Korba. कोरबा। शहर में एक दुर्लभ फ्लाइंग स्नेक का सुरक्षित रेस्क्यू किया गया है। यह खूबसूरत और रंग-बिरंगा सांप धरमजयगढ़ क्षेत्र से एक चलते ट्रक के साथ कोरबा पहुंच गया था। टीपी नगर स्थित ट्रक स्टैंड में लोगों की नजर समय रहते सांप पर पड़ गई। इसके बाद वन विभाग और रेप्टाइल केयर एंड रेस्क्यूअर सोसाइटी (RCRS) को इसकी सूचना दी गई। रेस्क्यू टीम ने सावधानी बरतते हुए सांप को ट्रक की हाइड्रोलिक मशीन के पास से सुरक्षित बाहर निकाल लिया।
जानकारी के अनुसार, टीपी नगर के ट्रक स्टैंड में खड़े एक ट्रक के पिछले हिस्से में लोगों को रंग-बिरंगा सांप दिखाई दिया। सामान्य सांपों से उसका रंग और बनावट अलग नजर आने के कारण वहां मौजूद लोग भी हैरान रह गए। ट्रक चालक अनिल निषाद ने सांप को देखा, लेकिन उसकी प्रजाति की पहचान नहीं हो सकी। इसके बाद तत्काल वन विभाग को सूचना दी गई। वन विभाग ने मामले की जानकारी RCRS की हेल्पलाइन को दी। सूचना मिलते ही संस्था के अध्यक्ष अविनाश यादव के साथ मनस, उमेश, सौम्य और अतुल की टीम मौके पर पहुंची। टीम ने सांप को देखने के बाद उसकी पहचान फ्लाइंग स्नेक के रूप में की। दुर्लभ और आकर्षक सांप मिलने की जानकारी फैलते ही उसे देखने के लिए आसपास लोगों की भीड़ भी जमा हो गई।
RCRS की टीम ने इसकी सूचना कोरबा वनमंडलाधिकारी जितेंद्र उपाध्याय को दी। उनके निर्देश और उपवनमंडलाधिकारी सूर्यकांत सोनी के मार्गदर्शन में वन्यजीव रेस्क्यू से जुड़े नियमों का पालन करते हुए सांप को सुरक्षित निकालने की प्रक्रिया शुरू की गई। रेस्क्यू टीम के सामने सबसे बड़ी चुनौती सांप की स्थिति थी। फ्लाइंग स्नेक ट्रक के पीछे लगी हाइड्रोलिक मशीन के पास बैठा हुआ था। यहां थोड़ी सी चूक होने पर वह मशीन के अंदर जा सकता था। मशीन के भीतर चले जाने के बाद उसे तलाशना और सुरक्षित बाहर निकालना काफी मुश्किल हो जाता। वहीं हाइड्रोलिक मशीन चालू होने की स्थिति में सांप के दबने या गंभीर रूप से घायल होने का खतरा भी था।
इस स्थिति को देखते हुए टीम ने बेहद सावधानी के साथ रेस्क्यू ऑपरेशन किया। सांप को नुकसान पहुंचाए बिना धीरे-धीरे हाइड्रोलिक मशीन के पास से बाहर निकाला गया। सफल रेस्क्यू के बाद टीम और मौके पर मौजूद लोगों ने राहत की सांस ली। ट्रक चालक अनिल निषाद के अनुसार, उनका ट्रक धरमजयगढ़ से छाल और घरघोड़ा होते हुए सामान लेकर कोरबा पहुंचा था। आशंका जताई जा रही है कि यात्रा के दौरान किसी पेड़ से यह सांप ट्रक पर आ गया होगा। इसके बाद वह ट्रक के पिछले हिस्से में छिपा रहा और चलते वाहन के साथ लंबी दूरी तय कर कोरबा पहुंच गया।
फ्लाइंग स्नेक को लेकर लोगों में अक्सर यह भ्रम रहता है कि यह वास्तव में उड़ सकता है। हालांकि यह पक्षियों की तरह उड़ता नहीं है, बल्कि पेड़ों के बीच हवा में ग्लाइड करने की विशेष क्षमता रखता है। यह सांप अपना अधिकांश समय पेड़ों पर बिताता है और एक पेड़ से दूसरे पेड़ तक पहुंचने के लिए ऊंचाई से छलांग लगाता है। ग्लाइड करते समय फ्लाइंग स्नेक अपने शरीर को चपटा और चौड़ा कर लेता है। इसके बाद शरीर को लहराते हुए हवा में संतुलन बनाता है और अपनी दिशा नियंत्रित करता है। यही अनोखी क्षमता इसे दूसरे सांपों से अलग बनाती है और इसी कारण इसे फ्लाइंग स्नेक कहा जाता है। समय रहते ट्रक चालक और स्थानीय लोगों की नजर पड़ने तथा वन विभाग और RCRS टीम को सूचना मिलने से दुर्लभ सांप की जान बच गई। यदि वह हाइड्रोलिक मशीन के भीतर चला जाता और मशीन चालू हो जाती तो उसके घायल होने का खतरा था। रेस्क्यू टीम की सतर्कता के कारण उसे बिना नुकसान पहुंचाए सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया।
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