की खरीदी करने जा रही है। उन्होंने कहा कि लाख उत्पादन में छत्तीसगढ़ देश में दूसरे स्थान पर है, और यदि लक्षित रूप से कार्य किया जाए तो प्रदेश प्रथम स्थान प्राप्त कर सकता है।
मुख्यमंत्री ने कलेक्टरों और वन अधिकारियों को निर्देश दिए कि तेंदूपत्ता संग्राहकों को समय पर भुगतान सुनिश्चित करने के साथ-साथ भुगतान की जानकारी पारदर्शी तरीके से साझा की जाए। इसके अलावा, औषधीय पौधों की खेती और लघु वनोपज आधारित स्टार्टअप्स के माध्यम से ग्रामीणों की आय बढ़ाने की दिशा में ठोस पहल करने को कहा गया। बैठक में सभी संभागायुक्त, जिला कलेक्टर और वन मंडलाधिकारी उपस्थित थे। चर्चा के दौरान यह सुनिश्चित किया गया कि वन प्रबंधन और ग्रामीण आजीविका के लिए उठाए गए कदम प्रभावी और दीर्घकालिक परिणाम देंगे। मुख्यमंत्री ने कॉन्फ्रेंस को नौ घंटे तक चलने वाली सफल बैठक बताया और सभी अधिकारियों से अपेक्षा जताई कि निर्णयों को शीघ्र और प्रभावी ढंग से लागू किया जाए। इस प्रकार, मुख्यमंत्री और वन मंत्री के नेतृत्व में आयोजित कलेक्टर–डीएफओ कॉन्फ्रेंस ने प्रदेश के वन प्रबंधन, तेंदूपत्ता संग्राहक हित, लघु वनोपज आधारित आजीविका, ईको-टूरिज्म और औषधीय पौधों की खेती के सभी महत्वपूर्ण पहलुओं पर ठोस और व्यावहारिक निर्णय लिए।
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