Kanker. कांकेर। छत्तीसगढ़ के बस्तर अंचल में नक्सली गतिविधियां एक बार फिर तेज हो गई हैं। कांकेर जिले में नक्सलियों ने पुलिस मुखबिरी के शक में एक ग्रामीण की बेरहमी से हत्या कर दी। मृतक की पहचान मनेश नरेटी के रूप में हुई है। नक्सलियों ने घटना स्थल पर बैनर लगाकर हत्या की जिम्मेदारी ली है। साथ ही बिनागुंडा सरपंच समेत कई अन्य ग्रामीणों को खुलेआम धमकी भी दी है। इस घटना के बाद इलाके में दहशत का माहौल फैल गया है।
स्थानीय सूत्रों के अनुसार, नक्सलियों ने ग्रामीण मनेश नरेटी को मुखबिरी का आरोप लगाते हुए मौत के घाट उतार दिया। नक्सलियों द्वारा लगाए गए बैनर में चेतावनी दी गई है कि पुलिस को सहयोग करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा। यह घटना ऐसे समय में हुई है जब इलाके में सुरक्षा बलों का दबाव लगातार बढ़ रहा है। गौरतलब है कि साल 2024 में इसी क्षेत्र में बड़ी संख्या में नक्सली मारे गए थे। पुलिस और सुरक्षा बलों के संयुक्त ऑपरेशन में अब तक 29 नक्सलियों को ढेर किया जा चुका है। इसके बाद भी नक्सली ग्रामीणों में डर और आतंक कायम रखने के लिए इस तरह की वारदातों को अंजाम देते रहते हैं।
कोण्डागांव में 4 नक्सली सरेंडर
इधर पड़ोसी जिले कोण्डागांव में नक्सल मोर्चे पर सुरक्षा बलों को बड़ी सफलता मिली है। यहां 4 सक्रिय नक्सलियों ने आत्मसमर्पण कर मुख्यधारा में लौटने का फैसला किया। इन पर कुल 22 लाख रुपए का इनाम घोषित था। जानकारी के अनुसार, सरेंडर करने वालों में एक नक्सली ऐसा भी है जो संगठन का डॉक्टर था और घायल नक्सलियों का इलाज करता था। सभी ने जिले के पुलिस अधीक्षक (SP) के सामने हथियार डालकर आत्मसमर्पण किया। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि लगातार चल रहे सुरक्षा अभियान और पुनर्वास नीति का असर है कि नक्सली संगठन से मोहभंग होकर आत्मसमर्पण कर रहे हैं। सरेंडर करने वालों को सरकार की ओर से पुनर्वास योजना का लाभ दिया जाएगा, ताकि वे समाज की मुख्यधारा में लौट सकें।
बीजापुर में भी हुई थी नृशंस हत्या
इससे पहले 20 जुलाई को बीजापुर जिले के तर्रेम थाना क्षेत्र के छुटवाई और बड़ा तर्रेम गांवों में नक्सलियों ने दो ग्रामीणों की धारदार हथियारों से हत्या कर दी थी। मृतकों की पहचान कवासी जोगा (55) और मंगलू कुरसम (50) के रूप में हुई थी। घटना रविवार और सोमवार की दरम्यानी रात को अंजाम दी गई थी। बीजापुर एएसपी चंद्रकांत गवर्णा ने उस घटना की पुष्टि की थी। आंकड़ों के मुताबिक, इस साल अब तक बस्तर क्षेत्र के सात जिलों में नक्सली हिंसा में लगभग 28 लोगों की जान जा चुकी है। सिर्फ बीजापुर जिले में ही पिछले दो महीनों में 10 से अधिक ग्रामीण नक्सलियों द्वारा मारे जा चुके हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि दबाव में आ चुके नक्सली संगठन अपनी उपस्थिति जताने और ग्रामीणों के बीच डर बनाए रखने के लिए ऐसी हत्याएं कर रहे हैं।