मुंगेर में फर्जी अपहरण कांड का खुलासा, शराब के नशे में क्लर्क ने रची थी झूठी कहानी
बिहार | मुंगेर जिले में एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है, जहां एक शिक्षा विभाग के क्लर्क ने शराब के नशे में अपने ही अपहरण की झूठी कहानी रचकर पुलिस को पूरी रात परेशान कर दिया। पुलिस ने जब मामले की जांच शुरू की तो पूरी सच्चाई सामने आ गई। क्लर्क को जमालपुर के एक होटल के बाथरूम से बरामद किया गया, जहां वह छिपा हुआ था। जांच में शराब पीने की पुष्टि होने के बाद पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर जेल भेज दिया।
मामला धरहरा थाना क्षेत्र का है। पुलिस के अनुसार, सोमवार देर रात करीब 11:30 बजे धरहरा थाने के सरकारी मोबाइल नंबर पर अमारी निवासी सचिन कुमार का फोन आया। उसने पुलिस को घबराई हुई आवाज में बताया कि उसके भाई मनीष कुमार का कुछ अज्ञात लोगों ने अपहरण कर लिया है। मनीष शिक्षा विभाग में क्लर्क के पद पर कार्यरत है।
सचिन ने पुलिस को बताया कि उसके भाई ने किसी तरह छिपकर फोन किया है और वह रोते हुए अपनी जान बचाने की गुहार लगा रहा है। अपहरण की सूचना मिलते ही पुलिस हरकत में आ गई। मामला गंभीर होने के कारण धरहरा पुलिस ने तुरंत जांच शुरू कर दी।
पुलिस ने सबसे पहले मनीष कुमार के मोबाइल नंबर की लोकेशन ट्रेस कराई। जांच में मोबाइल की आखिरी लोकेशन जमालपुर थाना क्षेत्र में मिली। इसके बाद धरहरा थाना पुलिस ने जमालपुर पुलिस से संपर्क किया और दोनों थानों की संयुक्त टीम ने मनीष की तलाश शुरू कर दी।
मोबाइल लोकेशन के आधार पर पुलिस जमालपुर स्थित विनायक होटल पहुंची। पुलिस टीम ने होटल में तलाशी अभियान चलाया। इसी दौरान एक कमरे के बाथरूम का दरवाजा अंदर से बंद मिला। पुलिसकर्मियों ने काफी देर तक अंदर मौजूद व्यक्ति से दरवाजा खोलने के लिए कहा, लेकिन शुरुआत में उसने दरवाजा नहीं खोला।
काफी समझाने के बाद जब बाथरूम का दरवाजा खुला तो पुलिसकर्मी हैरान रह गए। अंदर शिक्षा विभाग का क्लर्क मनीष कुमार छिपा हुआ था। पुलिस ने उसे बाहर निकाला। बाहर आते ही उसके मुंह से शराब की तेज दुर्गंध महसूस हुई। इसके बाद पुलिस उसे हिरासत में लेकर जमालपुर थाने ले गई।
थाने में पुलिस ने ब्रेथ एनालाइजर मशीन से उसकी जांच कराई। जांच में उसके शराब के नशे में होने की पुष्टि हुई। इसके बाद पुलिस को समझ आया कि पूरा अपहरण कांड एक झूठी कहानी थी, जिसे मनीष ने खुद ही रचा था।
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, मनीष कुमार ने शराब के नशे में अपने भाई को फोन कर अपहरण की झूठी सूचना दी थी। उसने ऐसा क्यों किया, इसकी जांच की जा रही है। पुलिस का कहना है कि इस तरह की झूठी सूचना से पुलिस संसाधनों की बर्बादी होती है और गंभीर मामलों में पुलिस की कार्रवाई प्रभावित हो सकती है।
धरहरा थानाध्यक्ष सोनू कुमार ने बताया कि अपहरण की सूचना पूरी तरह गलत और भ्रामक निकली। पुलिस ने मामले में शराब सेवन और प्रशासन को गुमराह करने के आरोप में कार्रवाई की है। आरोपी के खिलाफ बिहार मद्य निषेध एवं उत्पाद अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया गया है।
इस घटना ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा किया है कि नशे की हालत में लोग किस तरह गंभीर और गैरजिम्मेदाराना कदम उठा लेते हैं। एक झूठी सूचना के कारण पुलिस को देर रात तक जांच और कार्रवाई में जुटना पड़ा। हालांकि पुलिस की तत्परता के कारण कुछ ही घंटों में पूरे मामले का खुलासा हो गया और फर्जी अपहरण की कहानी सामने आ गई।