पटना: बिहार में इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) में फर्जीवाड़े के मामले लगातार बढ़ रहे हैं। पिछले तीन वित्तीय वर्षों के सरकारी आंकड़ों के मुताबिक राज्य में ITC धोखाधड़ी के कुल 361 मामले सामने आए, लेकिन इस अवधि में सिर्फ दो लोगों की गिरफ्तारी हुई। वहीं हेराफेरी की रकम 2023-24 के 85.60 करोड़ रुपये से बढ़कर 2025-26 में 1162.53 करोड़ रुपये तक पहुंच गई है।
आंकड़ों के मुताबिक वित्तीय वर्ष 2023-24 में बिहार में ITC धोखाधड़ी के 59 मामले दर्ज किए गए थे। इन मामलों में 85.60 करोड़ रुपये की रकम शामिल थी। अगले ही वित्तीय वर्ष 2024-25 में मामलों की संख्या बढ़कर 101 हो गई और हेराफेरी की रकम 347.12 करोड़ रुपये दर्ज की गई।
वित्तीय वर्ष 2025-26 में इसमें और बड़ी बढ़ोतरी दर्ज हुई। इस दौरान बिहार में ITC धोखाधड़ी के 201 मामले सामने आए और इनमें शामिल रकम बढ़कर 1162.53 करोड़ रुपये हो गई। इस तरह तीन वित्तीय वर्षों के दौरान मामलों की संख्या के साथ फर्जीवाड़े की रकम में भी बड़ा इजाफा दर्ज किया गया।
गिरफ्तारी के आंकड़े इसके मुकाबले काफी कम हैं। बिहार में इन तीन वर्षों के दौरान केवल दो गिरफ्तारियां हुईं और दोनों गिरफ्तारियां वित्तीय वर्ष 2025-26 में दर्ज की गईं। इसके मुकाबले पूरे देश में इसी तीन साल की अवधि में ITC धोखाधड़ी के मामलों में कुल 718 लोगों की गिरफ्तारी हुई।
राष्ट्रीय स्तर के आंकड़ों पर नजर डालें तो 2023-24 में देशभर में ITC धोखाधड़ी के 9,190 मामले सामने आए और 182 लोगों को गिरफ्तार किया गया। वर्ष 2024-25 में मामलों की संख्या बढ़कर 15,283 हो गई और 178 गिरफ्तारियां हुईं। 2025-26 में 30,162 मामले दर्ज किए गए, जबकि 358 लोगों की गिरफ्तारी हुई।
ITC यानी इनपुट टैक्स क्रेडिट जीएसटी व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा है। किसी कारोबारी द्वारा सामान या सेवा खरीदते समय चुकाए गए जीएसटी को बिक्री के समय बनने वाली जीएसटी देनदारी में समायोजित करने की सुविधा मिलती है। फर्जी ITC के मामलों में वास्तविक सामान या सेवा की आपूर्ति के बिना बिल तैयार कर टैक्स क्रेडिट का दावा करने का मामला सामने आता है।
ऐसे मामलों में बोगस फर्म और फर्जी बिलिंग का इस्तेमाल भी सामने आया है। कागजों पर कंपनियां बनाकर बिना वास्तविक कारोबार के लेन-देन दिखाया जाता है और उसके आधार पर ITC का दावा किया जाता है। कई मामलों में दूसरे लोगों के दस्तावेजों का इस्तेमाल कर फर्म बनाए जाने के मामले भी जांच में सामने आए हैं।
बिहार में पिछले कुछ महीनों के दौरान 50 से अधिक ऐसी फर्मों का पता लगाए जाने की जानकारी भी सामने आई है, जो कागजों पर संचालित हो रही थीं। इनके जरिए करोड़ों रुपये की हेराफेरी किए जाने के मामलों की जांच की गई है।
तीन वर्षों के आंकड़े बताते हैं कि बिहार में ITC धोखाधड़ी के मामलों और इसमें शामिल रकम दोनों में बढ़ोतरी हुई है। 2023-24 में 85.60 करोड़ रुपये से शुरू हुआ आंकड़ा 2025-26 में 1162.53 करोड़ रुपये तक पहुंच गया, जबकि तीन वर्षों में गिरफ्तारी की संख्या केवल दो रही।
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