बिहार में घूस लेते रंगेहाथ पकड़े गए DSP, निगरानी टीम को देखते ही जमीन पर गिरे, फिर लगे रोने
मधुबनी। बिहार में भ्रष्टाचार के खिलाफ निगरानी विभाग ने बड़ी कार्रवाई करते हुए मधुबनी जिले के ट्रैफिक डीएसपी सुजीत कुमार को 30 हजार रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगेहाथ गिरफ्तार किया है। मंगलवार, 27 अक्टूबर को पटना से पहुंची निगरानी अन्वेषण ब्यूरो की टीम ने शाम करीब चार बजे नगर भवन के सामने स्थित ट्रैफिक डीएसपी कार्यालय में छापेमारी की। आरोप है कि डीएसपी ने शहर में ट्रिपर और डंपर वाहनों के संचालन के बदले एक वाहन संचालक से रिश्वत की मांग की थी। शिकायत मिलने के बाद निगरानी विभाग ने पूरे मामले का सत्यापन कराया और योजनाबद्ध तरीके से कार्रवाई कर अधिकारी को रिश्वत की रकम के साथ पकड़ लिया। गिरफ्तारी के बाद डीएसपी की तबीयत बिगड़ गई। वह जमीन पर गिर पड़े और रोने लगे। इसके बाद उन्हें इलाज के लिए अस्पताल ले जाया गया। इस कार्रवाई से पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया है।
ट्रिपर संचालक से मांगी थी 30 हजार रुपये की रिश्वत
जानकारी के अनुसार, मधुबनी जिले के पंडौल थाना क्षेत्र के गंधवार गांव निवासी रोहित मिश्रा ट्रिपर और डंपर वाहनों का संचालन करते हैं।
रोहित मिश्रा ने निगरानी अन्वेषण ब्यूरो में शिकायत दर्ज कराई थी कि मधुबनी के ट्रैफिक डीएसपी सुजीत कुमार शहर में उनके वाहनों को चलाने के बदले रिश्वत मांग रहे हैं।
शिकायतकर्ता का आरोप था कि बिना पैसे दिए वाहनों के संचालन में परेशानी पैदा की जा रही थी। इससे परेशान होकर उन्होंने निगरानी विभाग से संपर्क किया।
मामले की गंभीरता को देखते हुए विभाग ने शिकायत का सत्यापन कराने का निर्णय लिया। जांच में रिश्वत मांगने के आरोप की पुष्टि होने के बाद डीएसपी को पकड़ने के लिए विशेष टीम बनाई गई।
पटना से पहुंची आठ सदस्यीय निगरानी टीम
निगरानी विभाग के डीएसपी पवन कुमार के नेतृत्व में आठ सदस्यीय विशेष टीम का गठन किया गया था।
टीम मंगलवार को पटना से मधुबनी पहुंची। अधिकारियों ने पहले से तैयार योजना के अनुसार ट्रैफिक डीएसपी कार्यालय के आसपास निगरानी शुरू की।
बताया जा रहा है कि शिकायतकर्ता रोहित मिश्रा को निर्धारित रकम लेकर अधिकारी के पास भेजा गया। इसके बाद निगरानी टीम उचित समय का इंतजार करने लगी।
शाम करीब चार बजे जैसे ही ट्रैफिक डीएसपी सुजीत कुमार ने कथित रिश्वत के 30 हजार रुपये स्वीकार किए, निगरानी टीम ने उन्हें पकड़ लिया।
अधिकारियों ने मौके से रिश्वत की रकम बरामद की और संबंधित प्रक्रिया पूरी करते हुए डीएसपी को हिरासत में ले लिया।
अपने ही कार्यालय में पकड़े गए ट्रैफिक डीएसपी
इस कार्रवाई की सबसे खास बात यह रही कि ट्रैफिक डीएसपी सुजीत कुमार को उनके ही कार्यालय में पकड़ा गया।
नगर भवन के सामने स्थित कार्यालय में अचानक निगरानी विभाग के अधिकारियों के पहुंचने से अफरा-तफरी मच गई।
कार्यालय में मौजूद कर्मचारियों और आसपास के लोगों को शुरुआत में समझ नहीं आया कि आखिर क्या हो रहा है।
जब जानकारी मिली कि निगरानी विभाग ने ट्रैफिक डीएसपी को रिश्वत लेने के आरोप में गिरफ्तार किया है, तो पूरे इलाके में घटना की चर्चा शुरू हो गई।
पुलिस विभाग के वरिष्ठ अधिकारी के खिलाफ हुई इस कार्रवाई को भ्रष्टाचार विरोधी अभियान के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
गिरफ्तारी के बाद जमीन पर गिरकर रोने लगे डीएसपी
गिरफ्तारी के बाद ट्रैफिक डीएसपी सुजीत कुमार की तबीयत अचानक बिगड़ गई।
प्रत्यक्षदर्शियों के हवाले से प्रकाशित खबरों के अनुसार, कार्यालय से बाहर निकलने के दौरान डीएसपी जमीन पर गिर पड़े और रोने लगे।
इस घटना का एक वीडियो भी सोशल मीडिया पर प्रसारित हो रहा है। वीडियो में अधिकारी जमीन पर लेटे दिखाई दे रहे हैं। हालांकि, वीडियो की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
गिरफ्तारी के बाद उनकी बिगड़ती हालत को देखते हुए निगरानी टीम ने तत्काल चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराई।
उन्हें मधुबनी सदर अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उनका उपचार शुरू किया।
हाई ब्लड प्रेशर के कारण बिगड़ी तबीयत, ICU में भर्ती
मधुबनी सदर अस्पताल में चिकित्सकों ने डीएसपी सुजीत कुमार की स्वास्थ्य जांच की।
अस्पताल के चिकित्सक डॉ. कुणाल के अनुसार, उच्च रक्तचाप के कारण उनकी तबीयत बिगड़ी थी। इसके बाद उन्हें अस्पताल के आईसीयू में भर्ती किया गया।
घटना की जानकारी मिलने पर पुलिस लाइन डीएसपी जितेंद्र प्रसाद और सदर एसडीपीओ अमित कुमार भी अस्पताल पहुंचे।
अधिकारियों ने चिकित्सकों से डीएसपी की स्वास्थ्य स्थिति की जानकारी ली।
अस्पताल में उपचार के दौरान निगरानी विभाग के अधिकारी और पुलिसकर्मी भी मौजूद रहे।
एसएसपी ने की गिरफ्तारी की पुष्टि
मधुबनी के एसएसपी योगेंद्र कुमार ने ट्रैफिक डीएसपी सुजीत कुमार की गिरफ्तारी की पुष्टि की है।
उन्होंने बताया कि पटना से आई निगरानी विभाग की टीम ने 30 हजार रुपये की रिश्वत लेने के आरोप में डीएसपी को गिरफ्तार किया है।
वहीं, निगरानी टीम का नेतृत्व कर रहे डीएसपी पवन कुमार ने बताया कि शिकायतकर्ता की ओर से रिश्वत मांगने की शिकायत मिलने के बाद उसका सत्यापन कराया गया था।
सत्यापन में आरोप सही पाए जाने पर निगरानी विभाग ने कार्रवाई की।
अधिकारियों के अनुसार, इस मामले में आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी है। हालांकि, रिश्वत लेने के आरोप में गिरफ्तारी हुई है और दोषसिद्धि का फैसला न्यायिक प्रक्रिया के बाद होगा।
10 साल पहले भी 27 अक्टूबर को हुई थी बड़ी कार्रवाई
इस घटना के बाद मधुबनी में दस साल पहले हुई एक और बड़ी निगरानी कार्रवाई की चर्चा शुरू हो गई है।
दरअसल, 27 अक्टूबर 2016 को निगरानी विभाग की टीम ने जयनगर अनुमंडल कार्यालय में कार्रवाई की थी।
उस समय तत्कालीन एसडीएम गुलाम मुस्तफा अंसारी और तत्कालीन डीएसपी चंदन पुरी को रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार किया गया था।
डीएसपी चंदन पुरी पर 50 हजार रुपये और एसडीएम गुलाम मुस्तफा अंसारी पर एक लाख रुपये की रिश्वत लेने का आरोप था।
अब ठीक दस साल बाद 27 अक्टूबर 2026 को मधुबनी के ट्रैफिक डीएसपी सुजीत कुमार की गिरफ्तारी ने उस पुराने मामले की याद दिला दी है।
पुलिस महकमे में मचा हड़कंप
ट्रैफिक डीएसपी जैसे जिम्मेदार पद पर तैनात अधिकारी की गिरफ्तारी ने बिहार पुलिस की कार्यप्रणाली को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं।
यातायात व्यवस्था को सुचारु बनाए रखने और सड़क सुरक्षा नियमों का पालन कराने की जिम्मेदारी ट्रैफिक पुलिस अधिकारियों की होती है।
ऐसे में वाहनों के संचालन के बदले रिश्वत मांगने का आरोप गंभीर माना जा रहा है।
इस मामले में अब यह जांच का विषय है कि कथित रिश्वत की मांग केवल शिकायतकर्ता से की गई थी या अन्य वाहन संचालकों के साथ भी इस तरह की अनियमितता हुई थी।
हालांकि, किसी अन्य वाहन संचालक से रिश्वत लिए जाने की पुष्टि अभी सामने नहीं आई है।
भ्रष्टाचार के खिलाफ निगरानी विभाग की कार्रवाई जारी
बिहार में सरकारी कर्मचारियों और अधिकारियों के खिलाफ रिश्वत मांगने की शिकायतों पर निगरानी अन्वेषण ब्यूरो कार्रवाई करता है।
शिकायत मिलने पर विभाग पहले आरोपों का सत्यापन करता है। इसके बाद पर्याप्त आधार मिलने पर संबंधित अधिकारी या कर्मचारी को रिश्वत लेते पकड़ने के लिए जाल बिछाया जाता है।
मधुबनी के मामले में भी यही प्रक्रिया अपनाई गई।
फिलहाल निगरानी विभाग डीएसपी सुजीत कुमार के खिलाफ आगे की कानूनी कार्रवाई में जुटा है। मामले से संबंधित दस्तावेज और बरामद रकम जांच का महत्वपूर्ण हिस्सा होंगे।
इस घटना ने एक बार फिर सरकारी पदों पर तैनात अधिकारियों की जवाबदेही और भ्रष्टाचार के खिलाफ निगरानी व्यवस्था की अहमियत को चर्चा में ला दिया है।