खाद वितरण में OTP व्यवस्था से किसानों को परेशानी, ग्रामीण क्षेत्रों में प्रक्रिया बाधित

Update: 2026-06-23 09:40 GMT

Bihar बिहार: सरकार द्वारा खाद वितरण में पारदर्शिता लाने के उद्देश्य से शुरू किए गए पायलट प्रोजेक्ट के तहत किसानों को उर्वरक प्राप्त करने में भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। खासकर छोटे, सीमांत और महिला किसानों के लिए ओटीपी आधारित व्यवस्था एक बड़ी चुनौती बनकर सामने आई है।

नई व्यवस्था के तहत किसानों को खाद लेने के लिए उनके पंजीकृत मोबाइल नंबर पर भेजे जाने वाले ओटीपी को प्रस्तुत करना अनिवार्य किया गया है। लेकिन कई जगहों पर यह प्रक्रिया किसानों के लिए मुश्किल साबित हो रही है। ओटीपी प्राप्त करने में देरी के कारण किसानों को घंटों तक खाद बिक्री केंद्रों पर इंतजार करना पड़ रहा है।

ग्रामीण क्षेत्रों में मोबाइल नेटवर्क की कमजोर स्थिति भी इस समस्या का प्रमुख कारण बन रही है। कई स्थानों पर सिग्नल न मिलने या कमजोर नेटवर्क के कारण ओटीपी समय पर किसानों तक नहीं पहुंच पा रहा है। इसके अलावा, कई किसानों के मोबाइल नंबर आधार या किसान पंजीकरण रिकॉर्ड से अपडेट नहीं होने के कारण भी तकनीकी अड़चनें उत्पन्न हो रही हैं।

इस वजह से खाद वितरण की पूरी प्रक्रिया प्रभावित हो रही है और किसानों को समय पर उर्वरक नहीं मिल पा रहा है। किसानों का कहना है कि खेती के महत्वपूर्ण समय पर खाद उपलब्ध न होने से फसलों की बुवाई और उत्पादन पर असर पड़ रहा है।

किसानों ने यह भी आरोप लगाया है कि नई प्रणाली को लागू करने से पहले जमीनी स्तर की परिस्थितियों का पर्याप्त आकलन नहीं किया गया। उनका कहना है कि डिजिटल व्यवस्था का लाभ तभी मिलेगा जब ग्रामीण क्षेत्रों में नेटवर्क और डेटा अपडेट की समस्याओं को दूर किया जाए।

स्थानीय स्तर पर कई केंद्रों पर भीड़ बढ़ने से अव्यवस्था की स्थिति बन रही है। कुछ स्थानों पर किसानों और वितरण केंद्रों के कर्मचारियों के बीच बहस की स्थिति भी देखने को मिल रही है।

विशेषज्ञों का मानना है कि पारदर्शिता बढ़ाने के लिए तकनीकी उपाय जरूरी हैं, लेकिन उन्हें लागू करने से पहले ग्रामीण आधारभूत संरचना को मजबूत करना आवश्यक है, ताकि किसानों को किसी तरह की असुविधा न हो।

फिलहाल प्रशासनिक स्तर पर इस समस्या को लेकर फीडबैक लिया जा रहा है और व्यवस्था में सुधार की संभावना पर विचार किया जा रहा है।

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