छत्तीसगढ़ शराब घोटाला: FL 10 लाइसेंसधारी नेक्सजेन डायरेक्टरों को हाईकोर्ट से जमानत
छग
Raipur. रायपुर। छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित शराब घोटाला मामले में हाईकोर्ट ने FL 10 लाइसेंसधारी नेक्सजेन कंपनी के डायरेक्टरों अभिषेक सिंह और मनीष मिश्रा को जमानत प्रदान की है। जस्टिस अरविंद वर्मा की कोर्ट ने दोनों आरोपियों को जमानत देते हुए कहा कि मामले की कानूनी प्रक्रिया के तहत उन्हें न्याय मिलेगा। अभिषेक सिंह आबकारी विभाग के पूर्व ओएसडी अरविंद सिंह के भतीजे हैं, जबकि मनीष मिश्रा चार्टर्ड अकाउंटेंट संजय मिश्रा के भाई हैं। बचाव पक्ष की तरफ से सीनियर अधिवक्ता शशांक मिश्रा और गगन तिवारी ने पैरवी की। बताया गया है कि संजय मिश्रा को पहले ही जमानत मिल चुकी है। मामले में गिरफ्तार तीनों आरोपियों में संजय और मनीष नेक्सजेन पॉवर कंपनी के डायरेक्टर हैं, जो FL 10 लाइसेंस लेकर प्रदेश में महंगी ब्रांडेड अंग्रेजी शराब की सप्लाई करते थे।
शराब घोटाले का पूरा मामला
छत्तीसगढ़ में कांग्रेस सरकार के शासनकाल 2019 से 2023 तक शराब नीति में बड़े बदलाव किए गए। इस दौरान कई चहेते सप्लायर्स को लाभ पहुंचाने के लिए लाइसेंस की शर्तें इस तरह से रखी गईं कि केवल चुनिंदा कंपनियों को काम मिल सके। इन कंपनियों ने नकली होलोग्राम और सील बनवाई, जिसे नोएडा की एक कंपनी ने तैयार किया। इसके बाद नकली होलोग्राम वाली शराब की महंगी बोतलों को सरकारी दुकानों के माध्यम से बिक्री के लिए भेजा गया। चूंकि होलोग्राम नकली था, बिक्री की वास्तविक जानकारी शासन तक नहीं पहुंची और बिना एक्साइज टैक्स दिए शराब की बिक्री होती रही। इस तरह सरकार को अनुमानित 2165 करोड़ रुपए का नुकसान हुआ। सूत्रों का कहना है कि यह रकम कांग्रेस भवन निर्माण से लेकर नेताओं, अधिकारियों और मंत्रियों तक वितरित की गई।
अब तक गिरफ्तारी और कानूनी कार्रवाई
शराब घोटाला मामले में अब तक पूर्व आबकारी मंत्री कवासी लखमा, पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के बेटे चैतन्य बघेल, पूर्व आईएएस अनिल टुटेजा, एजाज ढेबर के भाई अनवर ढेबर को गिरफ्तार किया जा चुका है। इसके अलावा आबकारी विभाग के 28 अधिकारी भी आरोपी बनाए गए थे, जिन्हें सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिल चुकी है। ईओडब्ल्यू ने तीनों आरोपियों को 20 जुलाई 2025 को गिरफ्तार किया था। मामले की जांच में सामने आया कि संजय और मनीष नेक्सजेन पॉवर कंपनी के माध्यम से महंगी शराब की सप्लाई करते हुए नकली होलोग्राम का इस्तेमाल कर टैक्स चोरी की थी। वहीं अभिषेक सिंह भी इस घोटाले में सहयोगी के रूप में शामिल था।
न्यायिक प्रक्रिया और आगे की स्थिति
हाईकोर्ट की जमानत से अब तीनों आरोपियों की गिरफ्तारी पर अस्थायी राहत मिली है, लेकिन उनका मामला अभी भी अदालत में लंबित है। बचाव पक्ष ने कोर्ट में तर्क दिया कि आरोपियों को जेल में रखना न्यायसंगत नहीं है, और हाईकोर्ट ने उन्हें जमानत प्रदान कर मामले की कानूनी प्रक्रिया के दौरान स्वतंत्र जांच सुनिश्चित करने के आदेश दिए। छत्तीसगढ़ की जनता और मीडिया लगातार इस मामले पर नजर बनाए हुए हैं, क्योंकि यह घोटाला राज्य की शराब नीति और शासन की पारदर्शिता पर सवाल उठाता है। इस मामले की जांच ईओडब्ल्यू कर रहा है और कई अधिकारियों, नेताओं और डायरेक्टरों के दस्तावेज़ और बैंक ट्रांजेक्शन की जांच की जा रही है।
जमानत मिलने के बाद अब अभिषेक सिंह और मनीष मिश्रा अपने निजी निवास पर रहेंगे, जबकि अदालत से आने वाले आदेशों का पालन करेंगे। हाईकोर्ट ने यह स्पष्ट किया कि जमानत का अर्थ आरोपों की पुष्टि नहीं है, बल्कि कानूनी प्रक्रिया पूरी होने तक आरोपियों को सुरक्षित रखने का निर्णय लिया गया है। इस मामले में आबकारी विभाग और संबंधित अधिकारियों की भूमिका पर भी नजरें टिकी हुई हैं। शराब घोटाले ने राज्य की शराब नीति की कमजोरियों को उजागर किया है और अब इस मामले में आने वाले कोर्ट आदेश और ईओडब्ल्यू की जांच पर पूरा ध्यान केंद्रित किया गया है।