BIG BREAKING: कोल घोटाले में अब CBI की एंट्री, 570 करोड़ के घोटाले की जांच का नया अध्याय शुरू

छग

Update: 2025-07-13 16:42 GMT
Raipur. रायपुर। छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित कोल घोटाले की जांच में अब केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) की आधिकारिक एंट्री हो गई है। प्रवर्तन निदेशालय (ED) और आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो (EOW)-एसीबी के बाद अब इस घोटाले की जांच सीबीआई के हवाले कर दी गई है। राज्य सरकार ने दिल्ली विशेष पुलिस स्थापना अधिनियम की धारा 6 के तहत विधिवत रूप से सीबीआई को जांच की अनुमति दी है। सूत्रों के मुताबिक, यह कदम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की भ्रष्टाचार के खिलाफ ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति के तहत उठाया गया है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व वाली सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि चाहे आरोपी कितना भी रसूखदार क्यों न हो, अब उसे कानून का सामना करना पड़ेगा।
क्या है कोल लेवी घोटाला?
प्रवर्तन निदेशालय (ED) की जांच में यह सामने आया कि राज्य के खनिज विभाग के कुछ अधिकारियों ने राजनीतिक संरक्षण में ऑनलाइन परमिट सिस्टम को ऑफलाइन कर दिया, और कोयला ट्रांसपोर्ट करने वालों से प्रति टन ₹25 की अवैध वसूली की। यह वसूली जुलाई 2020 से जून 2022 के बीच की गई। इस संबंध में खनिज विभाग के तत्कालीन संचालक IAS समीर बिश्नोई ने 15 जुलाई 2020 को आदेश जारी किया था।
इस पूरे घोटाले का मास्टरमाइंड कोल व्यापारी सूर्यकांत तिवारी को माना गया है। जिन व्यापारियों ने रकम दी, उन्हें ही परमिट और ट्रांसपोर्ट पास जारी किया गया। अनुमान है कि कुल ₹570 करोड़ की अवैध वसूली की गई। यह रकम सीधे सूर्यकांत तिवारी के नेटवर्क के माध्यम से एकत्र की जाती थी। फिलहाल सूर्यकांत तिवारी न्यायिक हिरासत में है और उसकी जमानत याचिकाएं कई बार खारिज की जा चुकी हैं।
गृह विभाग और पुलिस मुख्यालय ने जारी किए निर्देश
गृह विभाग की फाइल (क्रमांक F No. 4-10/Home-C/) और पुलिस मुख्यालय के CID लीगल सेक्शन ने सभी रेंज आईजी और जिलों के एसपी को आदेश जारी किए हैं कि वे CBI को मामले से जुड़े सभी दस्तावेज, साक्ष्य और केस डायरी तुरंत सौंपें ताकि निष्पक्ष और प्रभावी जांच सुनिश्चित की जा सके।
14 अगस्त 2023 से शुरू हुआ था कानूनी संघर्ष
ईडी ने 14 अगस्त 2023 को छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में याचिका दायर कर कहा था कि पीएमएलए की धारा 66 के तहत राज्य सरकार को आवश्यक दस्तावेज सौंपे गए, लेकिन कार्रवाई नहीं की गई। ईडी ने राज्य की ईओडब्ल्यू और एसीबी की निष्पक्षता पर सवाल भी उठाए थे। इसके बाद मामला तूल पकड़ता गया।
सुप्रीम कोर्ट से तीन अफसरों को सशर्त जमानत
मई 2025 में सुप्रीम कोर्ट ने मामले में गिरफ्तार तीन वरिष्ठ अधिकारियों—IAS समीर बिश्नोई, रानू साहू और उप सचिव सौम्या चौरसिया—को सशर्त जमानत दी थी। शर्तों में राज्य से बाहर रहना और नियमित रूप से पुलिस थाने में हाजिरी लगाना शामिल था।
दो साल से फरार नवनीत तिवारी गिरफ्तार
13 जुलाई को EOW ने इस केस में बड़ी सफलता पाते हुए दो वर्षों से फरार आरोपी नवनीत तिवारी को गिरफ्तार कर लिया। उस पर अवैध कोल लेवी की योजना बनाने, वसूली करने और काले धन को निवेश करने जैसे गंभीर आरोप हैं। नवनीत पर IPC की धारा 420, 120बी, 384, 467, 468, 471 और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 7, 7A, 12 के तहत मामला दर्ज है। वर्ष 2022 में ED की छापेमारी के बाद से नवनीत तिवारी फरार था। कोर्ट ने उसके विरुद्ध स्थायी गिरफ्तारी वारंट जारी कर रखा था। अंततः EOW की विशेष टीम ने उसे गिरफ्तार कर लिया।
अब निगाहें CBI की जांच पर
CBI अब इस घोटाले की हर परत को खंगालेगी। सूत्रों के मुताबिक, कई नौकरशाह, राजनेता और व्यापारी जांच के दायरे में हैं। आने वाले दिनों में कई और गिरफ्तारियां और खुलासे संभव हैं।
Tags:    

Similar News