पटना। बिहार में आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने के आरोपों को लेकर विशेष निगरानी इकाई (SVU) ने बुधवार, 4 नवंबर 2026 को बड़ी कार्रवाई की। निगरानी टीम ने पथ निर्माण विभाग के सहरसा अंचल में पदस्थ अधीक्षण अभियंता विजय कुमार से जुड़े पटना, सहरसा और औरंगाबाद के कुल पांच ठिकानों पर एक साथ छापेमारी की। इस दौरान आवासीय परिसरों और कार्यालयों में तलाशी लेकर संपत्ति, बैंक खातों तथा निवेश से जुड़े दस्तावेजों की जांच की गई। शुरुआती रिपोर्टों के अनुसार, कार्रवाई के दौरान करीब 10 लाख रुपये नकद बरामद हुए हैं। हालांकि, कुल संपत्ति और जब्ती का अंतिम ब्योरा जांच पूरी होने के बाद स्पष्ट होगा।
इस कार्रवाई के बाद पथ निर्माण विभाग में हलचल तेज हो गई है। निगरानी इकाई यह पता लगाने में जुटी है कि अभियंता ने अपनी ज्ञात और वैध आय के मुकाबले कितनी संपत्ति अर्जित की है। जांच के दौरान मिले दस्तावेजों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
पटना, सहरसा और औरंगाबाद में एक साथ छापेमारी
प्राप्त जानकारी के अनुसार, विशेष निगरानी इकाई ने अधीक्षण अभियंता विजय कुमार के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति का मामला दर्ज किया है।इसके बाद निगरानी की विशेष अदालत, पटना से तलाशी वारंट प्राप्त कर बुधवार को तीन जिलों में कार्रवाई शुरू की गई।अलग-अलग टीमों ने पटना, सहरसा और औरंगाबाद में अभियंता से जुड़े पांच ठिकानों पर एक साथ दबिश दी।इस कार्रवाई का उद्देश्य अभियंता की चल-अचल संपत्ति, बैंक खातों, निवेश और अन्य वित्तीय लेनदेन से संबंधित जानकारी जुटाना है।एसवीयू की टीमों ने संबंधित परिसरों में मौजूद दस्तावेजों की जांच की और संपत्तियों से जुड़े रिकॉर्ड खंगाले।
पटना के दो ठिकानों पर दस्तावेजों की जांच
राजधानी पटना में अधीक्षण अभियंता से जुड़े दो परिसरों पर तलाशी ली गई।इनमें दानापुर के गोला रोड क्षेत्र में स्थित साईं शरणम् आवासीय परिसर और महेश नगर स्थित एक अन्य ठिकाना शामिल बताया गया है।छापेमारी के दौरान अधिकारियों ने जमीन और मकानों से जुड़े दस्तावेजों, बैंक खातों तथा विभिन्न निवेशों से संबंधित अभिलेखों की पड़ताल की।जांच टीम यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि संबंधित संपत्तियों की खरीद कब और किन वित्तीय स्रोतों से की गई थी।इसके साथ ही दस्तावेजों में दर्ज संपत्ति की कीमत और वास्तविक बाजार मूल्य के अंतर का भी आकलन किया जा सकता है।हालांकि, अभी यह स्पष्ट नहीं है कि पटना के दोनों ठिकानों से कुल कितनी संपत्ति से संबंधित दस्तावेज मिले हैं।
सहरसा में कार्यालय और आवास की तलाशी
सहरसा में एसवीयू की टीम अधीक्षण अभियंता विजय कुमार के सरकारी कार्यालय और आवासीय परिसर पहुंची।अचानक हुई कार्रवाई से विभागीय कर्मचारियों के बीच हलचल मच गई।निगरानी अधिकारियों ने कार्यालय में उपलब्ध संबंधित दस्तावेजों तथा आवास में मौजूद वित्तीय रिकॉर्ड की जांच की।पथ निर्माण विभाग में अधीक्षण अभियंता का पद महत्वपूर्ण माना जाता है। इस पद पर कार्यरत अधिकारी अपने कार्यक्षेत्र में विभिन्न निर्माण परियोजनाओं की निगरानी और विभागीय कार्यों से संबंधित जिम्मेदारियां संभालते हैं।ऐसे में आय से अधिक संपत्ति के आरोपों की जांच को विभागीय स्तर पर भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।हालांकि, किसी सरकारी पद पर कार्यरत होने या छापेमारी होने मात्र से आरोप सिद्ध नहीं हो जाते। जांच एजेंसी को अपने निष्कर्षों के समर्थन में कानूनी रूप से स्वीकार्य साक्ष्य जुटाने होंगे।
औरंगाबाद के पैतृक आवास पर भी पहुंची टीम
पटना और सहरसा के अलावा विशेष निगरानी इकाई की टीम औरंगाबाद जिले के दाउदनगर स्थित अभियंता के पैतृक आवास पर भी पहुंची।रिपोर्टों के अनुसार, दाउदनगर में संबंधित आवासीय परिसर की तलाशी लेकर संपत्ति और वित्तीय रिकॉर्ड से जुड़ी जानकारी जुटाई गई।यहां टीम ने करीब दो घंटे तक जांच की। हालांकि, इस स्थान से किसी विशेष वस्तु या रकम की बरामदगी की आधिकारिक पुष्टि उपलब्ध नहीं है।तीन जिलों में एक साथ की गई कार्रवाई के माध्यम से निगरानी इकाई अभियंता की कुल संपत्ति का व्यापक आकलन करने का प्रयास कर रही है।
छापेमारी में करीब 10 लाख रुपये नकद मिलने की खबर
छापेमारी के दौरान करीब 10 लाख रुपये नकद बरामद होने की जानकारी सामने आई है।इसके अतिरिक्त बैंक खातों, निवेश और अचल संपत्तियों से जुड़े दस्तावेजों की भी जांच की जा रही है।निगरानी इकाई की जांच का मुख्य उद्देश्य यह पता लगाना है कि अभियंता द्वारा अर्जित संपत्ति उनकी ज्ञात आय के अनुपात में है या उससे अधिक।इसके लिए वेतन, अन्य घोषित आय, वित्तीय लेनदेन और संपत्ति खरीद से संबंधित अभिलेखों का मिलान किया जाएगा।बरामद नकदी के स्रोत तथा उससे संबंधित दस्तावेजों की भी जांच की जा सकती है।अभी तक कार्रवाई में मिली कुल नकदी, आभूषण और संपत्तियों की अंतिम आधिकारिक सूची जारी होने की पुष्टि नहीं हुई है।
वैध आय से 139.87 प्रतिशत अधिक संपत्ति का आरोप
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, विशेष निगरानी इकाई ने अधीक्षण अभियंता के विरुद्ध उनकी ज्ञात आय से लगभग 139.87 प्रतिशत अधिक संपत्ति अर्जित करने का आरोप लगाया है।यह आंकड़ा जांच एजेंसी के प्रारंभिक आकलन से जुड़ा बताया जा रहा है। इसकी अंतिम पुष्टि जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होगी।आय से अधिक संपत्ति के मामलों में जांच एजेंसी संबंधित अधिकारी की जांच अवधि के दौरान हुई कुल वैध आय तथा उस अवधि में किए गए खर्च और अर्जित संपत्तियों की तुलना करती है।यदि संपत्ति के स्रोत के संबंध में संतोषजनक और कानूनी रूप से स्वीकार्य स्पष्टीकरण नहीं मिलता, तो जांच एजेंसी उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई कर सकती है।ऐसे मामलों में आरोपी अधिकारी को भी अपना पक्ष रखने और संपत्ति के वैध स्रोतों से जुड़े दस्तावेज प्रस्तुत करने का अधिकार होता है।
बैंक खातों और निवेश से जुड़े रिकॉर्ड पर नजर
एसवीयू की जांच में बैंक खातों और निवेश से संबंधित दस्तावेज महत्वपूर्ण हो सकते हैं।कई बार संपत्ति सीधे संबंधित व्यक्ति के नाम पर होती है, जबकि कुछ वित्तीय लेनदेन परिवार के सदस्यों या अन्य संबंधित व्यक्तियों के माध्यम से किए जाते हैं।हालांकि, विजय कुमार के मामले में किसी अन्य व्यक्ति की संलिप्तता की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।जांच एजेंसी उपलब्ध दस्तावेजों और वित्तीय लेनदेन की पड़ताल कर रही है। आवश्यकता पड़ने पर संबंधित बैंकों और अन्य संस्थानों से भी रिकॉर्ड प्राप्त किए जा सकते हैं।अधिकारियों द्वारा जुटाए गए साक्ष्यों के आधार पर संपत्ति का अंतिम मूल्यांकन किया जाएगा।
जांच पूरी होने के बाद साफ होगी स्थिति
विशेष निगरानी इकाई की इस कार्रवाई को भ्रष्टाचार के आरोपों की जांच के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।एक साथ पांच ठिकानों पर छापेमारी से जांच एजेंसी को विभिन्न स्थानों पर मौजूद दस्तावेजों और संपत्तियों का विवरण जुटाने में मदद मिल सकती है।अब निगरानी इकाई के विस्तृत आधिकारिक खुलासे का इंतजार है, जिससे यह स्पष्ट होगा कि कुल कितनी नकदी बरामद हुई, कितनी संपत्ति की पहचान की गई और किन दस्तावेजों को जांच में महत्वपूर्ण पाया गया।
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