CGPSC घोटाला: 5 आरोपी गिरफ्तार, 2 दिन की मिली CBI रिमांड

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Update: 2025-09-19 13:59 GMT
Raipur. रायपुर। छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग (CGPSC) घोटाले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने शुक्रवार को एक और बड़ी कार्रवाई की है। एजेंसी ने रायपुर में छापेमारी कर 5 आरोपियों को गिरफ्तार किया, जिन्हें विशेष सीबीआई अदालत में पेश किया गया। कोर्ट ने सभी आरोपियों को फिलहाल 2 दिन की रिमांड पर भेज दिया है। हालांकि, सीबीआई की ओर से 14 दिन की रिमांड की मांग की गई थी। सुनवाई अभी भी जारी है और माना जा रहा है कि जांच एजेंसी आगे और सख्त कार्रवाई कर सकती है।
गिरफ्तार आरोपी
गिरफ्तार किए गए आरोपियों में PSC की पूर्व परीक्षा नियंत्रक आरती वासनिक, PSC के पूर्व सचिव और रिटायर्ड IAS जीवनलाल ध्रुव, उनके बेटे सुमित ध्रुव, निशा कोसले और दीपा आदिल शामिल हैं। इनमें आरती वासनिक पर सवाल सबसे गंभीर हैं। उन पर प्रश्नपत्र लीक कराने का आरोप है। सूत्रों के मुताबिक, CBI ने पहले भी आरती वासनिक से पूछताछ की थी, लेकिन सबूतों की कमी के चलते उन्हें छोड़ दिया गया था। अब हाल में जुटाए गए नए दस्तावेज और डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर गिरफ्तारी की गई है।
अब तक 12 गिरफ्तारियां
इस मामले में गिरफ्तारियों का सिलसिला लगातार जारी है। अब तक कुल 12 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। 18 नवंबर को CBI ने तत्कालीन अध्यक्ष टामन सिंह सोनवानी और बजरंग पावर एंड इस्पात के निदेशक श्रवण कुमार गोयल को गिरफ्तार किया था। इसके बाद 10 जनवरी को 5 और आरोपियों को हिरासत में लिया गया। इनमें नितेश सोनवानी (तत्कालीन अध्यक्ष का भतीजा व डिप्टी कलेक्टर चयनित), ललित गणवीर (तत्कालीन डिप्टी परीक्षा नियंत्रक, PSC), शशांक गोयल, भूमिका कटियार (दोनों डिप्टी कलेक्टर चयनित) और साहिल सोनवानी (डीएसपी चयनित) शामिल थे। ये सभी आरोपी वर्तमान में जेल में बंद हैं।
भर्ती प्रक्रियाओं पर गंभीर सवाल
यह पूरा मामला 2020 से 2022 के बीच हुई भर्ती प्रक्रियाओं से जुड़ा है। आरोप है कि PSC की लिखित परीक्षा और इंटरव्यू में पारदर्शिता से समझौता किया गया। योग्य अभ्यर्थियों को दरकिनार कर राजनीतिक और प्रशासनिक रसूख रखने वाले परिवारों के उम्मीदवारों को उच्च पदों पर चयनित किया गया। डिप्टी कलेक्टर, डीएसपी और अन्य राजपत्रित पदों की भर्ती में भारी गड़बड़ी के आरोप लगे। कई चयनित उम्मीदवारों के रिश्तेदार या नजदीकी लोग उस समय सत्ता और प्रशासन में प्रभावशाली पदों पर थे। यही कारण है कि भर्ती प्रक्रिया पर सवाल खड़े हुए और मामला विवादों में आ गया।
CBI की अब तक की कार्रवाई
CBI ने छापेमारी के दौरान आयोग के दफ्तरों, संबंधित अफसरों और चयनित अभ्यर्थियों के ठिकानों से कई महत्वपूर्ण दस्तावेज, डिजिटल रिकॉर्ड और आपत्तिजनक साक्ष्य जब्त किए हैं। इन साक्ष्यों से साफ हुआ है कि प्रश्नपत्र लीक करवा कर और इंटरव्यू में अंक बढ़ाकर मनमाने ढंग से उम्मीदवारों का चयन किया गया।
योग्य अभ्यर्थियों के साथ अन्याय
PSC घोटाले से प्रभावित उम्मीदवारों ने कई बार आवाज उठाई थी। उनका आरोप है कि परीक्षा में मेहनत करने और अच्छे अंक लाने के बावजूद उन्हें चयन सूची से बाहर कर दिया गया, जबकि राजनीतिक-सामाजिक प्रभाव वाले परिवारों के उम्मीदवारों को बड़े पदों पर बैठा दिया गया।
सरकार की सख्ती और आगे की कार्रवाई
राज्य सरकार ने मामले की गंभीरता को देखते हुए इसकी जांच CBI को सौंपी थी। अब एजेंसी की ओर से लगातार गिरफ्तारी और सबूतों के आधार पर केस मजबूत किया जा रहा है। माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में और नाम सामने आ सकते हैं और कई और गिरफ्तारी हो सकती है। PSC घोटाले ने न सिर्फ छत्तीसगढ़ की प्रशासनिक भर्ती प्रणाली पर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि उन हजारों युवा अभ्यर्थियों के सपनों को भी झकझोर दिया है, जिन्होंने वर्षों तक तैयारी के बाद परीक्षा दी थी।
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