बस्ती: कुआनो नदी का जलस्तर बढ़ने के साथ ही कुदरहा ब्लॉक के कछुआड़ गांव के ग्रामीणों की चिंता बढ़ गई है। नदी के बढ़ते पानी के कारण घाट पर कटान का खतरा मंडराने लगा है। ग्रामीणों को डर है कि यदि इस बार भी नदी ने कटान शुरू किया तो गांव के महत्वपूर्ण धार्मिक और शैक्षणिक स्थलों को नुकसान पहुंच सकता है।

ग्रामीणों की समस्या को देखते हुए गुरुवार को क्षेत्र के पूर्व विधायक मौके पर पहुंचे और स्थिति का जायजा लिया। उन्होंने घाट क्षेत्र का निरीक्षण कर ग्रामीणों से बातचीत की और उनकी परेशानियों को सुना। इसके बाद उन्होंने बाढ़ खंड के अधिकारियों से बात कर कछुआड़ घाट को कटान से सुरक्षित रखने के लिए जरूरी कदम उठाने को कहा।

ग्रामीणों ने बताया कि पिछले वर्ष भी कुआनो नदी का जलस्तर बढ़ने के बाद कछुआड़ घाट पर कटान शुरू हो गया था। नदी की तेज धारा ने भारी नुकसान पहुंचाया था। इस दौरान प्राचीन काली मंदिर नदी की धारा में समा गया था, जिससे ग्रामीणों की आस्था को भी बड़ा झटका लगा था।

इसके अलावा नदी की कटान धीरे-धीरे प्राथमिक विद्यालय और प्राचीन शिव मंदिर तक पहुंच चुकी थी। अब एक बार फिर जलस्तर बढ़ने के कारण ग्रामीणों को आशंका है कि अगर समय रहते बचाव कार्य नहीं किया गया तो नदी इन दोनों महत्वपूर्ण स्थानों को भी अपनी चपेट में ले सकती है।

ग्रामीणों का कहना है कि कुआनो नदी का बढ़ता जलस्तर हर साल बरसात के मौसम में परेशानी का कारण बनता है। नदी किनारे बसे गांवों में रहने वाले लोगों को बाढ़ और कटान का खतरा बना रहता है। पिछले अनुभवों को देखते हुए इस बार ग्रामीण पहले से ही सतर्क हैं।

स्थानीय लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि नदी किनारे सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए जाएं। उनका कहना है कि केवल निरीक्षण से समस्या का समाधान नहीं होगा, बल्कि कटान रोकने के लिए तत्काल ठोस कदम उठाने की जरूरत है।

पूर्व विधायक ने ग्रामीणों को भरोसा दिलाया कि उनकी समस्या को संबंधित अधिकारियों तक पहुंचाया जाएगा और घाट को सुरक्षित रखने के लिए आवश्यक कार्रवाई कराई जाएगी। उन्होंने बाढ़ खंड के अधिकारियों से भी स्थिति पर लगातार नजर रखने को कहा।

बाढ़ खंड के अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे नदी के जलस्तर और कटान की स्थिति की निगरानी करें। जरूरत पड़ने पर बचाव कार्य शुरू किया जाए, ताकि गांव और महत्वपूर्ण स्थलों को नुकसान से बचाया जा सके।

कछुआड़ गांव के लोगों के लिए नदी कटान का खतरा नया नहीं है। पिछले साल हुए नुकसान की यादें अभी भी ग्रामीणों के मन में ताजा हैं। प्राचीन मंदिर के नदी में समा जाने की घटना ने लोगों को गहरा आघात पहुंचाया था।

ग्रामीणों का कहना है कि नदी की धारा लगातार जमीन को काट रही है। यदि समय रहते तट सुरक्षा के उपाय नहीं किए गए तो आने वाले दिनों में स्थिति और गंभीर हो सकती है।

विशेषज्ञों के अनुसार, नदी किनारे बसे इलाकों में बाढ़ के दौरान कटान रोकने के लिए तटबंध मजबूत करना, पत्थर की पिचिंग और अन्य सुरक्षा उपाय जरूरी होते हैं। इससे नदी की धारा के दबाव को कम किया जा सकता है।

प्रशासन का कहना है कि स्थिति पर नजर रखी जा रही है और ग्रामीणों की सुरक्षा के लिए हर संभव कदम उठाए जाएंगे। बारिश और नदी के जलस्तर को देखते हुए संबंधित विभागों को सतर्क रहने के निर्देश दिए गए हैं।

फिलहाल कछुआड़ गांव के लोग कुआनो नदी के जलस्तर पर नजर बनाए हुए हैं। ग्रामीणों को उम्मीद है कि प्रशासन समय रहते कदम उठाएगा, ताकि पिछले वर्ष जैसी स्थिति दोबारा न बने और गांव के धार्मिक व शैक्षणिक स्थल सुरक्षित रह सकें।

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