सारण में गंडक का जलस्तर बढ़ा, वाल्मीकिनगर बराज के पानी से तटीय इलाकों में चिंता

Update: 2026-07-16 08:48 GMT

Haryana हरियाणा: वाल्मीकिनगर बराज से छोड़े गए पानी का असर अब सारण जिले के गंडक तटीय क्षेत्रों में साफ दिखाई देने लगा है। मंगलवार शाम बराज से 2.24 लाख क्यूसेक पानी छोड़े जाने के बाद करीब दो से ढाई दिनों में इसका प्रभाव चंचलिया दियारा क्षेत्र तक पहुंच गया। गंडक नदी के जलस्तर में बढ़ोतरी के बाद तटवर्ती इलाकों में रहने वाले लोगों की चिंता बढ़ गई है।

नदी के बढ़ते जलस्तर को देखते हुए स्थानीय प्रशासन और ग्रामीण क्षेत्रों में सतर्कता बढ़ा दी गई है। नदी किनारे रहने वाले लोगों को लगातार स्थिति पर नजर रखने की सलाह दी जा रही है।

चंचलिया दियारा क्षेत्र में पहुंचा पानी

वाल्मीकिनगर बराज से छोड़ा गया पानी धीरे-धीरे नदी के बहाव के साथ आगे बढ़ा और सारण जिले के गंडक तटीय इलाकों तक पहुंच गया। चंचलिया दियारा क्षेत्र में इसका प्रभाव सबसे पहले देखने को मिला।

दियारा क्षेत्रों में नदी के पानी का फैलाव होने से ग्रामीणों में चिंता का माहौल है। यहां रहने वाले लोग पहले भी बाढ़ जैसी परिस्थितियों का सामना करते रहे हैं, इसलिए जलस्तर बढ़ने के साथ उनकी परेशानी बढ़ने लगी है।

प्रशासन ने बढ़ाई निगरानी

गंडक नदी में पानी बढ़ने के बाद प्रशासनिक स्तर पर निगरानी तेज कर दी गई है। अधिकारियों की ओर से नदी के जलस्तर और तटीय क्षेत्रों की स्थिति पर नजर रखी जा रही है।

प्रशासन ने संबंधित विभागों को सतर्क रहने के निर्देश दिए हैं, ताकि किसी भी आपात स्थिति में तुरंत राहत और बचाव कार्य शुरू किया जा सके।

तटवर्ती इलाकों में रहने वाले लोगों से भी अपील की जा रही है कि वे नदी के करीब जाने से बचें और प्रशासन के निर्देशों का पालन करें।

दियारा के लोगों की बढ़ी चिंता

गंडक किनारे बसे दियारा क्षेत्रों के लोगों के लिए नदी का बढ़ता जलस्तर चिंता का कारण बन गया है। खेती और पशुपालन पर निर्भर ग्रामीणों को सबसे अधिक परेशानी का सामना करना पड़ता है।

पानी बढ़ने की स्थिति में खेतों में लगी फसलों, मवेशियों और आवागमन से जुड़ी समस्याएं बढ़ सकती हैं।

ग्रामीणों का कहना है कि बरसात के मौसम में नदी के जलस्तर में उतार-चढ़ाव आम बात है, लेकिन अचानक बड़ी मात्रा में पानी छोड़े जाने से खतरा बढ़ जाता है।

बाढ़ की स्थिति पर रखी जा रही नजर

अधिकारियों के अनुसार, फिलहाल स्थिति पर नजर रखी जा रही है। नदी के जलस्तर में होने वाले बदलाव की लगातार निगरानी की जा रही है।

जल संसाधन विभाग और स्थानीय प्रशासन के कर्मचारी नदी किनारे के क्षेत्रों की स्थिति का आकलन कर रहे हैं। जरूरत पड़ने पर राहत शिविर और बचाव व्यवस्था सक्रिय करने की तैयारी भी रखी जा रही है।

पिछले अनुभवों से सतर्क ग्रामीण

सारण के गंडक तटीय क्षेत्रों में रहने वाले ग्रामीण बाढ़ की स्थिति से पहले भी प्रभावित होते रहे हैं। ऐसे में नदी में पानी बढ़ने की खबर मिलते ही लोग जरूरी सामान जुटाने और सुरक्षित स्थानों की तैयारी में लग जाते हैं।

ग्रामीणों का कहना है कि समय रहते सूचना मिलने से नुकसान को कम किया जा सकता है।

जलस्तर बढ़ने के साथ सावधानी जरूरी

विशेषज्ञों का कहना है कि बराज से पानी छोड़े जाने के बाद उसका असर नदी के निचले क्षेत्रों में कुछ समय बाद दिखाई देता है। इसलिए तटीय इलाकों में रहने वाले लोगों को सतर्क रहना जरूरी है।

फिलहाल वाल्मीकिनगर बराज से छोड़े गए पानी का असर सारण के गंडक तटीय इलाकों में महसूस किया जा रहा है। प्रशासन स्थिति पर नजर बनाए हुए है और लोगों से सावधानी बरतने की अपील की जा रही है।

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