CG BREAKING: नान घोटाले में आरोपी ब्यूटी पार्लर संचालिका की याचिका खारिज

छग

Update: 2025-06-30 14:34 GMT
Bilaspur. बिलासपुर। छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित नागरिक आपूर्ति निगम (नान) घोटाले से जुड़ी एक अहम सुनवाई में बिलासपुर हाईकोर्ट ने एक बड़ा फैसला सुनाया है। कोर्ट ने इस मामले में आरोपी पूर्व मैनेजर शिवशंकर भट्ट की महिला मित्र और ब्यूटी पार्लर संचालिका मधुरिमा शुक्ला की आपराधिक पुनरीक्षण याचिका (रिवीजन पिटीशन) को खारिज कर दिया है। हाईकोर्ट ने यह माना कि मधुरिमा ने भट्ट की अवैध कमाई को निवेश करने में षड्यंत्रपूर्वक भूमिका निभाई है।

क्या है पूरा मामला?
नागरिक आपूर्ति निगम में हुए भ्रष्टाचार की जांच के दौरान एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) और ईओडब्ल्यू द्वारा कई वरिष्ठ अधिकारियों के खिलाफ एक्शन लिया गया। इस दौरान नान के पूर्व मैनेजर शिवशंकर भट्ट के ठिकानों पर भी छापे मारे गए, जिनमें भारी मात्रा में 3.89 करोड़ रुपये की अवैध संपत्ति का खुलासा हुआ। जांच के दौरान यह भी सामने आया कि भट्ट की महिला मित्र मधुरिमा शुक्ला, जो रायपुर में एक ब्यूटी पार्लर चलाती है, ने उसकी अवैध कमाई को अपने व्यापार और अन्य निवेशों में खपाया। यही वजह रही कि
ACB
ने मधुरिमा को भी इस घोटाले में सह-आरोपी बनाया और उसके पास से 1.60 करोड़ रुपये की संपत्ति जब्त की।

वैध आय मात्र 24 लाख, संपत्ति 1.60 करोड़
एसीबी की जांच के अनुसार, मधुरिमा की कुल वैध आय मात्र 24.74 लाख रुपये है, जबकि उसके पास पाई गई संपत्ति 1.60 करोड़ की है। यह अंतर इस बात की ओर स्पष्ट संकेत करता है कि उसने शिवशंकर भट्ट की काली कमाई को छिपाने और इस्तेमाल करने में प्रत्यक्ष भूमिका निभाई।

आरोप तय, कोर्ट में दी गई चुनौती
विशेष अदालत द्वारा भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 13(1)(ई), 13(2) और आईपीसी की धारा 120-बी (षड्यंत्र) के तहत आरोप तय किए गए। इस फैसले को चुनौती देते हुए मधुरिमा शुक्ला ने हाईकोर्ट में आपराधिक पुनरीक्षण याचिका दायर की थी। उसने कहा कि उसे जानबूझकर मामले में फंसाया गया है और आरोप निराधार हैं।

हाईकोर्ट ने खारिज की दलीलें
मधुरिमा की याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने एसीबी से दस्तावेज मंगवाए और गहराई से जांच की। कोर्ट ने पाया कि उसके पास जो संपत्ति पाई गई, वह उसकी घोषित और वैध आय से कई गुना अधिक थी। कोर्ट ने माना कि यह मामला सामान्य लेन-देन या संयोग नहीं बल्कि नियोजित आर्थिक अपराध है, जिसमें आरोपी ने नान घोटाले के मुख्य आरोपी की अवैध संपत्ति को छुपाने और बचाने में सक्रिय भूमिका निभाई। इसी आधार पर हाईकोर्ट ने याचिका को सिरे से खारिज कर दिया।
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