पटना। बिहार में शराबबंदी कानून को सख्ती से लागू करने के लिए मद्य निषेध विभाग की ओर से लगातार कार्रवाई की जा रही है। इसी क्रम में राजधानी पटना में विभाग की टीम ने शराब तस्करी के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए भारी मात्रा में विदेशी शराब बरामद की है। खगौल थाना क्षेत्र के महुआबाग इलाके में एक किराये के कमरे पर छापेमारी के दौरान कुल 733.090 लीटर विदेशी शराब जब्त की गई। बरामद शराब 2,497 बोतलों में रखी हुई थी, जिसकी अनुमानित कीमत करीब 8 लाख 80 हजार रुपये बताई जा रही है। इतनी बड़ी मात्रा में शराब मिलने के बाद विभाग ने मामले की जांच शुरू कर दी है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, मद्य निषेध विभाग को गुप्त सूचना मिली थी कि खगौल थाना क्षेत्र के महुआबाग में एक किराये के कमरे में अवैध रूप से विदेशी शराब का भंडारण किया गया है। सूचना को गंभीरता से लेते हुए विभाग ने तत्काल कार्रवाई की योजना तैयार की। इसके बाद निरीक्षक मद्य निषेध दीपक महतो के नेतृत्व में एक विशेष टीम गठित की गई।
टीम ने एक नवंबर की रात करीब 12 बजकर 50 मिनट पर महुआबाग इलाके में छापेमारी की। इस दौरान रंजन कुमार के किराये के कमरे की तलाशी ली गई। तलाशी के दौरान वहां बड़ी मात्रा में विदेशी शराब रखी मिली। शराब की इतनी बड़ी खेप देखकर विभागीय टीम ने सभी बोतलों की गिनती और मात्रा का मिलान किया। इसके बाद पूरी खेप को जब्त कर लिया गया।
विभागीय जानकारी के अनुसार, छापेमारी में कुल 2,497 बोतल विदेशी शराब बरामद हुई। इन बोतलों में कुल 733.090 लीटर शराब भरी हुई थी। जब्त शराब की अनुमानित बाजार कीमत करीब 8.80 लाख रुपये आंकी गई है। यह बरामदगी राजधानी पटना में अवैध शराब के भंडारण और संभावित आपूर्ति को लेकर महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
बताया जा रहा है कि जिस कमरे से शराब बरामद की गई, वह रंजन कुमार के किराये पर था। हालांकि, कमरे में शराब किसने रखी थी, इसकी आपूर्ति कहां से हुई थी और इसे किन लोगों तक पहुंचाया जाना था, इन सवालों के जवाब जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेंगे। फिलहाल उपलब्ध जानकारी में किसी आरोपी की गिरफ्तारी की पुष्टि नहीं की गई है।
मद्य निषेध विभाग की इस कार्रवाई से शराब तस्करी से जुड़े लोगों में हलचल मचने की संभावना है। बिहार में पूर्ण शराबबंदी लागू होने के बावजूद अलग-अलग इलाकों से अवैध शराब की बरामदगी के मामले सामने आते रहते हैं। ऐसे में विभाग लगातार गुप्त सूचनाओं के आधार पर छापेमारी कर अवैध कारोबार पर अंकुश लगाने का प्रयास कर रहा है।
इस मामले में सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि शराब की इतनी बड़ी खेप किसी बड़े गोदाम के बजाय एक किराये के कमरे में रखी हुई थी। इससे यह सवाल उठता है कि क्या आवासीय इलाकों में किराये के मकानों और कमरों का इस्तेमाल अवैध शराब के भंडारण के लिए किया जा रहा है। हालांकि, इस विशेष मामले में किसी संगठित गिरोह की भूमिका की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है।
जांच के दौरान यह पता लगाना महत्वपूर्ण होगा कि बरामद शराब किस स्थान से लाई गई थी। इसके अलावा शराब की बोतलों पर मौजूद लेबल, बैच नंबर और अन्य विवरण भी संभावित आपूर्ति स्रोत की पहचान करने में मददगार हो सकते हैं। संबंधित अधिकारियों की जांच से ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि इस खेप के पीछे कितने लोग शामिल थे।
बिहार में अप्रैल 2016 से शराबबंदी लागू है। राज्य में शराब के निर्माण, बिक्री, भंडारण, परिवहन और सेवन को लेकर बिहार मद्य निषेध एवं उत्पाद अधिनियम के तहत प्रतिबंध और दंडात्मक प्रावधान लागू हैं। कानून के उल्लंघन की स्थिति में संबंधित धाराओं के अनुसार कार्रवाई की जाती है।
शराबबंदी कानून के बावजूद अवैध शराब की तस्करी राज्य की कानून-व्यवस्था और प्रशासन के लिए चुनौती बनी हुई है। शराब की अवैध आपूर्ति रोकने के लिए पुलिस और मद्य निषेध विभाग समय-समय पर विशेष अभियान चलाते हैं। सीमावर्ती इलाकों में वाहनों की जांच के साथ संदिग्ध स्थानों पर छापेमारी भी की जाती है।
पटना जैसे बड़े शहर में शराब की इतनी बड़ी खेप बरामद होना इस बात की ओर ध्यान आकर्षित करता है कि अवैध कारोबार पर निगरानी बनाए रखना कितना जरूरी है। शहर के रिहायशी इलाकों में किराये के कमरों का उपयोग किस उद्देश्य से किया जा रहा है, इसकी जानकारी जुटाना भी जांच एजेंसियों के लिए महत्वपूर्ण हो सकता है।
हालांकि, किसी मकान मालिक या किरायेदार की जिम्मेदारी तय करने से पहले यह स्पष्ट होना जरूरी है कि उसे अवैध गतिविधि की जानकारी थी या नहीं। केवल किसी परिसर से शराब बरामद होने के आधार पर सभी संबंधित व्यक्तियों की संलिप्तता मान लेना उचित नहीं होगा। इस संबंध में जांच और साक्ष्यों के आधार पर ही आगे की कानूनी कार्रवाई की जानी चाहिए।
मद्य निषेध विभाग की टीम ने इस मामले में गुप्त सूचना के आधार पर त्वरित कार्रवाई
की। निरीक्षक दीपक महतो के नेतृत्व में हुई छापेमारी के दौरान शराब की बड़ी खेप बरामद होने से संभावित अवैध आपूर्ति को रोकने में सफलता मिली है।
अब जांच का मुख्य विषय यह होगा कि शराब की खेप कहां से लाई गई और इसका अंतिम ठिकाना क्या था। साथ ही यह भी पता लगाया जाना जरूरी होगा कि शराब को महुआबाग के कमरे में कब से रखा गया था और इस गतिविधि में अन्य लोगों की क्या भूमिका थी।
फिलहाल खगौल थाना क्षेत्र के महुआबाग में हुई इस कार्रवाई को मद्य निषेध विभाग की बड़ी सफलता माना जा रहा है। एक किराये के कमरे से 733.090 लीटर विदेशी शराब और 2,497 बोतलों की बरामदगी ने राजधानी में अवैध शराब के भंडारण को लेकर नए सवाल खड़े कर दिए हैं। विभागीय जांच पूरी होने के बाद मामले से जुड़े अन्य तथ्य सामने आने की उम्मीद है।
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