रणनीतिकार से नेता बनने की राह पर PK

Update: 2026-07-13 15:02 GMT

पटना। चुनावी रणनीतिकार के रूप में देशभर में पहचान बना चुके प्रशांत किशोर अब सीधे चुनावी राजनीति में उतर गए हैं। उन्होंने पहली बार किसी चुनाव में उम्मीदवार के तौर पर अपनी किस्मत आजमाने का फैसला किया है। सोमवार को प्रशांत किशोर ने बिहार के बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव के लिए जन सुराज पार्टी के उम्मीदवार के रूप में नामांकन दाखिल किया। नामांकन के दौरान उनके समर्थकों की बड़ी संख्या में भीड़ जुटी और उन्होंने जीत का दावा भी किया।

प्रशांत किशोर लंबे समय तक चुनावी रणनीति बनाने का काम करते रहे हैं। उन्होंने देश के कई बड़े राजनीतिक दलों और नेताओं के चुनाव अभियानों को दिशा दी है। हालांकि, अब तक वह खुद चुनाव लड़ने से इनकार करते रहे थे। लेकिन जन सुराज अभियान को राजनीतिक दल का रूप देने के बाद उन्होंने सक्रिय राजनीति में उतरने का फैसला किया है।

नामांकन से पहले प्रशांत किशोर ने क्षेत्र में जनसंपर्क अभियान शुरू कर दिया था। उनकी रणनीति मतदाताओं तक सीधे पहुंचने और घर-घर जाकर संवाद करने की है। वह लगातार लोगों से मुलाकात कर अपनी पार्टी की नीतियों और योजनाओं के बारे में जानकारी दे रहे हैं।

बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव को प्रशांत किशोर और उनकी पार्टी के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। यह चुनाव उनकी राजनीतिक पकड़ और जन सुराज की जमीन को परखने का पहला बड़ा अवसर होगा। अब तक प्रशांत किशोर पर्दे के पीछे रहकर चुनावी रणनीति तैयार करते थे, लेकिन इस बार वह खुद जनता के बीच जाकर समर्थन मांग रहे हैं।

यह उपचुनाव भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन के विधानसभा पद से इस्तीफा देने के कारण हो रहा है। बांकीपुर सीट पर पहले भाजपा का दबदबा रहा है, ऐसे में प्रशांत किशोर के सामने मजबूत राजनीतिक चुनौती होगी। वह इस सीट पर अपनी अलग पहचान बनाने और नए राजनीतिक विकल्प के रूप में खुद को स्थापित करने की कोशिश कर रहे हैं।

प्रशांत किशोर ने नामांकन के बाद समर्थकों को संबोधित करते हुए भरोसा जताया कि जनता बदलाव चाहती है। उन्होंने कहा कि जन सुराज का उद्देश्य बेहतर शासन व्यवस्था और जनता से जुड़े मुद्दों को राजनीति के केंद्र में लाना है। उनके समर्थकों का कहना है कि उनकी छवि एक रणनीतिकार के रूप में रही है और अब वह उसी अनुभव को चुनावी राजनीति में इस्तेमाल करेंगे।

राजनीतिक विशेषज्ञों के अनुसार, प्रशांत किशोर का यह कदम उनके लिए बड़ा जोखिम और अवसर दोनों है। अब तक उनकी पहचान दूसरों के चुनाव जिताने वाले रणनीतिकार की रही है, लेकिन खुद चुनाव जीतना उनके राजनीतिक भविष्य को तय करेगा। अगर वह सफल होते हैं तो बिहार की राजनीति में उनका कद तेजी से बढ़ सकता है।

वहीं, चुनावी राजनीति में उतरने के बाद उनकी रणनीति बनाने वाली भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं। माना जा रहा है कि बांकीपुर उपचुनाव का परिणाम यह तय करेगा कि प्रशांत किशोर केवल रणनीतिकार के रूप में प्रभावी हैं या फिर एक जननेता के तौर पर भी अपनी जगह बना सकते हैं।

फिलहाल प्रशांत किशोर पूरी ताकत के साथ चुनाव प्रचार में जुट गए हैं। बांकीपुर का मुकाबला उनके लिए सिर्फ एक चुनाव नहीं, बल्कि उनकी राजनीतिक यात्रा की पहली बड़ी परीक्षा माना जा रहा है।

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