चांदी के सिंहासन पर विराजेंगी भगवती, पटना में भव्य आयोजन
छोटी पटनदेवी मंदिर में भव्य आयोजन
पटना: बिहार की राजधानी पटना के प्रसिद्ध छोटी पटनदेवी मंदिर में मां भगवती के लिए विशेष धार्मिक आयोजन की तैयारियां की जा रही हैं। इस आयोजन का मुख्य आकर्षण 51 किलो चांदी से निर्मित सिंहासन होगा, जिस पर मां भगवती को विराजमान कराया जाएगा। इसके साथ ही 1008 महिलाओं द्वारा सामूहिक महाआरती किए जाने का कार्यक्रम प्रस्तावित है। इस आयोजन को लेकर मंदिर से जुड़े श्रद्धालुओं में उत्साह है।
छोटी पटनदेवी मंदिर पटना के प्रमुख धार्मिक स्थलों में शामिल है। यहां मां भगवती की पूजा-अर्चना के लिए श्रद्धालु पहुंचते हैं। मंदिर में विशेष अवसरों पर धार्मिक अनुष्ठान आयोजित किए जाते हैं। इस बार 51 किलो चांदी के सिंहासन और 1008 महिलाओं की महाआरती के कारण आयोजन विशेष चर्चा में है।
मंदिर प्रबंधन के अनुसार, शारदीय नवरात्रि के अवसर पर 11 अक्टूबर से 19 अक्टूबर तक विशेष चंडी पुनर्स्थापना महायज्ञ का आयोजन निर्धारित किया गया है। पीठाचार्य आचार्य अभिषेक अनंत द्विवेदी के मार्गदर्शन में कामाख्या और वाराणसी के विद्वान आचार्य धार्मिक अनुष्ठान संपन्न कराएंगे।
51 किलो चांदी का सिंहासन बनेगा विशेष आकर्षण
मंदिर में मां भगवती के लिए 51 किलो शुद्ध चांदी से भव्य रजत सिंहासन तैयार किया गया है। इसे स्वर्ण पाषाण मंडप में स्थापित करने की योजना है। मंदिर प्रबंधन ने नवरात्रि की कलश स्थापना के अवसर पर मां भगवती को इस सिंहासन पर विराजमान कराने की जानकारी दी है। मंदिर की धार्मिक परंपराओं के अनुसार मां भगवती की पूजा की जाएगी। श्रद्धालुओं के लिए इस वर्ष रजत सिंहासन विशेष आकर्षण रहेगा। मंदिर प्रबंधन का उद्देश्य धार्मिक परंपराओं को बनाए रखते हुए परिसर की सुविधाओं और स्वरूप का विस्तार करना है। मंदिर में पांच वर्षों से जीर्णोद्धार कार्य भी जारी है। इस दौरान धार्मिक अनुष्ठानों और निर्माण कार्यों को साथ-साथ आगे बढ़ाया जा रहा है।
1008 महिलाओं की महाआरती का प्रस्तावित आयोजन
नवरात्रि के अवसर पर 1008 महिलाओं की सामूहिक महाआरती भी प्रस्तावित है। इस आयोजन में महिला श्रद्धालुओं की भागीदारी मुख्य आकर्षण होगी। सामूहिक आरती का धार्मिक महत्व है और इसे मां भगवती की उपासना तथा सामूहिक श्रद्धा की अभिव्यक्ति के रूप में देखा जाता है।
हालांकि उपलब्ध विस्तृत कार्यक्रम में 1008 महिलाओं की महाआरती का सटीक समय और आयोजन की व्यवस्था की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है। मंदिर प्रबंधन ने नवरात्रि में आने वाली व्रती महिलाओं के लिए फलाहार, शीतल पेयजल और विश्राम स्थल की व्यवस्था करने की जानकारी दी है। इससे धार्मिक अनुष्ठानों में भाग लेने वाली महिलाओं और अन्य श्रद्धालुओं को सुविधा मिलेगी। श्रद्धालुओं के लिए पाठ, जप, ध्यान और पूजा-अर्चना के अलग-अलग स्थान भी निर्धारित किए जा रहे हैं, ताकि धार्मिक गतिविधियां व्यवस्थित तरीके से संपन्न हो सकें।
11 से 19 अक्टूबर तक चंडी पुनर्स्थापना महायज्ञ
छोटी पटनदेवी मंदिर में 11 अक्टूबर से 19 अक्टूबर तक चंडी पुनर्स्थापना महायज्ञ आयोजित करने की तैयारी है। इस अनुष्ठान का आयोजन श्री पटनदेवी जी गौ मानस सेवा संस्थानम् के तत्वावधान में किया जाएगा। मंदिर के पीठाचार्य आचार्य अभिषेक अनंत द्विवेदी के मार्गदर्शन में आयोजित महायज्ञ में कामाख्या और वाराणसी से आने वाले विद्वान आचार्य भाग लेंगे। इस दौरान वैदिक मंत्रोच्चार, चंडी पाठ और धार्मिक अनुष्ठान निर्धारित हैं। नवरात्रि के दौरान देवी उपासना का विशेष महत्व माना जाता है। श्रद्धालु मां दुर्गा के विभिन्न स्वरूपों की पूजा करते हैं। छोटी पटनदेवी मंदिर में होने वाला यह महायज्ञ इसी धार्मिक परंपरा से जुड़ा आयोजन है।
मंदिर प्रबंधन ने महायज्ञ के साथ नियमित दर्शन और पूजा व्यवस्था को भी सुचारु बनाए रखने की तैयारी की है।
श्रद्धालुओं के लिए दर्शन और सुविधाओं की विशेष व्यवस्था
नवरात्रि के दौरान श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए मंदिर प्रबंधन ने कई व्यवस्थाएं निर्धारित की हैं। भक्तों को प्रत्यक्ष दर्शन के साथ झरोखा दर्शन की सुविधा भी उपलब्ध कराने की योजना है। मंदिर के मुख्य प्रवेश द्वार पर वाहनों की पार्किंग, जूता-चप्पल सुरक्षित रखने और हाथ-पैर धोने की व्यवस्था की जा रही है। इसके अतिरिक्त पूजा-पाठ, जप और ध्यान के लिए स्थान निर्धारित किए गए हैं।
श्री पटनदेवी जी गौ मानस सेवा संस्थानम् के अध्यक्ष बाबा विवेक द्विवेदी ने आयोजन की तैयारियों की जानकारी दी है। तैयारियों को लेकर आयोजित बैठक में संयोजक संतोष पांडेय सहित मंदिर से जुड़े अन्य सदस्यों ने भाग लिया। प्रबंधन का प्रयास है कि नवरात्रि में आने वाले श्रद्धालुओं को दर्शन और धार्मिक अनुष्ठानों के दौरान आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध हों।
2027 तक मंदिर के जीर्णोद्धार का लक्ष्य
छोटी पटनदेवी मंदिर में पिछले पांच वर्षों से जीर्णोद्धार का कार्य जारी है। मंदिर प्रबंधन के अनुसार, निर्माण कार्य वर्ष 2027 की नवरात्रि तक पूरा करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। मंदिर के पांच मंजिला भवन का निर्माण पूरा हो चुका है। अब 54 फीट ऊंचे गुंबद का निर्माण किया जाना है। इसके शीर्ष पर 11 किलो सोने से स्वर्ण कलश स्थापित करने की योजना है। मंदिर के प्रथम तल पर 51 शक्तिपीठों की अनुकृतियां बनाने की तैयारी है। इनमें भारत के साथ पाकिस्तान, बांग्लादेश और नेपाल में स्थित शक्तिपीठों को भी शामिल करने की योजना है। दूसरे तल पर तंत्र साधना से संबंधित दस महाविद्याओं के लिए स्थान निर्धारित किया जाएगा। तीसरे और चौथे तल पर वेद विद्यालय स्थापित करने की योजना है। मंदिर प्रबंधन ने भविष्य में संत निवास, अतिथि गृह, निर्धन कन्याओं के विवाह के लिए मंगल मंडपम और बेसहारा बुजुर्गों के लिए चिकित्सा सुविधाओं वाले वृद्धाश्रम की योजना भी बताई है। मंदिर के जीर्णोद्धार में गौ मानस सेवा संस्थानम् धर्मादाय ट्रस्ट के सहयोग के साथ आम नागरिकों की स्वैच्छिक भागीदारी भी शामिल है।
पटना के प्रमुख शक्तिपीठों में शामिल है छोटी पटनदेवी
पटना सिटी स्थित छोटी पटनदेवी मंदिर की धार्मिक पहचान शक्तिपीठ और देवी उपासना की परंपरा से जुड़ी हुई है। यहां मां भगवती के दर्शन और पूजा-अर्चना के लिए श्रद्धालु पहुंचते हैं। मंदिर के विकास की योजनाओं में धार्मिक परंपराओं के संरक्षण के साथ श्रद्धालुओं के लिए सुविधाओं का विस्तार भी शामिल है। प्रबंधन के अनुसार, मां भगवती अपने मूल स्थान पर ही विराजमान रहेंगी। 51 किलो चांदी के सिंहासन की स्थापना, चंडी पुनर्स्थापना महायज्ञ और प्रस्तावित सामूहिक महाआरती के कारण इस वर्ष का नवरात्रि आयोजन विशेष महत्व रखता है। इसके साथ ही वर्ष 2027 तक प्रस्तावित जीर्णोद्धार कार्य मंदिर को धार्मिक शिक्षा, साधना और श्रद्धालुओं की सुविधाओं के नए स्वरूप से जोड़ने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।