नशीली गोलियों की तस्करी करने वाले 3 तस्करों को मिली 15 साल की जेल

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Update: 2025-09-08 18:01 GMT
Raipur. रायपुर। रायपुर में किरण थवाईत की विशेष एनडीपीएस अदालत में आज नशीली दवाओं की अवैध मात्रा रखने के आरोप में अमन सोनकर उर्फ सन्नी को दोषी करार देते हुए 15 वर्षों के कठोर कारावास और 1,50,000 रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है। जुर्माना न भरने की स्थिति में उसे अतिरिक्त 6 माह का कारावास भुगतना होगा। यह निर्णय विशेष दाण्डिक प्रकरण क्रमांक 229/2024 के तहत सुनाया गया। अभियोजन पक्ष ने बताया कि आरोपी अमन सोनकर प्रतिबंधित नशीली कैप्सूल की व्यावसायिक मात्रा अपने कब्जे में रखे हुए था। न्यायालय ने एनडीपीएस एक्ट की धारा 22(C) के अंतर्गत अपराध को गंभीर मानते हुए कठोर दंड का प्रावधान लागू किया। विशेष लोक अभियोजक ने अपराध की प्रकृति को देखते हुए आरोपी को कड़े दंड से दंडित किए जाने का निवेदन किया था। 
विशेष दंडिक प्रकरण संख्या 229/2024 में दो आरोपियों विरेंद्र सोनी और गौतम सोनी उर्फ़ तरुण को 22(C) एनडीपीएस एक्ट के तहत 15 वर्ष के सश्रम कारावास और 1,50,000 रुपये जुर्माने की सजा सुनाई गई है। इसके अतिरिक्त, दोनों को 6 माह अतिरिक्त सश्रम कारावास की सजा भी दी गई है। अभियोजन के अनुसार, अभियुक्तगण 22/06/2024 से 08/09/2025 तक न्यायिक अभिरक्षा में थे। अदालत ने निर्णय लिया कि उन्हें दी गई मूल सजा की अवधि को पूरा किया जाए। साथ ही धारा 428 दंड संहिता एवं नया धारा 468 (बीएनएसपीएस) के प्रमाण पत्र के अनुसार सजा वारंट के साथ संलग्न किया गया।
मामले में जब्त किए गए पदार्थों के संबंध में अदालत ने निर्देश दिए कि अवैध मादक पदार्थ के सैंपल पैकेट को छोड़कर शेष सभी जब्त सामग्री को विधि अनुसार नष्ट किया जाए। इस संबंध में विशेष उल्लेख है कि अभियुक्त अमन सोनेकर उर्फ़ सन्नी के कब्जे से जब्त वाहन ई-रिक्शा क्रमांक सीजी10-04/पीके-4497 को शासन के पक्ष में राजसात किया जाए। वहीं, आरोपी के पक्ष में दलील दी गई कि वह गरीब व्यक्ति है और मजदूरी कर जीवन यापन करता है। अभियुक्त ने यह निवेदन किया कि जितने दिन वह अभिरक्षा में रहा है उतने दिनों की सजा दी जाए तथा जुर्माने की राशि में राहत दी जाए। परंतु अदालत ने समाज पर पड़ने वाले नशीली पदार्थों के प्रभाव को ध्यान में रखते हुए यह राहत देने से इनकार कर दिया।
अदालत ने कहा कि नशीली दवाओं की अवैध बिक्री और उपयोग से न केवल व्यक्ति का जीवन प्रभावित होता है, बल्कि परिवार, समाज और देश पर भी गंभीर दुष्प्रभाव पड़ते हैं। इसलिए ऐसे अपराधों पर कठोर कार्रवाई आवश्यक है। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि केवल कारावास से न्याय की पूर्ति नहीं होती, बल्कि अपराध की प्रकृति, आरोपी की मानसिकता, सामाजिक प्रभाव आदि पहलुओं का विचार करना आवश्यक है। निर्णय में यह भी कहा गया कि नशीली पदार्थों के व्यापार को रोकने और समाज को सुरक्षित रखने के लिए कानून का कठोर अनुपालन जरूरी है। अदालत ने इस मामले में दोष सिद्ध करते हुए आरोपी को निर्धारित दंड दिया और समाज के लिए संदेश दिया कि इस प्रकार के अपराधों को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
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