मुजफ्फरपुर। बिहार में आगामी विधान परिषद चुनाव को लेकर राजनीतिक सरगर्मियां तेज हो गई हैं। जन सुराज पार्टी के संस्थापक और बांकीपुर से विधायक प्रशांत किशोर ने बुधवार, 21 अक्टूबर 2026 को मुजफ्फरपुर में बड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि विधान परिषद चुनाव से न तो राज्य की सरकार बदलेगी और न ही विपक्ष के नेतृत्व में कोई परिवर्तन आएगा। हालांकि, यह चुनाव जनता को अपने मताधिकार के जरिए सरकार और मौजूदा राजनीतिक व्यवस्था को जवाबदेह बनाने का अवसर जरूर देता है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) की सरकार बनी रहेगी और तेजस्वी यादव विपक्ष के नेता रहेंगे, लेकिन मतदाता चुनाव के माध्यम से अपनी नाराजगी और अपेक्षाओं का संदेश दे सकते हैं।
प्रशांत किशोर बोले- यह सरकार बनाने का चुनाव नहीं
मुजफ्फरपुर में पत्रकारों से बातचीत करते हुए प्रशांत किशोर ने विधान परिषद चुनाव के महत्व को लेकर अपनी बात रखी।उन्होंने कहा कि इस चुनाव का उद्देश्य किसी सरकार को बनाना या गिराना नहीं है। प्रदेश में एनडीए की सरकार है और इस चुनाव के बाद भी वही सरकार रहेगी।इसी तरह तेजस्वी यादव विपक्ष के नेता हैं और उनके पद पर भी इस चुनाव का सीधा प्रभाव नहीं पड़ेगा।प्रशांत किशोर ने कहा कि मतदाताओं के पास ऐसा अवसर है, जब वे अपने वोट के जरिए सत्ता में बैठे लोगों को जवाबदेह बना सकते हैं।उनके मुताबिक, लोकतंत्र में चुनाव केवल सरकार बदलने का माध्यम नहीं, बल्कि जनप्रतिनिधियों के कामकाज का आकलन करने का अवसर भी होता है।
शिक्षकों और स्नातकों के मुद्दों को उठाया
जन सुराज पार्टी इस बार विधान परिषद के शिक्षक और स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों में सक्रिय रूप से चुनाव लड़ रही है।प्रशांत किशोर ने शिक्षकों की वेतन संबंधी मांगों, शिक्षा व्यवस्था और युवाओं के रोजगार के मुद्दों को प्रमुखता से उठाया है।उन्होंने कहा कि लंबे समय से शिक्षकों की कई मांगें लंबित हैं, लेकिन विभिन्न सरकारों ने उनका स्थायी समाधान नहीं किया।किशोर ने तिरहुत क्षेत्र में चुनाव प्रचार के दौरान शिक्षकों को सातवां वेतनमान दिलाने की दिशा में प्रयास करने का आश्वासन भी दिया था।उन्होंने कहा कि शिक्षकों की समस्याओं का समाधान और युवाओं के लिए रोजगार के अवसर उपलब्ध कराना जन सुराज की प्राथमिकताओं में शामिल है।
आठ विधान परिषद सीटों पर जन सुराज की तैयारी
बिहार विधान परिषद चुनाव में जन सुराज पार्टी ने आठ सीटों पर उम्मीदवार उतारने की घोषणा की है।इनमें शिक्षक और स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों की सीटें शामिल हैं। पार्टी ने विभिन्न क्षेत्रों में प्रचार अभियान चलाकर मतदाताओं तक पहुंचने का प्रयास किया है।प्रशांत किशोर ने कहा कि जन सुराज केवल पारंपरिक राजनीतिक मुद्दों के आधार पर चुनाव नहीं लड़ना चाहती, बल्कि शिक्षा, रोजगार और सरकारी व्यवस्था में सुधार को लेकर जनता के बीच जाना चाहती है।उन्होंने मतदाताओं से उम्मीदवारों के कामकाज, योग्यता और अपने क्षेत्र की समस्याओं को ध्यान में रखकर मतदान करने की अपील की।
एनडीए और महागठबंधन पर साधा निशाना
प्रशांत किशोर ने बिहार की मौजूदा राजनीतिक व्यवस्था को लेकर सत्तारूढ़ एनडीए और विपक्षी महागठबंधन, दोनों की आलोचना की।उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदेश में लंबे समय से सत्ता संभालने वाले दल शिक्षकों और बेरोजगार युवाओं की अपेक्षाओं को पूरा नहीं कर पाए हैं।किशोर ने कहा कि मतदाताओं को यह समझना चाहिए कि विधान परिषद चुनाव में उनका वोट स्थानीय समस्याओं और नीतिगत मुद्दों पर राजनीतिक दलों को संदेश देने का माध्यम बन सकता है।उन्होंने दावा किया कि जन सुराज की जीत से स्थापित राजनीतिक दलों पर जनता की मांगों को गंभीरता से लेने का दबाव बढ़ेगा।हालांकि, चुनाव में किसी दल की वास्तविक सफलता मतदान और मतगणना के बाद ही स्पष्ट होगी।
शिक्षक और स्नातक सीटों पर मुकाबला तेज
बिहार विधान परिषद की आठ सीटों पर चुनाव प्रचार अपने अंतिम चरण में पहुंच गया है।इनमें पटना सहित विभिन्न शिक्षक और स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों की सीटें शामिल हैं।इन चुनावों में एनडीए, महागठबंधन और जन सुराज के प्रत्याशी मैदान में हैं। सभी दल अपने-अपने उम्मीदवारों के समर्थन में प्रचार कर रहे हैं।चुनाव को लेकर शिक्षक संगठनों, स्नातक मतदाताओं और राजनीतिक कार्यकर्ताओं के बीच भी गतिविधियां बढ़ी हैं।विधान परिषद चुनाव से क्यों नहीं बदलेगी सरकार?बिहार में विधान परिषद राज्य विधानमंडल का उच्च सदन है। इसके सदस्य विभिन्न निर्वाचन क्षेत्रों और प्रक्रियाओं के माध्यम से चुने जाते हैं।विधान परिषद चुनाव का परिणाम राज्य की विधानसभा में सरकार के बहुमत को सीधे प्रभावित नहीं करता।यही कारण है कि प्रशांत किशोर ने स्पष्ट किया कि इन चुनावों को सरकार बनाने या गिराने की प्रक्रिया के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।हालांकि, विधान परिषद में अलग-अलग दलों की सदस्य संख्या और राजनीतिक प्रभाव पर चुनाव परिणामों का असर पड़ सकता है।
अब मतदाताओं के फैसले पर नजर
आगामी विधान परिषद चुनाव में शिक्षा, रोजगार, वेतनमान और सरकारी जवाबदेही जैसे मुद्दे चर्चा के केंद्र में हैं।जन सुराज पार्टी इन मुद्दों के आधार पर स्थापित दलों को चुनौती देने की कोशिश कर रही है।प्रशांत किशोर का कहना है कि मतदाता अपने अधिकार का इस्तेमाल करके सरकार को अपनी समस्याओं के समाधान के लिए जवाबदेह बना सकते हैं।अब देखना होगा कि शिक्षक और स्नातक मतदाता किन मुद्दों को प्राथमिकता देते हैं और विधान परिषद चुनाव में किस दल को कितना समर्थन मिलता है।
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