Korea. कोरिया। जिले के पंडोपारा क्षेत्र में शनिवार को मधुमक्खियों के हमले से एसईसीएल (SECL) में कार्यरत एक कालरीकर्मी की मौत हो गई। मृतक अपनी पत्नी के साथ लकड़ी लेने जंगल गया था, जहां अचानक मधुमक्खियों ने दोनों पर हमला कर दिया। पत्नी ने किसी तरह भागकर अपनी जान बचाई और ग्रामीणों को सूचना दी, लेकिन गंभीर रूप से घायल हुए मजदूर की अंबिकापुर ले जाते समय मौत हो गई। मधुमक्खियों के डंक से मौत की यह एक सप्ताह में दूसरी घटना है, जिससे ग्रामीणों में दहशत फैल गई है।
मिली जानकारी के अनुसार, झिलमिली कॉलरी में कार्यरत कालरीकर्मी सुबरन राम (पिता राम प्रसाद) शनिवार की सुबह अपनी पत्नी के साथ लकड़ी बटोरने के लिए पंडोपारा के जंगल की ओर गया था। जंगल के बड़कापारा क्षेत्र में एक पेड़ पर लगे छत्ते से अचानक सैकड़ों मधुमक्खियां झुंड बनाकर दोनों पर टूट पड़ीं। हमले के दौरान सुबरन और उनकी पत्नी जान बचाने के लिए भागने लगे। लेकिन सुबरन को मधुमक्खियों ने कई जगह डंक मार दिया, जिससे वे गंभीर रूप से घायल होकर रास्ते में ही गिर पड़े।
उनकी पत्नी किसी तरह झाड़ियों के बीच से भागकर गांव पहुंची और ग्रामीणों को घटना की जानकारी दी। सूचना मिलते ही ग्रामीण मौके पर पहुंचे और किसी तरह मधुमक्खियों को भगाकर सुबरन को बाहर निकाला। उस समय उनकी हालत बेहद नाजुक थी। ग्रामीणों ने पहले उन्हें पास के पटना हॉस्पिटल ले जाने का प्रयास किया, लेकिन उचित इलाज न मिलने पर 30 किलोमीटर दूर चरचा रीजनल हॉस्पिटल ले जाया गया। चिकित्सकों ने उनकी हालत गंभीर बताते हुए उन्हें अंबिकापुर मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल रेफर कर दिया।
हालांकि, परिजन और ग्रामीण जब तक सुबरन को अंबिकापुर ले जा पाते, रास्ते में ही उनकी मौत हो गई। पत्नी की हालत फिलहाल स्थिर बताई गई है। पटना पुलिस ने मर्ग कायम कर लिया है और मामले की जांच शुरू कर दी है। गौरतलब है कि कोरिया जिले में मधुमक्खियों के हमले से मौत की यह लगातार दूसरी घटना है। कुछ ही दिन पहले, 2 नवंबर को खोंड़ गांव में बकरी चराने गई 10 महिलाओं पर मधुमक्खियों ने हमला किया था। उस घटना में 52 वर्षीय पांचो बाई की मौत हो गई थी, जबकि अन्य नौ महिलाएं घायल हुई थीं। स्थानीय लोगों का कहना है कि हाल के दिनों में जंगलों में मधुमक्खियों के छत्तों की संख्या तेजी से बढ़ गई है, जिससे ग्रामीणों में डर का माहौल है।
घटनाओं की पुनरावृत्ति को देखते हुए क्षेत्रीय जनप्रतिनिधियों ने प्रशासन से कार्रवाई की मांग की है। जनपद सदस्य रंजीत प्रसाद मंडल ने इस संबंध में कोरिया डीएफओ (वन अधिकारी) को पत्र लिखा है। उन्होंने मांग की है कि मृतकों के परिजनों को मुआवजा दिया जाए और बड़कापारा जंगल क्षेत्र से मधुमक्खियों के छत्तों को हटाने की तत्काल व्यवस्था की जाए। स्थानीय लोगों का कहना है कि इस क्षेत्र में जंगलों के किनारे और खेतों के आसपास बड़ी संख्या में जंगली मधुमक्खियां पाई जा रही हैं, जो ज़रा सी हलचल पर हमला कर देती हैं। ग्रामीणों का जीवन अब खतरे में है, क्योंकि यह इलाका लकड़ी, चारा और पशुओं के चरने का प्रमुख क्षेत्र है।
मौके पर पहुंचे ग्रामीणों ने प्रशासन से अपील की है कि इस क्षेत्र में नियमित वन विभाग और आपदा प्रबंधन दल की गश्त लगाई जाए, ताकि आगे ऐसी कोई जानलेवा घटना न हो। साथ ही, स्वास्थ्य विभाग से भी आग्रह किया गया है कि गांवों में प्राथमिक उपचार और एंटी-एलर्जिक दवाओं की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। मृतक सुबरन राम के परिजनों पर दुख का पहाड़ टूट पड़ा है। गांव में शोक का माहौल है, जबकि आसपास के क्षेत्रों में लोग जंगल जाने से डरने लगे हैं। लगातार दूसरी मौत से प्रशासन पर भी दबाव बढ़ गया है कि वह जल्द ही प्रभावी कदम उठाए।