तंत्र-मंत्र के शक में खौफनाक आत्महत्या, व्यक्ति ने गला रेतकर दी जान

छग

Update: 2026-03-18 14:49 GMT
Bilaspur. बिलासपुर। छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले से एक बेहद दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है, जहां तंत्र-मंत्र और अंधविश्वास के शक में एक व्यक्ति ने खुद का गला रेतकर आत्महत्या कर ली। इस घटना के बाद पूरे इलाके में सनसनी फैल गई है और परिवार गहरे सदमे में है। यह पूरा मामला पचपेड़ी थाना क्षेत्र के ग्राम जोंधरा का है। मृतक की पहचान 45 वर्षीय चंदन नट के रूप में हुई है, जो भीख मांगकर अपने परिवार का पालन-पोषण करता था। परिजनों और स्थानीय लोगों के अनुसार, चंदन लंबे समय से तंत्र-मंत्र और अंधविश्वास के प्रभाव में था।

मिली जानकारी के मुताबिक, मंगलवार शाम को चंदन रोज की तरह भीख मांगकर घर लौटा था। घर पहुंचने के बाद वह अपने बड़े भाई के साथ सामान्य बातचीत करता रहा। कुछ देर बाद वह घर के पूजा कक्ष में चला गया। शाम करीब 7 बजे उसकी बहू जब किसी काम से पूजा कक्ष में गई, तो वहां का नजारा देखकर उसकी चीख निकल गई। उसने देखा कि चंदन खून से लथपथ हालत में पड़ा हुआ था। परिजनों ने तुरंत उसे अस्पताल पहुंचाया, लेकिन डॉक्टरों ने जांच के बाद उसे मृत घोषित कर दिया। परिवार के लोगों का कहना है कि यह पहली बार नहीं था जब चंदन ने खुद को नुकसान पहुंचाने की कोशिश की हो।

करीब चार महीने पहले भी उसने अपने हाथ को काटकर आत्महत्या का प्रयास किया था। उस घटना के बाद से ही परिवार उसके व्यवहार को लेकर चिंतित था। प्रारंभिक जांच में यह आशंका जताई जा रही है कि चंदन किसी तांत्रिक प्रभाव या मानसिक तनाव में था, जिसके चलते उसने इतना खतरनाक कदम उठा लिया। हालांकि पुलिस किसी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले सभी पहलुओं की गहन जांच कर रही है। घटना के बाद गांव में अंधविश्वास और तंत्र-मंत्र के बढ़ते प्रभाव को लेकर भी चर्चा तेज हो गई है। ग्रामीणों का कहना है कि ऐसे मामलों में जागरूकता की बेहद जरूरत है, ताकि लोग इस तरह के खतरनाक विश्वासों के जाल में न फंसें।

पुलिस ने शव का पंचनामा कर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है और मामले की जांच शुरू कर दी गई है। अधिकारियों का कहना है कि मृतक के मानसिक स्वास्थ्य, सामाजिक स्थिति और आसपास के लोगों से पूछताछ के आधार पर घटना के वास्तविक कारणों का पता लगाया जाएगा। यह घटना एक बार फिर यह सोचने पर मजबूर करती है कि अंधविश्वास और मानसिक तनाव किस तरह लोगों को खतरनाक कदम उठाने के लिए मजबूर कर सकते हैं। प्रशासन और समाज दोनों के लिए यह जरूरी है कि ऐसे मामलों में समय रहते हस्तक्षेप कर लोगों को सही मार्गदर्शन और सहयोग प्रदान किया जाए।
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