बिहार के पशुपालकों को बड़ी राहत, अब दूध बिक्री की राशि सीधे बैंक खाते में होगी ट्रांसफर
पटना। बिहार के दुग्ध उत्पादक सहकारी संघ से जुड़े पशुपालकों के लिए बड़ी राहत की खबर है। अब दूध बेचने के बाद उन्हें भुगतान के लिए लंबे समय तक इंतजार नहीं करना पड़ेगा। बिहार स्टेट मिल्क को-ऑपरेटिव फेडरेशन लिमिटेड (कॉम्फेड) ने ऐसी नई व्यवस्था तैयार की है, जिसके तहत दूध की बिक्री से मिलने वाली राशि सीधे दूध उत्पादकों के बैंक खाते में भेजी जाएगी।
नई व्यवस्था लागू होने के बाद दूध उत्पादकों को भुगतान प्रक्रिया में अधिक पारदर्शिता और तेजी देखने को मिलेगी। अभी तक कई स्तरों से होकर राशि पहुंचने में समय लगता था, लेकिन अब सीधे बैंक खाते में भुगतान होने से पशुपालकों को फायदा मिलेगा।
सीधे खाते में पहुंचेगी दूध की कीमत
कॉम्फेड की नई व्यवस्था के अनुसार, अब दूध उत्पादकों को उनके द्वारा बेचे गए दूध की कीमत सीधे उनके बैंक खाते में भेजी जाएगी। इसके लिए प्राथमिक दुग्ध उत्पादक संघों को दूध विक्रेताओं की पूरी जानकारी उपलब्ध करानी होगी।
इस सूची में दूध विक्रेता का नाम, बैंक खाता संख्या और अन्य आवश्यक विवरण शामिल होंगे। इसके आधार पर कॉम्फेड से जुड़े आठों संघ सीधे संबंधित दूध उत्पादकों के खाते में भुगतान कर सकेंगे।
इस कदम का उद्देश्य भुगतान प्रक्रिया को आसान, तेज और पारदर्शी बनाना है।
आठ संघों में लागू होगी व्यवस्था
कॉम्फेड के अंतर्गत आने वाले आठ दुग्ध संघों के माध्यम से यह नई व्यवस्था शुरू की जाएगी। पहले भुगतान राशि प्राथमिक स्तर के दूध उत्पादक संघों तक पहुंचती थी, जिसके बाद उसे संबंधित पशुपालकों तक भेजा जाता था।
इस प्रक्रिया में कई बार समय लग जाता था। अब बीच के स्तर को कम करते हुए सीधे दूध उत्पादकों को भुगतान करने की तैयारी की गई है।
कॉम्फेड का मानना है कि इससे पशुपालकों को समय पर पैसा मिलेगा और उन्हें आर्थिक रूप से मजबूती मिलेगी।
पशुपालकों को होगा सीधा लाभ
बिहार में बड़ी संख्या में किसान और पशुपालक दूध उत्पादन से जुड़े हुए हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में दूध बिक्री कई परिवारों की आय का प्रमुख स्रोत है।
समय पर भुगतान मिलने से पशुपालकों को पशुओं के चारे, दवा और अन्य जरूरतों को पूरा करने में आसानी होगी। इसके अलावा वे अपने व्यवसाय को बेहतर तरीके से संचालित कर सकेंगे।
नई व्यवस्था से छोटे दूध उत्पादकों को सबसे ज्यादा फायदा मिलने की उम्मीद है।
भुगतान प्रक्रिया में आएगी पारदर्शिता
कॉम्फेड की ओर से शुरू की जा रही यह व्यवस्था डिजिटल भुगतान प्रणाली को बढ़ावा देने की दिशा में भी एक कदम है। सीधे बैंक खाते में राशि जाने से भुगतान में देरी और गड़बड़ी की संभावनाएं कम होंगी।
दूध उत्पादकों को यह भी स्पष्ट जानकारी मिल सकेगी कि उन्हें कितनी राशि और किस समय प्राप्त हुई है।
इससे सहकारी व्यवस्था में विश्वास और मजबूत होने की उम्मीद है।
दूध उत्पादक संघों को देनी होगी पूरी जानकारी
नई व्यवस्था को लागू करने के लिए प्राथमिक दुग्ध उत्पादक संघों की भूमिका भी महत्वपूर्ण होगी। उन्हें अपने क्षेत्र के सभी दूध विक्रेताओं की सूची तैयार कर संबंधित आठों संघों को उपलब्ध करानी होगी।
सूची में दूध विक्रेताओं के बैंक खाते की सही जानकारी होना जरूरी होगा, ताकि भुगतान में किसी तरह की परेशानी न आए।
कॉम्फेड ने इस प्रक्रिया की तैयारी लगभग पूरी कर ली है और जल्द ही इसे लागू करने की दिशा में कदम बढ़ाए जाएंगे।
डिजिटल व्यवस्था को मिल रहा बढ़ावा
राज्य सरकार और सहकारी संस्थाएं लगातार डिजिटल माध्यम से भुगतान व्यवस्था को मजबूत करने पर जोर दे रही हैं। दूध उत्पादकों को सीधे बैंक खाते में भुगतान इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल मानी जा रही है।
इससे न केवल समय की बचत होगी बल्कि किसानों और पशुपालकों को आर्थिक लेन-देन में अधिक सुविधा मिलेगी।
पशुपालन क्षेत्र को मिलेगा बढ़ावा
बिहार में पशुपालन ग्रामीण अर्थव्यवस्था का अहम हिस्सा है। दूध उत्पादन से जुड़े लोगों को बेहतर सुविधाएं मिलने से इस क्षेत्र को और बढ़ावा मिल सकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि समय पर भुगतान मिलने से पशुपालक अधिक उत्साह के साथ दूध उत्पादन में निवेश कर सकेंगे। इससे राज्य में दुग्ध उत्पादन बढ़ाने में भी मदद मिलेगी।
कॉम्फेड की पहल से बदलेगी व्यवस्था
कॉम्फेड की नई भुगतान व्यवस्था को दूध उत्पादकों के लिए महत्वपूर्ण बदलाव माना जा रहा है। अब पशुपालकों को दूध बेचने के बाद भुगतान के लिए लंबा इंतजार नहीं करना पड़ेगा।
सीधे बैंक खाते में राशि पहुंचने से जहां पारदर्शिता बढ़ेगी, वहीं पशुपालकों की आर्थिक स्थिति भी मजबूत होगी। आने वाले समय में यह व्यवस्था बिहार के दुग्ध उत्पादन क्षेत्र में सकारात्मक बदलाव ला सकती है।