CG: कोर्ट परिसर में हंगामा और पुलिस से धक्का-मुक्की करने वाला आरोपी गिरफ्तार
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Bilaspur. बिलासपुर। न्यायालय परिसर में पुलिस बल के साथ धक्का-मुक्की करने, शासकीय कार्य में बाधा पहुंचाने और हंगामा करने के मामले में बिलासपुर पुलिस ने बड़ी कार्रवाई की है। पुलिस ने मामले के मुख्य आरोपी अमृतदास डहरिया को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया, जहां से उसे न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया गया है। पुलिस का कहना है कि न्यायालयीन प्रक्रिया और शासकीय कार्य में बाधा डालने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई जारी रहेगी। मामला बिलासपुर के न्यायालय परिसर से जुड़ा हुआ है। जानकारी के अनुसार, 15 नवंबर 2025 को थाना तखतपुर में अनुसूचित जाति एवं जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम के तहत एक अपराध दर्ज किया गया था। इस मामले में आरोपियों को न्यायिक रिमांड के लिए विशेष न्यायालय (एट्रोसिटी), बिलासपुर के समक्ष प्रस्तुत किया गया था।
इसी दौरान अमृत डहरिया और उसके कुछ साथियों ने न्यायालय परिसर में पहुंचकर आरोपी के पक्ष में हंगामा शुरू कर दिया। आरोप है कि सभी लोग एकराय होकर न्यायालय परिसर में दबाव बनाने का प्रयास कर रहे थे। इस दौरान पुलिस बल के साथ धक्का-मुक्की की गई और शासकीय एवं न्यायालयीन कार्य में बाधा उत्पन्न करने की कोशिश की गई। पुलिस के अनुसार, आरोपियों ने ड्यूटी पर तैनात पुलिस कर्मचारियों के साथ अभद्र व्यवहार किया। इसके अलावा गाली-गलौज करते हुए आरोपी को बाहर निकालने के लिए दबाव बनाया गया। पुलिसकर्मियों को गंभीर परिणाम भुगतने और जान से मारने की धमकी देने का आरोप भी लगाया गया है।
घटना के बाद पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए कार्रवाई शुरू की। लिखित शिकायत के आधार पर थाना सिविल लाइन, बिलासपुर में आरोपियों के खिलाफ प्रथम दृष्टया अपराध दर्ज किया गया। मामले में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं के तहत अपराध पंजीबद्ध किया गया है। पुलिस ने आरोपी अमृतदास डहरिया पिता तारणदास डहरिया उम्र 28 वर्ष, निवासी ग्राम बेलसरी, थाना तखतपुर, जिला बिलासपुर को गिरफ्तार किया है। आरोपी को 18 जुलाई 2026 को थाना सिविल लाइन पुलिस ने गिरफ्तार कर न्यायालय के समक्ष पेश किया, जहां से उसे न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया गया।
पुलिस द्वारा दर्ज मामले में भारतीय न्याय संहिता की धारा 191(2), 221, 132, 296 और 351(2) के तहत कार्रवाई की जा रही है। पुलिस अब इस मामले में शामिल अन्य आरोपियों की भूमिका की भी जांच कर रही है। जांच के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि न्यायालय परिसर जैसी संवेदनशील जगह पर किसी भी तरह का हंगामा, कानून व्यवस्था बिगाड़ने का प्रयास या पुलिस के कार्य में बाधा डालना गंभीर अपराध है। न्यायालय की सुरक्षा और शासकीय कार्यों को सुचारू रूप से संचालित करना पुलिस की जिम्मेदारी है।
बिलासपुर पुलिस ने स्पष्ट किया है कि कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए ऐसे मामलों में किसी भी तरह की लापरवाही नहीं बरती जाएगी। शासकीय कार्य में बाधा डालने, न्यायालयीन प्रक्रिया प्रभावित करने या पुलिस कर्मियों के साथ दुर्व्यवहार करने वाले व्यक्तियों के खिलाफ नियमानुसार कड़ी कार्रवाई की जाएगी। इस कार्रवाई के बाद पुलिस ने आम नागरिकों से भी अपील की है कि न्यायालय और सरकारी संस्थानों की गरिमा बनाए रखें। किसी भी मामले में कानून अपने हाथ में लेने या दबाव बनाने की कोशिश करने वालों के खिलाफ सख्त कदम उठाए जाएंगे।