BREAKING: स्कूल से सस्पेंड हुए छात्र ने लगाई फांसी, परिजन सदमें में

जांच में जुटी पुलिस

Update: 2025-10-14 15:47 GMT
Niwari. निवाड़ी। निवाड़ी जिले के पृथ्वीपुर क्षेत्र में एक दुखद घटना सामने आई है, जहां सेंट अल्फोंसा हाई स्कूल के 10वीं क्लास के छात्र साहिल यादव ने स्कूल से सस्पेंड किए जाने के बाद खुदकुशी कर ली। साहिल को स्कूल में पटाखा जलाने की घटना के चलते 15 दिन के लिए निलंबित किया गया था, जिसके कारण वह मानसिक रूप से परेशान और उदास रहने लगा। साहिल के पिता रामकुमार यादव ने बताया कि साहिल ने शनिवार को अपने साथियों के साथ स्कूल में पटाखा जलाया था। इसके बाद सोमवार को स्कूल प्रबंधन ने उन्हें बुलाया। रामकुमार ने बताया कि उन्होंने स्कूल से बेटे को माफ करने की गुहार लगाई, क्योंकि साहिल अपनी गलती मान चुका था, लेकिन स्कूल प्रबंधन ने उनकी बात नहीं मानी और 15 दिन के लिए साहिल को सस्पेंड कर दिया।
खुदकुशी की घटना
रामकुमार यादव ने बताया कि स्कूल से सस्पेंड किए जाने के बाद साहिल गुमसुम और उदास रहने लगा। सोमवार शाम वह भैंस चराने के बहाने घर से बाहर निकला, लेकिन शाम 5 बजे तक वापस नहीं लौटा। घरवालों ने तलाश शुरू की, और रात करीब 9 बजे गांव के बाहर एक पेड़ से लटका हुआ साहिल का शव मिला। घटना की जानकारी मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची। पुलिस ने शव को पेड़ से उतरवाकर पंचनामा बनाया और पोस्टमॉर्टम के लिए भेजा। साहिल के पिता रामकुमार ने बताया कि साहिल केजी क्लास से ही सेंट अल्फोंसा हाई स्कूल में पढ़ाई कर रहा था। घर में साहिल के अलावा एक छोटा भाई भी है, जिसकी उम्र 12 साल है। परिवार ने स्कूल प्रबंधन के रवैये पर नाराजगी जताई है।
स्कूल प्रबंधन की प्रतिक्रिया और मौन
साहिल के पिता और परिवार ने स्कूल के फादर से संपर्क करने की कोशिश की, लेकिन उनका मोबाइल स्विच ऑफ मिला। स्कूल मैनेजमेंट के किसी भी सदस्य ने भी बातचीत करने से इन्कार किया। परिवार ने स्कूल प्रबंधन के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। इस घटना ने शिक्षा संस्थानों में विद्यार्थियों के मानसिक स्वास्थ्य और सजा देने के तरीकों पर गंभीर सवाल खड़ा कर दिए हैं। स्थानीय लोग भी स्कूल प्रबंधन की कार्रवाई को अनुचित मानते हुए सख्त कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।
सामाजिक और मानसिक पहलू
शिक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि छात्र मानसिक रूप से अस्थिर और संवेदनशील होते हैं। छोटे-छोटे मुद्दों, जैसे पटाखा जलाने जैसी हरकत पर अत्यधिक सजा देना, छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य पर गंभीर प्रभाव डाल सकता है। साहिल की खुदकुशी ने यह दर्शाया कि सजा और विद्यार्थियों की भावनात्मक स्थिति में संतुलन बनाए रखना कितना महत्वपूर्ण है। स्कूलों में काउंसलिंग और मार्गदर्शन की व्यवस्था होनी चाहिए ताकि छात्रों को भावनात्मक आघात से न जूझना पड़े।
परिवार की प्रतिक्रिया
रामकुमार यादव ने बताया कि साहिल के उदासी और मानसिक तनाव को समझने में स्कूल ने सहयोग नहीं किया। परिवार का कहना है कि यदि स्कूल प्रबंधन साहिल को समझदारी और मार्गदर्शन के साथ संभालता, तो शायद यह दुखद घटना टाली जा सकती थी। साहिल के पिता ने कहा कि उनका बेटा सदा से स्कूल का जिम्मेदार और परिश्रमी छात्र रहा। उन्होंने स्कूल से अपेक्षा की कि ऐसी घटनाओं में सकारात्मक और सहानुभूतिपूर्ण रवैया अपनाया जाए। घटना के बाद स्थानीय लोग और ग्रामीण स्कूल प्रबंधन की कठोर कार्रवाई और मानसिक दबाव पर नाराज हैं। लोगों ने चेतावनी दी है कि इस मामले में संवेदनशील जांच और उचित कदम उठाए जाएं।
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