Bharat Tiwari केस के बाद फिर चर्चा में एनकाउंटर नियम

Update: 2026-06-21 09:43 GMT

Bihar: बिहार के भोजपुर जिले में हुए भरत तिवारी एनकाउंटर मामले ने बड़ा राजनीतिक और सामाजिक विवाद खड़ा कर दिया है। मामले की गंभीरता को देखते हुए मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने न्यायिक जांच कराने का ऐलान किया है। यह जांच हाई कोर्ट के एक रिटायर्ड जज की निगरानी में होगी, ताकि पूरे मामले की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच सुनिश्चित की जा सके।

घटना 17 जून को शाहपुर थाना क्षेत्र के बिलौटी गांव में हुई थी, जहां पुलिस ने पिस्तौल लहराने के आरोप में भरत तिवारी को मुठभेड़ में गोली मार दी थी। इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। इसके बाद एक कथित वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ, जिससे पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठने लगे। घटना के बाद स्थानीय लोगों में भारी आक्रोश देखने को मिला और उन्होंने पटना-बक्सर नेशनल हाईवे को करीब 6 घंटे तक जाम कर दिया था। स्थिति को देखते हुए थानाध्यक्ष समेत चार पुलिसकर्मियों को निलंबित कर दिया गया है।

इस मामले के बाद सुप्रीम कोर्ट की 2014 की एनकाउंटर गाइडलाइंस पर भी बहस तेज हो गई है। इन गाइडलाइंस के अनुसार किसी भी मुठभेड़ में मौत होने पर तुरंत एफआईआर दर्ज करना, स्वतंत्र एजेंसी से जांच कराना और पोस्टमॉर्टम की वीडियो रिकॉर्डिंग अनिवार्य है। दोषी पाए जाने पर अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई का भी प्रावधान है। विवाद के बीच राजनीतिक हलचल भी तेज हो गई है। कई दलों के नेताओं ने इस एनकाउंटर पर सवाल उठाते हुए उच्च स्तरीय जांच की मांग की थी। उनका कहना है कि यदि युवक ने हथियार डाल दिए थे तो गोली नहीं चलनी चाहिए थी।

दूसरी ओर, पुलिस ने तीन एफआईआर दर्ज की हैं, जिसमें मृतक के साथ उसके पिता और भाई को भी आरोपी बनाया गया है। पुलिस का दावा है कि परिवार ने अवैध हथियार छिपाए थे और भरत को संरक्षण दिया था। स्थानीय लोगों का कहना है कि भरत एक सामाजिक कार्यकर्ता था, जो क्षेत्र की समस्याओं को लेकर आवाज उठाता था। अब पूरा मामला न्यायिक जांच के दायरे में आ गया है और इसके बाद ही सच्चाई सामने आने की उम्मीद है।

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