CG: रिश्वत मांगने वाला कांस्टेबल निलंबित

छग

Update: 2026-01-06 14:28 GMT
Janjgir-Champa. जांजगीर-चांपा। छत्तीसगढ़ के जांजगीर-चांपा जिले में पुलिस विभाग की छवि को धूमिल करने वाले एक गंभीर मामले में पुलिस अधीक्षक ने त्वरित और सख्त कार्रवाई करते हुए रिश्वतखोर कांस्टेबल को निलंबित कर दिया है। थाना बिर्रा से संबंधित एक प्रकरण में महिला अधिवक्ता से जमानत के बदले रिश्वत मांगने का आरोप सिद्ध होने पर आरक्षक रंजीत कुमार अनंत को तत्काल प्रभाव से सस्पेंड कर दिया गया है। मामला 2 जनवरी 2026 का बताया जा रहा है। शिकायतकर्ता महिला अधिवक्ता के अनुसार, वह
न्यायिक मजिस्ट्रेट
प्रथम श्रेणी चांपा की अदालत में थाना बिर्रा अपराध क्रमांक 173/2025 के आरोपी हनुमान निषाद की जमानत के लिए पैरवी करने पहुंची थीं। इस दौरान उन्होंने अदालत परिसर में मौजूद आरक्षक रंजीत कुमार अनंत से अभियोग पत्र प्रस्तुत होने की स्थिति के बारे में जानकारी ली।

महिला अधिवक्ता ने अपनी शिकायत में बताया कि आरक्षक ने जमानत प्रक्रिया को लेकर पहले जमानतदार की आवश्यकता बताई, फिर यह कहकर भरोसा दिलाया कि बिना जमानतदार के भी वह “जुगाड़” से जमानत करवा देगा। इसके बाद जमानत और वाहन सुपुर्दनामा की प्रक्रिया पूरी हो गई। शिकायत के अनुसार, जमानत हो जाने के बाद चांपा कोर्ट परिसर के सामने आरक्षक रंजीत कुमार अनंत ने महिला अधिवक्ता से कहा कि उनका काम हो गया है और अब “नए साल का खर्चा-पानी” देना होगा। जब अधिवक्ता ने खर्चा-पानी देने का कारण पूछा तो आरक्षक ने कम से कम 3 हजार रुपये देने की मांग की। विरोध करने पर आरक्षक ने अभद्र व्यवहार करते हुए दबाव बनाया और तत्काल एक हजार रुपये देने को कहा।

महिला अधिवक्ता ने बताया कि उनके पास नगद पैसे नहीं थे, जिस पर आरक्षक ने फोन-पे के माध्यम से राशि भेजने के लिए कहा और एक मोबाइल नंबर उपलब्ध कराया। शाम का समय और अंधेरा होने के कारण घर जाने की मजबूरी में महिला अधिवक्ता ने बताए गए नंबर पर अपने फोन-पे खाते से एक हजार रुपये ट्रांसफर कर दिए। घटना से आहत महिला अधिवक्ता ने पूरे मामले की लिखित शिकायत पुलिस अधीक्षक जांजगीर-चांपा से की। शिकायत मिलते ही एसपी ने मामले को गंभीरता से लेते हुए प्राथमिक जांच कराई। प्रथम दृष्टया आरोप सही पाए जाने पर आरोपी आरक्षक रंजीत कुमार अनंत को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया।

पुलिस अधीक्षक ने स्पष्ट किया है कि पुलिस विभाग में भ्रष्टाचार और अनुशासनहीनता को किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि आम नागरिकों, विशेषकर न्यायिक प्रक्रिया से जुड़े लोगों से रिश्वत मांगना अत्यंत गंभीर कृत्य है और ऐसे मामलों में कठोर कार्रवाई की जाएगी। इस घटना के बाद अधिवक्ता संघ और आमजन में भी चर्चा का विषय बना हुआ है। अधिवक्ताओं ने महिला वकील के साहस की सराहना करते हुए कहा कि इस तरह की शिकायतें सामने आने से ही व्यवस्था में सुधार संभव है। वहीं पुलिस विभाग की त्वरित कार्रवाई को भी सकारात्मक कदम माना जा रहा है। फिलहाल निलंबित आरक्षक के खिलाफ विभागीय जांच की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। जांच पूरी होने के बाद आगे की कठोर कार्रवाई भी की जा सकती है। यह मामला एक बार फिर यह संदेश देता है कि रिश्वतखोरी के खिलाफ आवाज उठाने पर कार्रवाई संभव है और दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा।
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