Korea. कोरिया। छत्तीसगढ़ के कोरिया जिले में पुलिस ने सरगुजा क्षेत्र के कोटेरबुड़ा जंगल में जुए का फड़ पकड़ा और 17 जुआरियों को गिरफ्तार किया। आरोपियों के पास से 1 लाख 40 हजार रुपए नगद जब्त किया गया। यह कार्रवाई उदयपुर थाना क्षेत्र में हुई। जानकारी के अनुसार, उदयपुर पुलिस को मुखबिर से सूचना मिली कि कोटेरबुड़ा जंगल के पुलिया के पास बड़ी संख्या में लोग जुआ खेल रहे हैं। सूचना मिलते ही पुलिस और साइबर सेल की टीम ने जंगल में छापा मारकर घेराबंदी की।
पुलिस ने बताया कि जुआरियों ने पिकनिक का बहाना बनाकर बस में यात्रा की थी और कोटेरबुड़ा जंगल में जुए का फड़ सजाकर जुआ खेल रहे थे। पकड़े गए सभी जुआरी कोरिया जिले के पटना थाना क्षेत्र के रहने वाले हैं। इस दौरान बस में जुआरियों के परिवार के लोग भी मौजूद थे। आरोपियों में कुछ सरकारी कर्मचारी भी शामिल हैं। गिरफ्तार आरोपियों के नाम: राजेश सोनी (50), संदीप कुमार (32), राजेंद्र प्रसाद (52), राजेश गुप्ता (40), अल्ताफ खान (45), सुभाष कुमार (38), दीपक छत्री (47), विजय सिंह (45), अमित कोरी (31), संदीप गुप्ता (27), शैलेन्द्र गुप्ता (27), कार्तिक सिंह (30), संतोष कुमार सोनी (36), अशोक वर्मा (57), सुदर्शन सिंह (39), संदीप ध्रुव (37), अभिषेक कुमार (34)।
पुलिस कार्रवाई और जब्ती: उदयपुर थाना प्रभारी शिशिर कांत सिंह ने बताया कि आरोपियों के पास से 1 लाख 40 हजार रुपए नगद और ताश के 52 पत्ते जब्त किए गए हैं। सभी आरोपियों के खिलाफ छत्तीसगढ़ जुआ प्रतिषेध अधिनियम की धारा 3(2) के तहत अपराध पंजीबद्ध कर कार्रवाई की गई। पुलिस ने जुआरियों के परिवार के लोगों को बस में वापस जाने दिया, जबकि जुआ खेलने वालों को हिरासत में लेकर कानून के अनुसार कार्यवाही की गई। पुलिस की चेतावनी: थाना प्रभारी ने कहा कि राज्य में जुआ खेलना पूर्णतः अवैध है और किसी भी परिस्थिति में इसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
भविष्य में इस तरह की घटनाओं पर कड़ी नजर रखी जाएगी और अपराधियों के खिलाफ त्वरित कार्रवाई की जाएगी। घटना का सामाजिक प्रभाव: इस कार्रवाई से क्षेत्र में जुआ के खिलाफ पुलिस की सक्रियता और सतर्कता दिखाई दी। जुआ खेलने वालों में सरकारी कर्मचारी शामिल होने से मामले की गंभीरता और बढ़ गई। पुलिस की यह कार्रवाई अन्य लोगों के लिए चेतावनी भी है कि जुआ और अवैध गतिविधियों में शामिल होना कानूनी कार्रवाई को आमंत्रण है। उदयपुर पुलिस की यह कार्रवाई स्थानीय प्रशासन और कानून व्यवस्था बनाए रखने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है। घेराबंदी के दौरान पुलिस ने आरोपियों के ठिकानों की जानकारी जुटाई और मामले की पूरी तह तक जांच की।