रोहतास। कैमूर पहाड़ी पर स्थित ऐतिहासिक रोहतासगढ़ किले तक पहुंच को आसान बनाने के लिए बन रहे रोपवे का निर्माण अब नए तकनीकी डिजाइन के आधार पर किया जाएगा। पिछले वर्ष निर्माण के दौरान रोपवे का हिस्सा गिरने की घटना के बाद परियोजना की तकनीकी समीक्षा कराई गई थी। अब आईआईटी पटना की टीम के सुझावों के आधार पर पिलरों के निर्माण की प्रक्रिया में बड़ा बदलाव किया गया है।

करीब एक माह पहले आईआईटी पटना की तकनीकी टीम रोपवे निर्माण स्थल पर पहुंची थी। टीम ने जमीन की स्थिति, पिलरों की नींव, भार वहन क्षमता और पहले अपनाई गई निर्माण पद्धति की जांच की। इसके बाद पिलरों की मजबूती बढ़ाने के लिए नई तकनीक अपनाने की सलाह दी गई।

नई व्यवस्था के तहत अब पहले की तरह केवल गड्ढा खोदकर उसमें सीधे सरिया डालकर पिलर खड़े नहीं किए जाएंगे। निर्धारित गहराई तक खुदाई करने के बाद स्टील के एंकर बार लगाए जाएंगे। इसके बाद इन्हीं एंकर बार को आधार बनाकर पिलर का निर्माण किया जाएगा।

तकनीकी जानकारों के अनुसार स्टील एंकर बार किसी संरचना या कंक्रीट को उसकी नींव से मजबूती से बांधकर रखने का काम करते हैं। पहाड़ी क्षेत्रों में इस तकनीक का उपयोग संरचना को अतिरिक्त मजबूती देने के लिए किया जाता है। इससे पिलर पर पड़ने वाले भार और बाहरी दबाव को बेहतर तरीके से संभालने में मदद मिल सकती है।

रोहतासगढ़ रोपवे परियोजना लंबे समय से स्थानीय लोगों और पर्यटकों के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है। कैमूर पहाड़ी पर स्थित किले तक पहुंचने में अभी लोगों को कठिन चढ़ाई और लंबा रास्ता तय करना पड़ता है। रोपवे शुरू होने के बाद पर्यटकों की आवाजाही आसान होने की उम्मीद है।

पिछले वर्ष निर्माण के दौरान हुई घटना के बाद परियोजना की सुरक्षा और तकनीकी मजबूती पर सवाल उठे थे। इसके बाद निर्माण प्रक्रिया को लेकर अतिरिक्त सावधानी बरतने का निर्णय लिया गया। इसी क्रम में विशेषज्ञ संस्था से तकनीकी सलाह ली गई।

आईआईटी पटना की टीम ने स्थल पर पहुंचकर पिलर निर्माण की पुरानी प्रक्रिया का अध्ययन किया। जांच के दौरान जमीन की प्रकृति, चट्टानों की स्थिति और संरचना पर आने वाले संभावित भार को ध्यान में रखकर नया डिजाइन तैयार करने की सलाह दी गई।

नई तकनीक के तहत एंकर बार को तय गहराई तक जमीन और चट्टान में स्थापित किया जाएगा। इसके बाद पिलर की नींव इनसे मजबूती से जोड़ी जाएगी। इससे पिलर के खिसकने, झुकने या भार के दबाव में अस्थिर होने का खतरा कम करने की कोशिश की जाएगी।

रोपवे परियोजना में पिलर सबसे महत्वपूर्ण संरचनात्मक हिस्सों में से एक होते हैं। इन्हीं पर केबल और केबिन का भार पड़ता है। ऐसे में इनके निर्माण में किसी भी तरह की तकनीकी कमजोरी पूरी परियोजना के लिए जोखिम पैदा कर सकती है।

यही कारण है कि इस बार निर्माण एजेंसी से तकनीकी मानकों का सख्ती से पालन कराने पर जोर दिया जा रहा है। पिलरों की नींव से लेकर ऊपर की संरचना तक हर चरण की निगरानी किए जाने की तैयारी है।

अधिकारियों का फोकस इस बात पर है कि दोबारा निर्माण के दौरान पहले जैसी कोई चूक न हो। नई डिजाइन के अनुसार निर्माण शुरू करने से पहले सभी जरूरी तकनीकी स्वीकृतियां और मापदंड पूरे किए जाएंगे।

रोहतासगढ़ किला ऐतिहासिक और पर्यटन की दृष्टि से महत्वपूर्ण स्थल है। यहां हर वर्ष बड़ी संख्या में पर्यटक और स्थानीय लोग पहुंचते हैं। रोपवे बनने के बाद बुजुर्गों, बच्चों और उन लोगों को भी राहत मिलेगी, जिन्हें पहाड़ी रास्ते से ऊपर चढ़ने में परेशानी होती है।

परियोजना के पूरा होने से स्थानीय पर्यटन को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। आसपास के क्षेत्रों में रोजगार और छोटे व्यवसायों के अवसर बढ़ सकते हैं। होटल, दुकान, परिवहन और स्थानीय उत्पादों की बिक्री से जुड़े लोगों को भी इसका लाभ मिल सकता है।

हालांकि अब सबसे बड़ी प्राथमिकता परियोजना की सुरक्षा और टिकाऊ निर्माण है। पिछले वर्ष की घटना के बाद प्रशासन और निर्माण एजेंसी पर यह जिम्मेदारी बढ़ गई है कि सभी संरचनाओं को तकनीकी मानकों के अनुरूप बनाया जाए।

जानकारों के मुताबिक पहाड़ी क्षेत्र में निर्माण के दौरान सामान्य मैदानी इलाकों की तुलना में अधिक सावधानी जरूरी होती है। जमीन की परत, चट्टानों की दिशा, पानी का रिसाव और ढलान जैसी स्थितियां निर्माण की मजबूती को प्रभावित कर सकती हैं।

इसी वजह से एंकर बार तकनीक को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। एंकर बार पिलर की नींव को जमीन से मजबूती से जोड़ने में मदद करेंगे और संरचना की स्थिरता बढ़ाएंगे।

निर्माण से पहले प्रत्येक पिलर की जगह पर आवश्यक खुदाई और तकनीकी परीक्षण किया जाएगा। उसके बाद डिजाइन के अनुसार स्टील एंकर बार लगाए जाएंगे। आगे कंक्रीट और सरिया का काम इन्हीं तकनीकी मानकों के आधार पर किया जाएगा।

आईआईटी पटना की तकनीकी सलाह के बाद अब निर्माण एजेंसी के सामने परियोजना को सुरक्षित तरीके से आगे बढ़ाने की चुनौती है। पिलरों के निर्माण के बाद भी उनकी गुणवत्ता और मजबूती की जांच किए जाने की संभावना है।

रोपवे परियोजना के दोबारा गति पकड़ने से स्थानीय लोगों में भी उम्मीद जगी है। लंबे समय से क्षेत्र में पर्यटन सुविधा बेहतर करने की मांग उठती रही है और रोपवे को इसी दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

फिलहाल रोहतासगढ़ रोपवे का निर्माण पुराने तरीके के बजाय नए डिजाइन और मजबूत तकनीक के साथ आगे बढ़ाने की तैयारी है। स्टील एंकर बार के इस्तेमाल से पिलरों की नींव को अतिरिक्त मजबूती देने का प्रयास होगा। अब नजर इस बात पर रहेगी कि नई तकनीक के साथ निर्माण कार्य कितनी तेजी और गुणवत्ता से पूरा किया जाता है।

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