पटना। बिहार की राजधानी पटना में बुधवार, 28 अक्टूबर 2026 की शाम आग लगने की घटना से अफरातफरी मच गई। सचिवालय हॉल्ट के समीप स्थित यारपुर ब्रिज पर खंभे के सहारे लटक रहे केबल वायर में अचानक आग लग गई। देखते ही देखते आग केबल के अन्य हिस्सों तक फैलने लगी और जलते हुए तार नीचे रेलवे ट्रैक तथा ओवरहेड इलेक्ट्रिक वायर की ओर गिरने लगे। इस दौरान आग की चिंगारियां और जलते हुए टुकड़े नीचे गिरते दिखाई दिए। घटना के कारण रेल परिचालन प्रभावित हुआ। रेलवे ट्रैक के ऊपर इस तरह आग लगने से सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता पैदा हो गई।
प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, ब्रिज पर लगे केबल वायर में आग लगने के बाद जलते हुए तारों के रेलवे लाइन पर गिरने से ट्रेनों की आवाजाही बाधित हुई। हालांकि, आग लगने के वास्तविक कारण, प्रभावित ट्रेनों की संख्या और परिचालन बाधित रहने की अवधि के संबंध में आधिकारिक जानकारी की पुष्टि अभी नहीं हो सकी है।
सचिवालय हॉल्ट के पास यारपुर ब्रिज पर लगी आग
जानकारी के मुताबिक, घटना बुधवार शाम की है। पटना के सचिवालय हॉल्ट के समीप यारपुर ब्रिज पर एक खंभे के सहारे कई केबल वायर लटक रहे थे।इसी दौरान इनमें से एक केबल में अचानक आग लग गई। आग लगने के बाद तारों से लपटें उठने लगीं और कुछ ही देर में जलते हुए टुकड़े नीचे गिरने लगे।चिंताजनक बात यह रही कि जिस स्थान पर आग लगी, उसके ठीक नीचे रेलवे ट्रैक मौजूद है। ऐसे में जलते हुए केबल के हिस्से पटरी और ओवरहेड विद्युत तारों के संपर्क में आने लगे।रेलवे लाइन के ऊपर आग लगने की घटना सामान्य सड़क हादसे से अलग और अधिक संवेदनशील होती है, क्योंकि इससे रेलवे की विद्युत आपूर्ति तथा ट्रेनों की सुरक्षित आवाजाही प्रभावित हो सकती है।
रेलवे ट्रैक पर गिरने लगे आग के गोले
घटना के दौरान केबल वायर के जलते हुए हिस्से नीचे रेलवे ट्रैक की ओर गिर रहे थे।आग की चपेट में आए तारों से निकलने वाली चिंगारियों और जलते हुए टुकड़ों ने स्थिति को गंभीर बना दिया।रेलवे ट्रैक के ऊपर मौजूद ओवरहेड इलेक्ट्रिक वायर के पास इस तरह की आग विशेष रूप से खतरनाक हो सकती है।भारतीय रेलवे के विद्युतीकृत मार्गों पर ट्रेनों के संचालन के लिए ओवरहेड इलेक्ट्रिक उपकरणों का इस्तेमाल किया जाता है।ऐसे उपकरणों के पास बाहरी केबल में आग लगने या कोई वस्तु गिरने से विद्युत संबंधी खराबी और परिचालन संबंधी समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं।
आग लगने से ट्रेनों की आवाजाही प्रभावित
यारपुर ब्रिज पर केबल में आग लगने के कारण रेल परिचालन बाधित होने की जानकारी सामने आई है।रेलवे ट्रैक और ओवरहेड वायर के पास जलते हुए तार गिरने से ट्रेनों की सुरक्षित आवाजाही को लेकर चिंता बढ़ गई।ऐसी स्थिति में रेलवे को सबसे पहले यह सुनिश्चित करना होता है कि ट्रैक और विद्युत उपकरण सुरक्षित हैं या नहीं।रेलवे की तकनीकी जांच पूरी होने और खतरा समाप्त होने के बाद ही सामान्य परिचालन सुरक्षित तरीके से किया जा सकता है।हालांकि, इस घटना के कारण किन ट्रेनों को रोका गया, कितनी देर तक परिचालन बाधित रहा और कब व्यवस्था पूरी तरह सामान्य हुई, इसका पुष्ट विवरण उपलब्ध नहीं है।
ओवरहेड वायर के पास आग लगना क्यों खतरनाक?
रेलवे की ओवरहेड इलेक्ट्रिक लाइन ट्रेनों के संचालन का महत्वपूर्ण हिस्सा होती है।भारत में अधिकांश विद्युतीकृत मुख्य रेल मार्गों पर 25 हजार वोल्ट की एसी विद्युत प्रणाली का इस्तेमाल किया जाता है।इतने उच्च वोल्टेज वाले उपकरणों के आसपास आग लगना या तारों का गिरना गंभीर सुरक्षा जोखिम पैदा कर सकता है।यदि कोई बाहरी तार विद्युत लाइन के संपर्क में आ जाए, तो शॉर्ट सर्किट, चिंगारी या बिजली आपूर्ति बाधित होने जैसी समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं।इसके अलावा आग की चपेट में आने से केबल के इंसुलेशन और अन्य उपकरणों को नुकसान पहुंचने का खतरा रहता है।इसी कारण रेलवे ट्रैक के आसपास किसी भी प्रकार की आग या विद्युत संबंधी घटना को गंभीरता से लेना आवश्यक है।
आग लगने की वजह अभी स्पष्ट नहीं
सामान्य तौर पर बिजली के तारों में आग लगने के पीछे शॉर्ट सर्किट, क्षतिग्रस्त इंसुलेशन, ढीले कनेक्शन और अत्यधिक विद्युत भार जैसे कारण हो सकते हैं।हालांकि, इस घटना में किस प्रकार का केबल जल रहा था और उसमें आग कैसे लगी, यह जांच का विषय है।यह भी स्पष्ट होना जरूरी है कि केबल बिजली आपूर्ति से संबंधित था या किसी अन्य सेवा का था।तकनीकी जांच के बिना आग लगने के लिए किसी एक कारण को जिम्मेदार ठहराना उचित नहीं होगा।
पहले भी पटना में तारों में आग लगने से मची थी अफरातफरी
राजधानी पटना में इससे पहले भी पुलों पर लगे तारों में आग लगने की घटनाएं सामने आ चुकी हैं।21 मार्च 2026 को बिहार विधानसभा के सामने स्थित भिखारी ठाकुर फ्लाईओवर पर बिजली के तारों में आग लग गई थी।उस दौरान तारों से चिंगारियां निकलने और धुआं उठने के कारण आसपास मौजूद लोग घबरा गए थे।घटना की सूचना सचिवालय थाने को दी गई थी। इसके बाद संबंधित बिजली के खंभे की आपूर्ति बंद की गई, तब जाकर आग बुझी थी।स्थानीय लोगों ने उस समय तारों की खराब स्थिति और अवैध बिजली कनेक्शन को लेकर भी शिकायत की थी।हालांकि, मार्च की उस घटना और बुधवार को यारपुर ब्रिज पर लगी आग के बीच किसी सीधे संबंध की पुष्टि नहीं है।
रेलवे लाइन के आसपास केबल प्रबंधन जरूरी
शहरी क्षेत्रों में रेलवे लाइनों के ऊपर से गुजरने वाले पुलों पर बिजली, संचार और अन्य सेवाओं से जुड़े केबल लगे हो सकते हैं।इन केबलों की नियमित जांच और सुरक्षित रखरखाव बेहद जरूरी है।विशेषज्ञों के अनुसार, पुराने और क्षतिग्रस्त तारों को समय रहते बदलना चाहिए। इसके अलावा केबलों को इस तरह व्यवस्थित किया जाना चाहिए कि उनके टूटने या गिरने से रेलवे उपकरणों को खतरा न हो।पुलों के आसपास लटकते हुए तारों की स्थिति की जांच करना भी आवश्यक है।ऐसी व्यवस्थाओं से आग और विद्युत संबंधी दुर्घटनाओं के जोखिम को कम करने में मदद मिल सकती है।
आग लगने पर रेलवे ट्रैक से दूर रहना जरूरी
रेलवे ट्रैक के आसपास बिजली के तार में आग लगने की स्थिति में आम लोगों को विशेष सावधानी बरतनी चाहिए।यदि कोई तार टूटकर पटरी पर गिर जाए, तो उसके पास जाने या उसे छूने का प्रयास नहीं करना चाहिए।बिजली का तार ऊपर से देखने में सामान्य दिखाई दे सकता है, लेकिन उसमें विद्युत प्रवाह मौजूद होने की संभावना रहती है।ऐसी स्थिति में तुरंत रेलवे प्रशासन, पुलिस या आपातकालीन सेवाओं को सूचना देनी चाहिए।इसके अलावा आग लगने वाले स्थान पर भीड़ लगाने और तस्वीरें लेने के लिए खतरनाक क्षेत्र के पास जाने से बचना चाहिए।
घटना ने उठाए सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल
सचिवालय हॉल्ट के पास यारपुर ब्रिज पर लगी आग ने रेलवे ट्रैक के ऊपर लगे केबल वायर की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं।घटना में जलते हुए तारों का रेलवे ट्रैक और ओवरहेड वायर पर गिरना गंभीर चिंता का विषय है।अब यह पता लगाना महत्वपूर्ण होगा कि केबल में आग किस कारण लगी और क्या उसकी स्थिति पहले से खराब थी।इसके साथ ही संबंधित विभागों के बीच समन्वय और नियमित निरीक्षण की व्यवस्था भी महत्वपूर्ण होगी।फिलहाल उपलब्ध जानकारी के अनुसार, बुधवार शाम हुई इस घटना से रेल परिचालन प्रभावित हुआ। आग के वास्तविक कारण और रेलवे को हुए नुकसान की स्थिति आधिकारिक जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।