Bihar बिहार: जन सुराज पार्टी के संस्थापक Prashant Kishor ने एक बार फिर राज्य की राजनीतिक व्यवस्था और जनादेश को लेकर तीखा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि मौजूदा जनमत को लोकप्रियता का बहुमत नहीं कहा जा सकता, बल्कि यह सरकारी तंत्र के दुरुपयोग के आधार पर बना बहुमत है। प्रशांत किशोर ने कहा कि यदि यह सच में लोकप्रियता का बहुमत होता, तो 202 विधायकों के समर्थन से चुना गया कोई मुख्यमंत्री अपना पद छोड़कर राज्यसभा में नहीं जाता। उनके अनुसार, यह स्थिति लोकतांत्रिक जनसमर्थन से अधिक सत्ता के ढांचे और प्रशासनिक तंत्र के प्रभाव को दर्शाती है।
उन्होंने दावा किया कि बिहार की राजनीति में जनता की वास्तविक इच्छाओं और चुनावी परिणामों के बीच अंतर दिखाई देता है। प्रशांत किशोर ने कहा कि जन सुराज का उद्देश्य इसी व्यवस्था को चुनौती देना और जनता को एक वैकल्पिक राजनीतिक सोच देना है। उन्होंने यह भी कहा कि राज्य में विकास, रोजगार और शिक्षा जैसे मुद्दों पर वास्तविक चर्चा नहीं हो रही है, जबकि राजनीतिक दल केवल सत्ता और संख्या बल की राजनीति में उलझे हुए हैं। उनके अनुसार, जब तक जनता को मजबूत और पारदर्शी विकल्प नहीं मिलेगा, तब तक लोकतंत्र का वास्तविक उद्देश्य पूरा नहीं हो सकता।
प्रशांत किशोर ने आगे कहा कि उनकी पार्टी जन सुराज का लक्ष्य जनता के बीच जाकर एक ऐसी राजनीतिक व्यवस्था तैयार करना है, जिसमें जवाबदेही और पारदर्शिता सबसे ऊपर हो। इस बयान के बाद बिहार की राजनीति में एक बार फिर बहस तेज हो गई है, जहां सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि ऐसे बयानों से राज्य में आगामी चुनावी माहौल और अधिक गरमा सकता है।