पटना। बिहार में बाढ़ की मार झेल रहे किसानों के लिए मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने बड़ी राहत की घोषणा की है। बाढ़ के कारण खेतों में जमा बालू, रेत और गाद हटाने के लिए राज्य सरकार किसानों को आर्थिक सहायता देगी। इस योजना के तहत पात्र किसानों को प्रति हेक्टेयर 18 हजार रुपये की सहायता राशि देने का प्रावधान किया गया है। वहीं, प्रत्येक पात्र किसान को न्यूनतम 2,200 रुपये की मदद मिलेगी। सरकार के इस फैसले से पटना समेत राज्य के 22 जिलों के बाढ़ प्रभावित किसानों को राहत मिलने की उम्मीद है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने सोमवार, 26 अक्टूबर 2026 को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर इस फैसले की जानकारी दी। सरकार का उद्देश्य बाढ़ से प्रभावित कृषि योग्य भूमि को दोबारा खेती के लायक बनाना और किसानों को आर्थिक नुकसान से उबारने में मदद करना है।

22 जिलों के किसानों को मिलेगा योजना का लाभ

राज्य सरकार के निर्देश पर आपदा प्रबंधन विभाग ने बाढ़ प्रभावित 22 जिलों के जिलाधिकारियों को पत्र जारी किया है। इनमें पटना, भोजपुर, सारण, वैशाली, भागलपुर, बेगूसराय, बक्सर, समस्तीपुर, मुंगेर, कटिहार, लखीसराय, खगड़िया, पूर्णिया, मधेपुरा, अरवल, पश्चिम चंपारण, पूर्वी चंपारण, गोपालगंज, दरभंगा, मुजफ्फरपुर, सुपौल और सहरसा शामिल हैं।

इन जिलों में वर्ष 2026 के दौरान आई बाढ़ से कृषि योग्य भूमि और मत्स्य प्रक्षेत्रों को व्यापक नुकसान पहुंचा है। कई स्थानों पर बाढ़ का पानी उतरने के बाद खेतों में मोटी परत के रूप में बालू और गाद जमा हो गई है।

इससे किसानों के लिए खेतों की जुताई और नई फसल की बुआई करना मुश्किल हो गया है। सरकार ने इस समस्या को गंभीरता से लेते हुए प्रभावित भूमि को दोबारा उपयोगी बनाने की दिशा में कदम उठाया है।

प्रति हेक्टेयर 18 हजार रुपये की आर्थिक सहायता

मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के अनुसार, बाढ़ के कारण कृषि योग्य भूमि पर जमा बालू, रेत और गाद हटाने के लिए प्रति हेक्टेयर 18 हजार रुपये की सहायता का प्रावधान है।

योजना के तहत प्रत्येक पात्र किसान को न्यूनतम 2,200 रुपये दिए जाएंगे। इससे उन छोटे और सीमांत किसानों को भी मदद मिल सकेगी, जिनके पास कम कृषि भूमि है।

सरकार का मानना है कि बाढ़ के बाद खेतों की सफाई और उन्हें दोबारा कृषि योग्य बनाने में किसानों को अतिरिक्त खर्च उठाना पड़ता है। ऐसे में सहायता राशि से इस आर्थिक बोझ को कुछ हद तक कम किया जा सकेगा।

हालांकि किसानों को वास्तविक भुगतान निर्धारित पात्रता और क्षति के सत्यापन के बाद ही किया जाएगा।

डीएम को खेतों का सर्वे कराने के निर्देश

आपदा प्रबंधन विभाग ने संबंधित जिलाधिकारियों को बाढ़ प्रभावित कृषि भूमि का स्थलीय सत्यापन कराने के निर्देश दिए हैं।

अधिकारियों को यह पता लगाना होगा कि किन क्षेत्रों में बाढ़ के कारण बालू, रेत और गाद जमा हुई है और इससे कितनी कृषि भूमि प्रभावित हुई है।

इसके बाद नुकसान का आकलन कर निर्धारित मानकों के अनुसार सहायता राशि की मांग की जाएगी।

विभाग की ओर से जारी निर्देशों के मुताबिक, कृषि भूमि के साथ मत्स्य प्रक्षेत्रों का भी सर्वे किया जाएगा। इसका उद्देश्य मछली पालन से जुड़े लोगों को हुए नुकसान का आकलन करना है।

सत्यापन की प्रक्रिया पूरी होने के बाद प्रभावित किसानों और मत्स्य पालकों को निर्धारित नियमों के तहत सहायता उपलब्ध कराने की कार्रवाई आगे बढ़ेगी।

बाढ़ के बाद खेती करना हो गया मुश्किल

बिहार के कई जिलों में इस वर्ष बाढ़ के कारण कृषि क्षेत्र को नुकसान उठाना पड़ा है। नदियों के उफान और जलभराव के कारण कई खेत लंबे समय तक पानी में डूबे रहे।

बाढ़ का पानी उतरने के बाद किसानों के सामने नई समस्या खड़ी हो गई। खेतों की उपजाऊ मिट्टी के ऊपर बालू और रेत की परत जमा होने से खेती करना मुश्किल हो गया।

कई किसानों को खेतों से बालू हटाने के लिए मजदूरों और मशीनों की जरूरत पड़ सकती है। इससे खेती की लागत बढ़ जाती है।

विशेषज्ञों के अनुसार, खेतों में अधिक मात्रा में रेत जमा होने से मिट्टी की संरचना, नमी बनाए रखने की क्षमता और फसल उत्पादन प्रभावित हो सकता है।

सरकार की नई सहायता व्यवस्था से ऐसे किसानों को राहत मिलेगी, जो आर्थिक तंगी के कारण अपने खेतों की सफाई नहीं करा पा रहे हैं।

मत्स्य पालकों को भी मिलेगी राहत

सरकार की पहल केवल कृषि भूमि तक सीमित नहीं है। बाढ़ के कारण प्रभावित मत्स्य प्रक्षेत्रों को भी इस सहायता व्यवस्था में शामिल किया गया है।

बाढ़ के दौरान तालाबों और मत्स्य पालन वाले क्षेत्रों में बड़ी मात्रा में गाद और रेत जमा हो सकती है। इससे तालाबों की गहराई कम होने और मछली पालन की गतिविधियों पर असर पड़ने की आशंका रहती है।

ऐसी स्थिति में तालाबों की सफाई और उन्हें दोबारा उपयोग के योग्य बनाने के लिए अतिरिक्त खर्च करना पड़ता है।

आपदा प्रबंधन विभाग ने संबंधित अधिकारियों को मत्स्य प्रक्षेत्रों में हुए नुकसान का भी आकलन करने के निर्देश दिए हैं। इससे कृषि के साथ मत्स्य पालन पर निर्भर परिवारों को भी राहत मिलने की संभावना है।

पहले 2.48 लाख किसानों को मिली थी सहायता

राज्य सरकार इससे पहले भी बाढ़ प्रभावित किसानों को आर्थिक राहत उपलब्ध करा चुकी है।

14 अक्टूबर 2026 को मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कृषि इनपुट अनुदान योजना के तहत 2,48,704 किसानों के बैंक खातों में 112.52 करोड़ रुपये की राशि डीबीटी के माध्यम से हस्तांतरित की थी।

यह राशि अगस्त में बाढ़ और भारी बारिश के कारण फसलों को हुए नुकसान की भरपाई के लिए दी गई थी।

उस दौरान मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया था कि राहत से वंचित पात्र किसानों तक सहायता पहुंचाने के लिए विशेष अभियान चलाया जाए।

कृषि इनपुट अनुदान योजना में असिंचित फसल क्षेत्र के लिए 8,500 रुपये, सिंचित क्षेत्र के लिए 17 हजार रुपये और बहुवर्षीय फसलों के लिए 22,500 रुपये प्रति हेक्टेयर सहायता का प्रावधान है। यह फसल क्षति सहायता, खेतों से बालू और गाद हटाने की नई पहल से अलग है।

मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को दिए सख्त निर्देश

मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने छह अक्टूबर को बाढ़ की स्थिति और इससे हुए नुकसान की समीक्षा करते हुए संबंधित विभागों को विस्तृत रिपोर्ट तैयार करने के निर्देश दिए थे।

उन्होंने कहा था कि बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में राहत, पुनर्वास और विकास कार्यों को प्राथमिकता के आधार पर आगे बढ़ाया जाना चाहिए।

मुख्यमंत्री ने आपदा प्रबंधन विभाग को अन्य संबंधित विभागों के साथ समन्वय बनाकर नुकसान और पुनर्स्थापन पर होने वाले खर्च का आकलन करने को कहा था।

किसानों को अब सर्वे और सहायता राशि का इंतजार

सरकार की इस घोषणा के बाद बाढ़ प्रभावित जिलों के किसानों को राहत मिलने की उम्मीद बढ़ गई है।

हालांकि सहायता राशि के वितरण की अंतिम तारीख और विस्तृत आवेदन प्रक्रिया की आधिकारिक जानकारी अभी स्पष्ट नहीं हुई है। संबंधित जिलों में सर्वे और क्षति आकलन की प्रक्रिया के आधार पर पात्र किसानों की पहचान की जाएगी।

राज्य सरकार की इस पहल से बाढ़ प्रभावित खेतों को दोबारा खेती योग्य बनाने में मदद मिलने की उम्मीद है। अब किसानों की नजर जिला प्रशासन द्वारा किए जाने वाले सर्वे और सहायता राशि के वितरण पर टिकी है।

Tags: