गलत रिपोर्ट पर 14 वर्षीय नाबालिग को गर्भवती बताकर थाने में रातभर रखे जाने का मामला

टीआई और महिला हवलदार निलंबित

Update: 2026-05-31 17:33 GMT
Rajnandgaon. राजनांदगांव। छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव जिले के सोमनी थाना क्षेत्र में एक 14 वर्षीय नाबालिग लड़की को गलत जांच रिपोर्ट के आधार पर गर्भवती बताकर थाने में रातभर रोकने और कथित रूप से प्रताड़ित करने का गंभीर मामला सामने आया है। इस घटना के बाद थाना प्रभारी (टीआई) और एक महिला हवलदार को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। मामला सामने आने के बाद पूरे क्षेत्र में आक्रोश का माहौल है। जानकारी के अनुसार
, सोमनी क्षेत्र की यह नाबालिग बच्ची कुछ दिनों से बीमार थी, जिसे इलाज के लिए स्थानीय सोमनी अस्पताल ले जाया गया था। वहां स्थानीय स्तर पर उपलब्ध एक जांच किट से परीक्षण किया गया, जिसमें उसे गर्भवती बताया गया। इसी रिपोर्ट के आधार पर पुलिस ने कार्रवाई करते हुए नाबालिग को थाने ले जाकर पूछताछ शुरू की।

परिजनों का आरोप है कि पुलिस ने बच्ची को रातभर थाने में रोककर उससे लगातार पूछताछ की और उसे मानसिक रूप से परेशान किया गया। आरोप यह भी है कि इस दौरान उसे भोजन नहीं दिया गया और एक महिला पुलिसकर्मी द्वारा उसके साथ मारपीट की गई, यहां तक कि उसके साथ शारीरिक दुर्व्यवहार भी किया गया। परिजनों के अनुसार पुलिस लगातार नाबालिग पर यह दबाव बनाती रही कि वह किसी व्यक्ति का नाम बताए। अगली सुबह जब बच्ची की सोनोग्राफी कराई गई, तो रिपोर्ट पूरी तरह नेगेटिव आई, जिससे यह स्पष्ट हो गया कि प्रारंभिक जांच रिपोर्ट गलत थी। इस खुलासे के बाद पूरे मामले ने तूल पकड़ लिया और गांव में लोगों में आक्रोश फैल गया। पीड़ित बच्ची और उसका परिवार मानसिक रूप से सदमे में है।

मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस अधीक्षक अंकिता शर्मा ने तत्काल कार्रवाई करते हुए सोमनी थाना प्रभारी (टीआई) अमन नामदेव और महिला हवलदार राजश्री सिंह को निलंबित कर दिया है। साथ ही पूरे मामले की विस्तृत जांच के आदेश जारी किए गए हैं। इस प्रकरण की जांच की जिम्मेदारी डीएसपी केपी मरकाम को सौंपी गई है, जिन्हें 7 दिनों के भीतर जांच रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं। पुलिस विभाग इस बात की भी जांच कर रहा है कि प्रारंभिक जांच में इस्तेमाल की गई किट की विश्वसनीयता और गुणवत्ता कैसी थी। इसी बीच, स्वास्थ्य विभाग ने भी इस मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच शुरू कर दी है। बताया जा रहा है कि यह किट जीवन दीप समिति के माध्यम से स्थानीय स्तर पर ब्लॉक मेडिकल ऑफिसर द्वारा खरीदी गई थी। अब इस किट की गुणवत्ता और परीक्षण प्रक्रिया पर सवाल उठ रहे हैं।

मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. नेतराम नवरत्न ने किट की जांच के आदेश दिए हैं। ड्रग विभाग के माध्यम से किट के सैंपल को फॉरेंसिक लैब भेजा जा रहा है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि गलत रिपोर्ट कैसे आई और क्या किट में कोई तकनीकी या गुणवत्ता संबंधी खामी थी। उधर, पीड़ित परिवार ने आरोप लगाया है कि पुलिस कार्रवाई के कारण बच्ची मानसिक रूप से बेहद परेशान हो गई है। परिजनों और ग्रामीणों ने बैठक कर यह निर्णय लिया है कि जब तक दोषी पुलिसकर्मियों के खिलाफ FIR दर्ज नहीं की जाती, तब तक उनका विरोध जारी रहेगा। इस मामले में छत्तीसगढ़ बाल संरक्षण आयोग ने भी संज्ञान लिया है और जांच शुरू कर दी है। आयोग की टीम जल्द ही राजनांदगांव पहुंचकर सोमनी थाना और पीड़ित परिवार से मुलाकात कर सकती है। साथ ही पुलिस विभाग से पूरे घटनाक्रम की विस्तृत रिपोर्ट भी मांगी गई है। यह मामला अब प्रशासनिक और मानवाधिकार दोनों स्तरों पर गंभीर बन गया है, और इसकी जांच के परिणामों पर पूरे जिले की नजर टिकी हुई है।
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