Raipur. रायपुर। राजधानी रायपुर में संपत्ति बिक्री के नाम पर ठगी का बड़ा मामला सामने आया है। 61 वर्षीय भूपेन्द्र सोनी ने आमानाका थाना प्रभारी को लिखित आवेदन देकर बताया कि मारुति इनक्लेव, टाटीबंध निवासी ब्रम्हानंद खेमानी ने मकान बिक्री के सौदे में उनसे 15 लाख रुपये अग्रिम राशि ली, लेकिन न तो मकान की रजिस्ट्री कराई और न ही रकम लौटाई। पुलिस ने आवेदन पर संज्ञान लेते हुए आरोपी के खिलाफ धोखाधड़ी का अपराध पंजीबद्ध कर विवेचना शुरू कर दी है।
मकान का सौदा और 15 लाख की एडवांस राशि
आवेदक भूपेन्द्र सोनी मूलतः मुंगेली जिले के रहने वाले हैं और वर्तमान में रायपुर के अम्लीडीह स्थित माइल स्टोन रेसिडेंसी में परिवार सहित निवास करते हैं। उन्होंने अपने आवेदन में बताया कि बच्चों के भविष्य को देखते हुए उन्होंने रायपुर में मकान खरीदने का निर्णय लिया था। इसी दौरान ब्रोकर के माध्यम से पता चला कि ब्रम्हानंद खेमानी टाटीबंध स्थित अपने मकान को बेचना चाहता है। दोनों के बीच बातचीत के बाद मकान का सौदा 1 करोड़ 35 लाख रुपये में तय हुआ। इस सौदे के तहत 10 सितंबर 2024 को एक इकरारनामा किया गया, जिसमें यह तय हुआ कि छह माह के भीतर यानी 10 मार्च 2025 तक मकान की रजिस्ट्री कराई जाएगी। इसी दौरान भूपेन्द्र सोनी ने अग्रिम राशि के तौर पर कुल 15 लाख रुपये ब्रम्हानंद खेमानी को दिए।
राशि का भुगतान ऐसे हुआ
1,01,000 रुपये – 06 सितंबर 2024 को ऑनलाइन ट्रांजैक्शन से।
10,00,000 रुपये – 09 सितंबर 2024 को आरटीजीएस/आईएमपीएस के माध्यम से।
3,99,000 रुपये – भारतीय स्टेट बैंक, मुंगेली शाखा के चेक (क्रमांक 104431) द्वारा।
आरोपी ने टाला, रजिस्ट्री नहीं कराई
आवेदक ने बताया कि सौदे के बाद छह माह बीत जाने के बावजूद आरोपी ने रजिस्ट्री नहीं कराई। जब भी उनसे संपर्क किया गया, वे तरह-तरह के बहाने बनाकर आश्वासन देते रहे। व्हाट्सएप और मोबाइल कॉल्स पर भी बार-बार बात होने के बावजूद आरोपी ने इकरारनामा पूरा नहीं किया। इस बीच भूपेन्द्र सोनी ने अपने वकील के माध्यम से 22 फरवरी 2025 को कानूनी नोटिस भी भेजा, जिसकी डाक रसीद और प्राप्ति की पुष्टि उपलब्ध है। बावजूद इसके आरोपी ने न तो रजिस्ट्री कराई और न ही 15 लाख रुपये लौटाए।
गिरवी मकान की सच्चाई
सौदे के दौरान यह भी सामने आया कि टाटीबंध स्थित मकान बंधन बैंक शाखा पंडरी में गिरवी रखा हुआ है। इकरारनामा की शर्तों में स्पष्ट उल्लेख था कि बैंक से संपत्ति को मुक्त कराने और रजिस्ट्री कराने की जिम्मेदारी विक्रेता यानी ब्रम्हानंद खेमानी की होगी। लेकिन अब तक बैंक से मुक्त कराने की कार्रवाई भी नहीं की गई।
धोखाधड़ी का आरोप और मानसिक प्रताड़ना
भूपेन्द्र सोनी ने अपने आवेदन में कहा कि आरोपी ने मीठी-मीठी बातों और झूठे आश्वासनों में उलझाकर उनसे 15 लाख रुपये की ठगी की है। यह रकम पिछले 11 महीनों से आरोपी के पास है और बार-बार मांगने के बावजूद वह लौटाने से इंकार कर रहा है। इससे उन्हें और उनके परिवार को आर्थिक, मानसिक और शारीरिक प्रताड़ना झेलनी पड़ रही है। आमानाका थाना पुलिस ने आवेदन का अध्ययन करने के बाद प्रथम दृष्टया धोखाधड़ी का मामला बनना पाया। पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता की धारा 318 (BNS) के तहत अपराध दर्ज कर विवेचना शुरू कर दी है। पुलिस सूत्रों के अनुसार, आरोपी ब्रम्हानंद खेमानी के खिलाफ पर्याप्त साक्ष्य जुटाए जा रहे हैं। साथ ही बैंक रिकॉर्ड, भुगतान रसीद और कानूनी नोटिस की जांच भी की जाएगी।
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