पटना के खिलाड़ियों को मिलेंगी बेहतर सुविधाएं, पाटलिपुत्र खेल परिसर होगा अपग्रेड
पटना: कंकड़बाग स्थित पाटलिपुत्र खेल परिसर के एथलेटिक्स ट्रैक और प्राकृतिक घास के मैदान का व्यापक नवीनीकरण किया जाएगा। खेल विभाग और बिहार राज्य खेल प्राधिकरण की इस पहल के तहत 400 मीटर लंबे, आठ लेन वाले सिंथेटिक रनिंग ट्रैक का पुनर्निर्माण प्रस्तावित है। मैदान में बरमूडा घास लगाने के साथ जलनिकासी और सिंचाई की आधुनिक व्यवस्था विकसित की जाएगी। इसका उद्देश्य खिलाड़ियों को बेहतर अभ्यास सुविधाएं उपलब्ध कराना और परिसर को अंतरराष्ट्रीय तकनीकी मानकों के अनुरूप तैयार करना है।
बिहार राज्य खेल प्राधिकरण के महानिदेशक रवींद्रण शंकरण के अनुसार, ट्रैक को वर्ल्ड एथलेटिक्स की तकनीकी आवश्यकताओं के अनुरूप विकसित करने की योजना है। लक्ष्य वर्ल्ड एथलेटिक्स का क्लास-1 प्रमाणन प्राप्त करना है। प्रस्तावित व्यवस्था में पुरानी सतह का नवीनीकरण, डामर की नई परत और फुल पीयूआर तथा फुल ईपीडीएम सिंथेटिक ट्रैक प्रणाली शामिल है। यह प्रमाणन हासिल करने का लक्ष्य है; परिसर को अभी यह प्रमाणपत्र मिल जाने की पुष्टि नहीं की गई है।
क्लास-1 प्रमाणन के लिए केवल किसी स्वीकृत सिंथेटिक सामग्री का इस्तेमाल पर्याप्त नहीं होता। वर्ल्ड एथलेटिक्स की प्रमाणन प्रक्रिया में सुविधा के माप और मान्यता प्राप्त प्रयोगशाला द्वारा मौके पर सिंथेटिक सतह के परीक्षण की रिपोर्ट महत्वपूर्ण होती है। इस लिहाज से निर्माण की गुणवत्ता, ट्रैक का सही माप और परीक्षण की प्रक्रिया परियोजना के अहम चरण होंगे। निर्माण पूरा होने और आवश्यक मूल्यांकन के बाद ही प्रमाणन की स्थिति स्पष्ट होगी।
परिसर के मैदान में जलजमाव से निपटने के लिए भूमिगत ड्रेनेज पाइप बिछाने की योजना है। बजरी की जलनिकासी परत के ऊपर रेत आधारित रूटजोन तैयार करके बरमूडा घास लगाई जाएगी। सिंचाई के लिए पॉप-अप स्प्रिंकलर प्रणाली प्रस्तावित है, जिससे मैदान में पानी का समान वितरण किया जा सके। ट्रैक के आसपास नई ड्रेनेज लाइन और कलेक्शन चैंबर बनाने का भी उल्लेख है।
खेल मैदान में घास की गुणवत्ता उसके नीचे तैयार की गई जमीन और जलनिकासी व्यवस्था पर भी निर्भर करती है। बारिश का पानी लंबे समय तक जमा रहने से अभ्यास और मैदान के रखरखाव में परेशानी हो सकती है। नॉर्थ कैरोलाइना स्टेट यूनिवर्सिटी के खेल मैदान संबंधी मार्गदर्शन के अनुसार, पर्याप्त ड्रेनेज खेल में बारिश के कारण आने वाली बाधाएं कम करने के साथ मैदान की उपयोग अवधि बढ़ाने में भी मदद करता है। इसलिए प्रस्तावित भूमिगत व्यवस्था नवीनीकरण का महत्वपूर्ण हिस्सा होगी।
बरमूडा घास का इस्तेमाल खेल मैदानों में उसकी बढ़वार और इस्तेमाल से होने वाले नुकसान के बाद दोबारा विकसित होने की क्षमता के कारण किया जाता है। नॉर्थ कैरोलाइना स्टेट यूनिवर्सिटी की तकनीकी जानकारी के मुताबिक, यह घास अपेक्षाकृत जल्दी स्थापित होती है और खिलाड़ियों की आवाजाही तथा खेल से पड़ने वाला दबाव सह सकती है। हालांकि, अच्छी खेल सतह बनाए रखने के लिए नियमित रखरखाव जरूरी होता है। घास लगा देने भर से मैदान लंबे समय तक एक जैसी स्थिति में नहीं रहता।
सिंचाई भी जरूरत के अनुसार नियंत्रित करनी होती है। मैदान के अलग-अलग हिस्सों में पानी का असमान वितरण कहीं सूखापन और कहीं अधिक नमी की समस्या पैदा कर सकता है। मिसौरी विश्वविद्यालय की एक्सटेंशन सेवा बरमूडा घास वाले खेल मैदानों के लिए जलनिकासी, सिंचाई और इस्तेमाल के प्रबंधन को महत्वपूर्ण मानती है। पाटलिपुत्र परिसर में प्रस्तावित स्प्रिंकलर और ड्रेनेज व्यवस्था का लाभ उनके सही संचालन तथा रखरखाव से जुड़ा रहेगा।
पाटलिपुत्र खेल परिसर एथलेटिक्स आयोजनों के लिहाज से भी महत्वपूर्ण है। भारतीय एथलेटिक्स महासंघ ने सितंबर में जारी सूचना में 37वीं पूर्वी क्षेत्र जूनियर एथलेटिक्स चैंपियनशिप 2026 के लिए इसी परिसर को आयोजन स्थल बताया था। प्रतियोगिता की घोषित तारीखें 22 से 24 सितंबर थीं। कार्यक्रम में अंडर-14, अंडर-16, अंडर-18 और अंडर-20 आयु वर्गों के ट्रैक एवं फील्ड मुकाबलों, संयुक्त स्पर्धाओं और रिले को शामिल किया गया था।
इस तरह यहां सुविधाओं में सुधार का महत्व रोजाना अभ्यास करने वाले खिलाड़ियों के साथ आयु वर्ग की प्रतियोगिताओं में भाग लेने वाले एथलीटों के लिए भी है। बेहतर ट्रैक और व्यवस्थित मैदान उन्हें तैयारी के लिए उपयोगी आधार दे सकते हैं। हालांकि, सुविधाओं का वास्तविक लाभ प्रशिक्षण कार्यक्रम, प्रशिक्षकों की उपलब्धता और नियमित देखरेख के साथ बढ़ेगा। नए निर्माण के बाद सतह तथा मैदान की स्थिति बनाए रखना भी उतना ही आवश्यक रहेगा।
फिलहाल सामने आई योजना में काम पूरा करने की निश्चित तारीख और अंतिम स्वीकृत लागत का स्पष्ट विवरण नहीं है। इसलिए परिसर कब खिलाड़ियों के लिए नए रूप में उपलब्ध होगा, यह आगे की आधिकारिक जानकारी से स्पष्ट होगा। परियोजना का प्रमुख लक्ष्य आठ लेन वाले ट्रैक का पुनर्निर्माण, प्राकृतिक मैदान में सुधार और जलनिकासी-सिंचाई व्यवस्था को मजबूत करना है। वर्ल्ड एथलेटिक्स प्रमाणन की दिशा में प्रगति भी निर्माण और परीक्षण के बाद सामने आएगी।