पीएम मोदी के प्रस्तावित दौरे से पहले तैयारियां तेज, नेपाल सीमा को जोड़ेगा नया फोरलेन
मुजफ्फरपुर: उत्तर बिहार से नेपाल सीमा तक सड़क संपर्क मजबूत करने वाली मुजफ्फरपुर-सीतामढ़ी-सोनबरसा फोरलेन परियोजना के शिलान्यास की तैयारियां तेज हो गई हैं। दैनिक जागरण की रिपोर्ट के अनुसार, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का 20 नवंबर को बिहार आगमन प्रस्तावित है और इसी दौरान परियोजना का शिलान्यास कराने की तैयारी की जा रही है। भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण यानी एनएचएआई ने इससे संबंधित प्रशासनिक प्रक्रिया आगे बढ़ाई है। हालांकि, प्रस्तावित कार्यक्रम को प्रधानमंत्री कार्यालय से जारी अंतिम यात्रा कार्यक्रम के समान नहीं माना जाना चाहिए।
राष्ट्रीय राजमार्ग-22 के इस खंड को मौजूदा दो लेन से चार लेन में विकसित किया जाएगा। केंद्र सरकार ने अगस्त में परियोजना को मंजूरी दी थी। सरकारी जानकारी के अनुसार, लगभग 82.57 किलोमीटर लंबे मार्ग के उन्नयन की कुल पूंजी लागत 3,590.73 करोड़ रुपये है। परियोजना हाइब्रिड एन्युइटी मोड के तहत विकसित की जाएगी। इसका उद्देश्य यात्री वाहनों और माल ढुलाई के लिए मार्ग की क्षमता बढ़ाना है।
भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया में तेजी
शिलान्यास की तैयारी के साथ भूमि अधिग्रहण से जुड़ी लंबित औपचारिकताओं पर भी काम किया जा रहा है। रिपोर्ट के अनुसार, एनएचएआई के परियोजना निदेशक विनीत कुमार बागेरिया ने जिला भू-अर्जन पदाधिकारी को प्रस्तावित कार्यक्रम से अवगत कराया है। पहले भेजे गए भूमि अधिग्रहण प्रस्ताव में कुछ आपत्तियां दर्ज की गई थीं। एनएचएआई ने संबंधित बिंदुओं में सुधार कर नया प्रस्ताव भेजा है। साथ ही अधिग्रहण से जुड़ी अधिघोषणा की प्रक्रिया आगे बढ़ाने का अनुरोध किया गया है। यह काम महत्वपूर्ण है, क्योंकि सड़क चौड़ीकरण के लिए आवश्यक जमीन की स्थिति स्पष्ट होने से निर्माण संबंधी गतिविधियों को आगे बढ़ाने में मदद मिलेगी। परियोजना की निविदा प्रक्रिया भी जारी है। सरकारी ई-प्रोक्योरमेंट पोर्टल पर उपलब्ध संशोधित कार्यक्रम के अनुसार, बोली जमा करने की अंतिम तिथि पांच नवंबर और बोली खोलने की तिथि छह नवंबर, 2026 दर्ज है। निविदा दस्तावेज में निर्माण खंड की डिजाइन लंबाई 82.551 किलोमीटर बताई गई है। यह सरकारी विवरण में उल्लिखित लगभग 82.57 किलोमीटर के करीब है।
नेपाल सीमा और राष्ट्रीय राजमार्ग नेटवर्क से जुड़ाव
मुजफ्फरपुर-सोनबरसा मार्ग का महत्व स्थानीय यातायात से आगे तक है। सोनबरसा भारत-नेपाल सीमा के पास स्थित है, जबकि मुजफ्फरपुर में यह मार्ग एनएच-27 यानी ईस्ट-वेस्ट कॉरिडोर से जुड़ता है। इससे सीमावर्ती क्षेत्रों और बड़े परिवहन नेटवर्क के बीच बेहतर संपर्क स्थापित करने की संभावना है। सड़क की क्षमता बढ़ने से यात्री और मालवाहक वाहनों की आवाजाही सुगम होने की उम्मीद है। हालांकि, यात्रा में कितने मिनट या घंटे की बचत होगी, इसका कोई पुष्ट आंकड़ा उपलब्ध विवरण में नहीं दिया गया है। वास्तविक लाभ निर्माण पूरा होने, यातायात प्रबंधन और मार्ग की परिचालन स्थिति पर निर्भर करेगा।
सात बड़े पुल और तीन रेलवे ओवरब्रिज
परियोजना में सात प्रमुख पुलों का प्रावधान है। इनमें बागमती नदी पर 340 मीटर लंबा पुल शामिल है। इसके अलावा तीन रेलवे ओवरब्रिज और दो फ्लाईओवर प्रस्तावित हैं। सरकारी विवरण में दोनों फ्लाईओवर की लंबाई क्रमशः 1,170 मीटर और 270 मीटर बताई गई है। इन संरचनाओं का उद्देश्य महत्वपूर्ण क्रॉसिंग पर वाहनों की आवाजाही बेहतर करना है। रेलवे ओवरब्रिज बनने से सड़क और रेल यातायात के बीच टकराव वाले बिंदुओं पर राहत मिलने की उम्मीद है। पुल और फ्लाईओवर मार्ग की निरंतरता बनाए रखने में मदद करेंगे।
कस्बों और बाजारों में यातायात दबाव घटने की उम्मीद
यह मार्ग मुजफ्फरपुर, मकसूदपुर, रुन्नीसैदपुर, थुम्मा, डुमरा, भुतही और सोनबरसा जैसे आबादी वाले क्षेत्रों से होकर गुजरता है। सड़क चौड़ी होने से इन हिस्सों में यातायात प्रवाह बेहतर होने की उम्मीद है। वर्तमान दो लेन व्यवस्था की तुलना में चार लेन सड़क वाहनों के लिए अधिक क्षमता उपलब्ध कराएगी। सरकारी परियोजना विवरण में इसे 100 किलोमीटर प्रति घंटे की डिजाइन गति के अनुरूप विकसित करने की बात है। डिजाइन गति को सड़क खुलते ही लागू होने वाली सार्वभौमिक गति सीमा नहीं समझना चाहिए। वाहन चालकों के लिए वास्तविक गति सीमा संबंधित संकेतों और यातायात नियमों के अनुसार निर्धारित होगी।
कृषि, व्यापार और पर्यटन को मिल सकता है लाभ
बेहतर सड़क संपर्क से कृषि उत्पादों को बाजारों तक पहुंचाने, औद्योगिक क्षेत्रों और रेलवे स्टेशनों से माल परिवहन में सुविधा मिलने की संभावना है। परियोजना से बाबा गरीबनाथ मंदिर, माता जानकी मंदिर और पुनौरा धाम जैसे धार्मिक स्थलों तक पहुंच भी बेहतर होने की उम्मीद है। मार्ग का उन्नयन औद्योगिक क्षेत्रों और मेगा फूड पार्क के संपर्क के लिए भी उपयोगी होगा। इन संभावित लाभों का पूरा असर निर्माण और संबंधित सुविधाएं तैयार होने के बाद सामने आएगा। फिलहाल परियोजना की स्वीकृति के बाद निविदा, भूमि अधिग्रहण और प्रस्तावित शिलान्यास की तैयारियां प्रमुख चरण हैं।