सरकार को चूना लगाने का एक नया फंडा इजाद किया अस्पताल के टेंडर में
जनप्रतिनिधि की निजी संस्था और एमडी की मिलीभगत से ठेकेदार के कहने पर डिजाइन किया
अपने चहेते कंपनी को फायदा पहुंचाने टेंडर मौजूदा अबैव (अधिकत्म) दर पर टेंडर पास किया
27 प्रितशत अधिक दर पर जो कि जो कि 300 करोड़ का अधिक का भ्रष्टाचार जनता और सरकार का पैसा स्वाहा, संविदा नियुक्त हितेश साहू पुराना भ्रष्टाचार का आरोपी अपनी मनमानी पर आतुर
पूर्व में तीन मेडिकल कालेजों का टेंडर एसओआर में बिलों (कम दर) में किया गया था लेकिन भ्रष्टाचार की अजीब माया 27 फीसदी अधिक दर पर किसके कहने पर टेंडर फाइनल किया
राज्य शासन की सभी शासकीय एजेंसियां लोक निर्माण विभाग, जल संसाधन विभाग और आरईएस, पुलिस हाउसिंग में एसओआर से कम दर पर निविदाएं स्वीकृत हो रही
विभागीय मंत्री और विभागीय सचिव की नहीं सुन रहा है रितेश अग्रवाल सीजीएमसी का एमडी और दिन प्रतिदिन भ्रष्टाचार के नए रिकार्ड दर्ज करवा रहा है

रायपुर (जसेरि)। CGMSC अपनी कोई न कोई कारगुजारियों के लिए हमेशा सुर्खियों में बनी रहती है। अभी दवाई खरीदी में भ्रष्टाचार का लफड़ा सुलझा नहीं कि 5 मेडिकल कालेजों के निर्माण के लेकर चल रही निविदा प्रक्रिया में भी अपने चहेतों को सीधा लाभ पहुंचाने के लिए तोड़मरोड कर बिलों दर के
नाम पर सरकार
को 300 चूना लगाया गया। बिलासपुर सि स के 800 बेड अस्पताल के टेंडर शर्तों की सीजीएमएससी ने पूरी तरह अनदेखी की है। वहीं अपने चहेतों को फायदा पहुंचाने 1321 करोड़ का अस्पताल भवन बनाने का ठेका निजी कंपनी को देने में शर्तों के साथ समझौता किया गया। छत्तीसगढ़ मेडिकल सर्विसेस कार्पोरेशन ने बिलासपुर के कोनी में सि स के 800 बिस्तर वाले अस्पताल भवन निर्माण के लिए 1321.27 करोड़ का टेंडर किया। अब इसके मूल्यांकन पर सवाल उठने लगे है। स्वास्थ्य विभाग ने सरकारी अस्पतालों की पैथालाजी सेवा का काम सरकारी कंपनी एचएलएल को नामिनेशन के आधार पर दिया था। वहीं सि स के इस टेंडर में सरकारी कंपनी ब्रिजेज एंड रूफ ने बाकायदा बोली लगाई, लेकिन निजी कंपनी डीवी प्रोजेक्टस को काम मिला। 
CGMSC
 

सरकारी कंपनी को काम देने के है नियम
सामान्य वित्तीय नियमावली 2017 के रूल्स 133 में मंत्रालय विभाग को पीएसयू या सरकारी संगठन को मूल कार्य सौंपने की व्यवस्था है। केंद्र के मैनूअल में पात्र पीएसयू के बीच प्रतिस्पर्धा, अपवाद में नामिनेशन के आधार पर काम देने की प्रक्रिया बताई है। स्वास्थ्य विभाग के दो फैसलों में प्रक्रिया का अंतर सवाल खड़ा करता है। जनवरी 2026 में पैथालाजी सेवा का काम िबना टेंडर सरकारी कंपनी एचएलएल को नामिनेशन से दिया गया। सि स भवन के लिए पीएसयू ब्रिजेज एंड रूफ ने प्रतिस्पर्धी टेंडर में हिस्सा लिया। फिर भी निजी कंपनी को मिला।

कंपनी के दस्तावेजों में 300 बेड के अस्पताल के निर्माण का अनुभव और भविष्य में 500 बेड तक विस्तार की बात है। जबकि टेंडर में 500 बेड के अस्पताल निर्माण का अनुभव अनिवार्य था। प्री-इंटीग्रिटी पैक्ट भी निर्धारित प्रक्रिया के अनुरूप नहीं होने का सवाल है। डीवी प्रोजेक्टस कोरबा के पूर्व सांसद बंसी लाल महतो के बेटे विकास से जुड़ी कंपनी है। डीवी प्रोजेक्ट के डायरेक्टर दीपक पटेल ने दूसरे डायरेक्टर को जानकारी होने की बात कही । ब्रिजेज एंड रूफ के रायपुर में पदस्थ रवि महतो ने बताया कि टेंडर से जुड़े मामले कोलकाता हेड आपिस की टीम देखती है। यहां फोन किया गया। लेकिन किसी ने जवाब नहीं दिया।

अनुभव 300 बेड का 500 तक विस्तार की बात
टेंडर की तकनीकी पात्रता 1.4.1बी( आईआई) के मुताबिक कम से कम एक 500 बिस्तर वाले अस्पताल के निर्माण का अनुभव अनिवार्य था। डीवी प्रोजेक्टस ने इंदौर में ईएसआईसी अस्पताल का अनुभव प्रमाण पत्र लगाया . इसमें 300 बेड वाले अस्पताल के निर्माण और भविष्य में 500 बेड तक विस्तार की बात है। यानी प्रमाण पत्र में 500 बेड का निर्मित अस्पताल स्पष्ट नहीं है। इसके बावजूद बोली स्वीकार होने से मूल्यांकन प्रक्रिया पर सवाल उठ रहे है।
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