Raipur. रायपुर। छत्तीसगढ़ में E-PoS मशीनों की व्यवस्था को लेकर राजनीतिक विवाद शुरू हो गया है। भाजपा ने पूर्ववर्ती भूपेश बघेल सरकार के कार्यकाल में राशन दुकानों के लिए खरीदी गई E-PoS मशीनों को लेकर सवाल उठाए हैं। भाजपा ने आरोप लगाया है कि मशीनों की व्यवस्था में करीब 140 करोड़ रुपए का फर्जीवाड़ा हुआ है। भाजपा की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि राशन दुकानों में पारदर्शिता लाने के उद्देश्य से E-PoS मशीनों की व्यवस्था की गई थी। पार्टी ने आरोप लगाया कि जिन मशीनों को लगभग 35 करोड़ रुपए की लागत में खरीदा जा सकता था, उन्हें करीब 140 करोड़ रुपए में किराए पर लेने का निर्णय लिया गया।
भाजपा ने इस मामले को लेकर पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल से जवाब मांगा है। पार्टी ने सवाल उठाया कि यदि मशीनों की अनुमानित खरीद लागत कम थी तो उन्हें इतनी अधिक राशि में किराए पर लेने का फैसला क्यों किया गया। भाजपा का आरोप है कि इस प्रक्रिया से सरकारी धन का नुकसान हुआ। भाजपा ने अपने बयान में कहा कि गरीबों को मिलने वाले राशन वितरण में पारदर्शिता लाने के नाम पर की गई व्यवस्था में वित्तीय अनियमितताओं की जांच होनी चाहिए। पार्टी ने आरोप लगाया कि इस पूरे मामले में जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए।
भाजपा ने सोशल मीडिया पोस्ट के माध्यम से पूर्ववर्ती सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि E-PoS मशीनों की व्यवस्था को लेकर सामने आए तथ्यों पर जवाब देना चाहिए। पार्टी ने दावा किया कि खरीद और किराए के बीच बड़ा अंतर होने से कई सवाल खड़े हो रहे हैं। हालांकि, भाजपा के आरोपों पर पूर्ववर्ती सरकार या कांग्रेस की ओर से प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। आरोपों की वास्तविकता और प्रक्रिया में किसी तरह की अनियमितता हुई या नहीं, यह जांच और संबंधित दस्तावेजों के आधार पर ही स्पष्ट हो सकेगा।
E-PoS मशीनों का उपयोग राशन दुकानों में हितग्राहियों की पहचान, वितरण प्रक्रिया को डिजिटल बनाने और रिकॉर्ड को व्यवस्थित रखने के लिए किया जाता है। ऐसी मशीनों के संचालन, खरीद या किराए की व्यवस्था में सरकार द्वारा तय नियम और प्रक्रिया लागू होती है। राज्य में राशन व्यवस्था और उससे जुड़ी योजनाओं को लेकर समय-समय पर राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप सामने आते रहे हैं। इस बार भाजपा ने E-PoS मशीनों की व्यवस्था को लेकर पूर्ववर्ती सरकार पर सवाल उठाए हैं। भाजपा का कहना है कि इस मामले की जांच कराई जानी चाहिए और यदि किसी स्तर पर अनियमितता सामने आती है तो जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई होनी चाहिए। वहीं, इस मामले में आगे की स्थिति संबंधित जांच और आधिकारिक प्रतिक्रिया के बाद ही स्पष्ट होगी।