पटना। बिहार विधान परिषद की पटना स्नातक सीट पर जनता दल यूनाइटेड (जदयू) के उम्मीदवार नीरज कुमार ने चुनावी मुकाबले में जीत हासिल की है। बुधवार, 28 अक्टूबर 2026 को सामने आए नतीजों ने पार्टी के भीतर चल रही राजनीतिक खींचतान को एक बार फिर चर्चा में ला दिया है। इस चुनाव में नीरज कुमार के सामने केवल विपक्षी दलों की चुनौती नहीं थी, बल्कि जदयू से निष्कासित मोकामा विधायक अनंत सिंह का खुला विरोध भी था। अनंत सिंह ने पार्टी उम्मीदवार के बजाय जन सुराज के डॉ. अनुज कुमार सिंह का समर्थन किया था। इसके बावजूद अनुज तीसरे स्थान पर रहे, जबकि राष्ट्रीय जनता दल के उम्मीदवार दूसरे स्थान पर रहे। जदयू के लिए यह मुकाबला इसलिए भी महत्वपूर्ण था क्योंकि पार्टी के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय कुमार झा और मंत्री निशांत कुमार ने चुनाव प्रचार में सक्रिय भूमिका निभाई थी। हालांकि, मतगणना के शुरुआती समाचारों में औपचारिक परिणाम घोषणा लंबित बताई गई थी, लेकिन प्रमुख उम्मीदवारों ने नीरज कुमार की जीत स्वीकार कर ली।
अनंत सिंह के विरोध के बावजूद नीरज कुमार को सफलता
पटना स्नातक निर्वाचन क्षेत्र का चुनाव इस बार जदयू के लिए सामान्य मुकाबले से अलग रहा।
मोकामा के विधायक अनंत सिंह ने अपनी पार्टी के उम्मीदवार नीरज कुमार का समर्थन करने के बजाय जन सुराज के डॉ. अनुज कुमार सिंह के पक्ष में प्रचार किया।
चुनाव के दौरान दोनों नेताओं के बीच राजनीतिक बयानबाजी भी देखने को मिली।
अनंत सिंह के खुले विरोध के कारण जदयू के भीतर अनुशासन और आपसी मतभेद का मुद्दा सामने आया।
लेकिन मतगणना के बाद नीरज कुमार को बढ़त और जीत मिलने की खबर ने चुनावी समीकरण बदल दिए।
राजद उम्मीदवार दूसरे स्थान पर रहे, जबकि अनंत सिंह समर्थित जन सुराज उम्मीदवार अनुज कुमार सिंह तीसरे स्थान पर रहे।
चौथी बार विधान परिषद पहुंचे नीरज कुमार
नीरज कुमार बिहार की राजनीति में जदयू के प्रमुख प्रवक्ताओं में गिने जाते हैं।
वह लंबे समय से पटना स्नातक निर्वाचन क्षेत्र का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं।
इस बार की जीत उनके लिए विशेष महत्व रखती है, क्योंकि चुनाव प्रचार के दौरान उन्हें अपनी ही पार्टी से जुड़े एक प्रभावशाली नेता के विरोध का सामना करना पड़ा।
रिपोर्टों के अनुसार, नीरज कुमार ने इस जीत के साथ लगातार चौथी बार विधान परिषद की सदस्यता हासिल की है।
उन्होंने अपनी सफलता का श्रेय पार्टी कार्यकर्ताओं और सहयोगी दलों के समर्थन को दिया।
नीरज कुमार ने परिणाम सामने आने के बाद विरोधियों के बयानों का जवाब भी दिया।
संजय कुमार झा की प्रतिष्ठा से भी जुड़ा था चुनाव
पटना स्नातक सीट पर जदयू की जीत को पार्टी के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय कुमार झा की संगठनात्मक भूमिका के संदर्भ में भी देखा जा रहा है।
चुनाव के दौरान जदयू के वरिष्ठ नेताओं ने नीरज कुमार के पक्ष में प्रचार और संगठनात्मक समन्वय पर जोर दिया था।
इस चुनाव में पार्टी के सामने चुनौती अपने पारंपरिक समर्थन को बनाए रखने के साथ आंतरिक विरोध से निपटने की भी थी।
संजय कुमार झा की सक्रिय भूमिका के कारण चुनाव परिणाम को संगठन के भीतर महत्वपूर्ण राजनीतिक घटनाक्रम माना जा रहा है।
हालांकि, इस जीत से पार्टी के सभी आंतरिक मतभेद समाप्त हो गए हैं, ऐसा कहना अभी जल्दबाजी होगी।
निशांत कुमार की सक्रिय चुनावी भूमिका
इस चुनाव में बिहार के स्वास्थ्य मंत्री निशांत कुमार की भागीदारी भी चर्चा का विषय रही।
यह पहला चुनाव बताया जा रहा है, जिसमें निशांत ने प्रचार अभियान में सक्रिय भूमिका निभाई।
उन्होंने जदयू उम्मीदवार नीरज कुमार के समर्थन में प्रचार किया और मतदाताओं से समर्थन मांगा।
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, निशांत की भागीदारी को पार्टी की नई पीढ़ी के नेतृत्व की सार्वजनिक सक्रियता के रूप में देखा जा सकता है।
नीरज कुमार ने जीत के बाद मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, निशांत कुमार और एनडीए के सहयोगी दलों के प्रति आभार व्यक्त किया।
हालांकि, चुनाव परिणाम किसी एक नेता के प्रचार का प्रभाव अलग से स्थापित नहीं करता।
ललन सिंह की समझाइश के बाद भी नहीं माने अनंत सिंह
पटना स्नातक सीट पर उम्मीदवारों के बीच मुकाबले के साथ जदयू के भीतर मतभेद भी सामने आए।
केंद्रीय मंत्री राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह ने अनंत सिंह और नीरज कुमार के बीच विवाद सुलझाने का प्रयास किया था।
लेकिन अनंत सिंह अपने रुख पर कायम रहे और जन सुराज उम्मीदवार अनुज सिंह के लिए प्रचार करते रहे।
राजनीतिक रिपोर्टों के अनुसार, अनंत सिंह की नाराजगी का संबंध पूर्व विधानसभा चुनाव के दौरान नीरज कुमार की भूमिका से भी जोड़ा गया।
हालांकि, दोनों नेताओं के बीच मतभेदों को लेकर अलग-अलग दावे सामने आए हैं।
जदयू ने अनंत सिंह और नीलम देवी को किया निष्कासित
पार्टी उम्मीदवार के खिलाफ प्रचार करना अनंत सिंह के लिए अनुशासनात्मक कार्रवाई का कारण बना।
24 अक्टूबर 2026 को जदयू ने अनंत सिंह को छह वर्ष के लिए पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से निष्कासित कर दिया।
उनकी पत्नी और पूर्व विधायक नीलम देवी को भी पार्टी से निष्कासित किया गया।
जदयू प्रदेश अध्यक्ष उमेश सिंह कुशवाहा की ओर से जारी पत्र में पार्टी विरोधी गतिविधियों और नेतृत्व के निर्देशों का उल्लंघन करने का आरोप लगाया गया था।
पार्टी स्तर पर अनंत सिंह की विधानसभा सदस्यता समाप्त कराने के लिए कार्रवाई की संभावनाओं पर भी चर्चा हुई।
हालांकि, पार्टी से निष्कासन अपने आप विधानसभा सदस्यता समाप्त होने के बराबर नहीं है।
राजद दूसरे, जन सुराज तीसरे स्थान पर
पटना स्नातक सीट के चुनाव में जदयू उम्मीदवार नीरज कुमार के सामने कई दलों के प्रत्याशी मैदान में थे।
राष्ट्रीय जनता दल के दिलीप कुमार दूसरे स्थान पर रहे।
जन सुराज के डॉ. अनुज कुमार सिंह तीसरे स्थान पर रहे, जबकि कांग्रेस के डॉ. असदुल्लाह खान चौथे स्थान पर रहे।
इस चुनाव में स्नातक मतदाताओं ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया था।
विधान परिषद की स्नातक निर्वाचन सीटों पर मतदान और मतगणना की प्रक्रिया विधानसभा चुनावों से अलग होती है।
इसमें निर्धारित निर्वाचन प्रणाली के तहत वरीयता के आधार पर मतों की गणना की जाती है।
उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, नीरज कुमार ने जीत के लिए आवश्यक मतों का कोटा हासिल किया।
अनंत सिंह ने स्वीकार की हार
चुनाव परिणाम सामने आने के बाद अनंत सिंह ने सार्वजनिक रूप से स्वीकार किया कि उनके समर्थित उम्मीदवार को सफलता नहीं मिली।
उन्होंने कहा कि नीरज कुमार जीत गए और उनका पक्ष चुनाव हार गया।
अनंत सिंह ने यह भी स्पष्ट किया कि उन्हें पार्टी से कोई नाराजगी नहीं है।
हालांकि, नीरज कुमार के साथ उनका व्यक्तिगत राजनीतिक मतभेद बरकरार दिखाई दिया।
जदयू से निष्कासन के सवाल पर उन्होंने पार्टी नेतृत्व के निर्णय को उसका अधिकार बताया।
उनकी प्रतिक्रिया के बाद यह स्पष्ट हुआ कि चुनाव समाप्त होने के बावजूद दोनों नेताओं के बीच मतभेद पूरी तरह खत्म नहीं हुए हैं।
जीत के बाद नीरज कुमार ने विरोधियों को दिया जवाब
पटना स्नातक सीट पर जीत की खबर सामने आने के बाद नीरज कुमार ने समर्थकों और पार्टी कार्यकर्ताओं का आभार जताया।
उन्होंने चुनाव अभियान के दौरान हुए विरोध को लेकर भी प्रतिक्रिया दी।
नीरज कुमार ने अपनी सफलता को संगठन और कार्यकर्ताओं के समर्थन से जोड़ते हुए कहा कि चुनावी राजनीति में मतदाताओं का निर्णय सर्वोपरि होता है।
उन्होंने अनंत सिंह के राजनीतिक बयानों पर भी पलटवार किया।
इससे संकेत मिलता है कि पटना स्नातक सीट पर चुनावी मुकाबले के बाद जदयू के भीतर व्यक्तिगत राजनीतिक टकराव का मुद्दा अभी बना हुआ है।
नालंदा में भी रहा दिलचस्प चुनावी मुकाबला
पटना स्नातक निर्वाचन क्षेत्र में नालंदा की राजनीतिक भूमिका भी चर्चा में रही।
राजद उम्मीदवार दिलीप कुमार का संबंध नालंदा क्षेत्र से है।
जदयू के लिए भी यह क्षेत्र महत्वपूर्ण रहा है, क्योंकि पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की राजनीति से नालंदा का लंबे समय से जुड़ाव रहा है।
चुनाव प्रचार के दौरान निशांत कुमार ने नालंदा में भी सक्रियता दिखाई।
रिपोर्टों के अनुसार, पिछली बार राजद उम्मीदवार को लगभग 12 हजार वोट मिले थे, जबकि इस बार यह संख्या 14 हजार से अधिक रही।
इससे संकेत मिलता है कि राजद ने भी अपना मत समर्थन बढ़ाया, हालांकि अंतिम परिणाम जदयू उम्मीदवार के पक्ष में रहा।
बिहार विधान परिषद चुनाव में अन्य दलों को भी मिली सफलता
पटना स्नातक सीट के अलावा बिहार विधान परिषद की अन्य सीटों पर भी महत्वपूर्ण परिणाम सामने आए।
पटना शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में राजद के डॉ. संजीव कुमार ने भाजपा के नवल किशोर यादव को पराजित किया।
तिरहुत शिक्षक सीट पर भाजपा के नरेंद्र प्रसाद सिंह को सफलता मिली।
वहीं, दरभंगा शिक्षक सीट पर जन सुराज के सुरेश राय ने कांग्रेस के मदन मोहन झा को हराया।
इन परिणामों से स्पष्ट है कि अलग-अलग निर्वाचन क्षेत्रों में मतदाताओं ने अलग-अलग दलों और उम्मीदवारों को समर्थन दिया।
चुनाव जीतने के बाद जदयू के सामने नई चुनौती
पटना स्नातक सीट पर नीरज कुमार की जीत से जदयू को चुनावी सफलता मिली है।
लेकिन इस चुनाव के दौरान सामने आए आंतरिक मतभेद पार्टी संगठन के लिए अलग राजनीतिक चुनौती बने हुए हैं।
एक ओर जदयू के वरिष्ठ नेताओं और कार्यकर्ताओं ने नीरज कुमार के पक्ष में प्रचार किया, तो दूसरी ओर अनंत सिंह ने खुले तौर पर दूसरे दल के उम्मीदवार का समर्थन किया।
पार्टी ने उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई भी की।
अब यह देखना होगा कि जदयू नेतृत्व इस विवाद के बाद संगठनात्मक स्तर पर क्या कदम उठाता है।
फिलहाल पटना स्नातक सीट पर नीरज कुमार की जीत ने चुनावी मुकाबले का परिणाम स्पष्ट कर दिया है, लेकिन अनंत सिंह और जदयू नेतृत्व के बीच राजनीतिक संबंधों को लेकर आगे भी चर्चा जारी रह सकती है।